Bihar News : बेऊर जेल के अंदर नियमों की उड़ाई जा रही थी धज्जियां, सुपरिटेंडेंट सस्पेंड; छापेमारी में खुली पोल
Bihar Plice : बिहार सरकार ने बेऊर जेल के अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधीक्षक पर जेल के भीतर हाई सिक्योरिटी सेल में नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप है। युवा कैदियों ने मानसिक और शारीरिक शोषण करने का भी आरोप लगाया है।
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बिहार की सबसे हाई-प्रोफाइल जेलों में शुमार आदर्श केंद्रीय कारा बेऊर में व्याप्त घोर कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार और अराजकता को लेकर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। कारा निरीक्षणालय और जिला प्रशासन की औचक छापेमारी में मिलीं गंभीर अनियमितताओं के बाद बेऊर जेल के अधीक्षक नीरज कुमार झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय विशेष केंद्रीय कारा भागलपुर तय किया गया है। वहीं, बेऊर जेल की कमान तत्काल प्रभाव से सहायक कारा महानिरीक्षक राजीव कुमार को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंप दी गई है। इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री की हरी झंडी के बाद राज्यपाल के आदेश से अमलीजामा पहनाया गया है।
युवा कैदियों का शारीरिक-मानसिक शोषण, जेल प्रशासन की मिलीभगत
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक औचक निरीक्षण के दौरान बेऊर जेल के भीतर जो सच सामने आया, वह बेहद चौंकाने वाला और डरावना है। जेल के भीतर हाई सिक्योरिटी सेल में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कम उम्र के युवा बंदियों को शातिर और उम्रदराज कुख्यात अपराधियों के साथ ठूंसा गया था। जांच टीम ने पाया कि जेल प्रशासन की इस घोर लापरवाही के कारण युवा कैदियों का मानसिक और शारीरिक शोषण हो रहा था, जिसे जेल प्रबंधन मूकदर्शक बनकर बढ़ावा दे रहा था।
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जांच रिपोर्ट में बेऊर जेल के काले कारनामों का खुलासा
छापेमारी दल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में बेऊर जेल के भीतर चल रहे अवैध धंधों की लंबी फेहरिस्त उजागर हुई है। जेल के लगभग सभी वार्डों में अवैध रूप से गैस और हीटर का संचालन हो रहा था। हद तो यह है कि जब जांच टीम जेल के अंदर मौजूद थी, तब भी बंदी खुलेआम हीटर पर खाना बना रहे थे। जेल की कैंटीन में बंदियों से एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे थे। बाहर से सामान लाकर जेल प्रशासन ऊंचे दामों पर बंदियों को बेच रहा था। सरकारी मेन्यू के अनुसार कैदियों को भोजन नहीं दिया जा रहा था। जेल के भीतर रसूखदार बंदियों द्वारा प्राइवेट मेस का संचालन किया जा रहा था, जिसके एवज में अन्य कैदियों से अवैध वसूली होती थी। जेल के सरकारी खातों और लेखा पंजियों का संधारण नियमों के मुताबिक नहीं पाया गया, जो बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करता है।
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छुट्टी पर होने के बावजूद जांच में अड़ाया रोड़ा
जांच के दौरान जेल अधिकारियों का अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना रवैया भी सामने आया। छापेमारी के वक्त जेल के अधिकारी जांच टीम को सहयोग करने के बजाय, बिना सुरक्षा के ही टीम को बंदियों के बीच छोड़कर बाहर चले गए, जिससे टीम की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। यही नहीं, तत्कालीन अधीक्षक नीरज कुमार झा उस दिन अवकाश पर थे। इसके बावजूद वे अचानक जेल पहुंचे और जांच टीम के काम में बाधा डालने और प्रतिरोध उत्पन्न करने की कोशिश की। सरकार ने उनके इस कृत्य को गंभीर अनुशासनहीनता, कर्तव्यहीनता और धृष्टता का परिचायक माना है।
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कड़ी कार्रवाई के दायरे में अधिकारी
गृह विभाग के निलंबन के आदेश के अनुसार, बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत नीरज कुमार झा के खिलाफ प्रपत्र-क में आरोप पत्र गठित कर अलग से कड़ी विभागीय कार्यवाही चलाई जाएगी। निलंबन के दौरान उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। सरकार ने इस आदेश की प्रति बिहार राजपत्र (गजट) के अगले अंक में प्रकाशित करने का निर्देश दिया है।