अंडरवियर में परीक्षा देने के मुद्दे पर हाइकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
- अंडरवियर में परीक्षा देने का मामला
- हाइकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
- अखबार की खबरों को ही याचिका माना
- नकल रोकने को सेना ने करवाई थी परीक्षा
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सेना में क्लर्क की भर्ती परीक्षा में परीक्षार्थियों को सिर्फ अंडरवियर में परीक्षा देने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। पटना हाइकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी की दो सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में मीडिया रिपोर्ट को ही पीआइएल माना है।
हाईकोर्ट के जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी और अंजना मिश्रा की बेंच ने कहा कि कहीं भी ऐसी हरकत की तस्वीर दिखेगी, तो हाईकोर्ट जरूर संज्ञान लेगा। इस मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने खबर को ही पीआईएल में तब्दील कर मंगलवार को इसको इसे सूचीबद्ध किया।
कोर्ट ने इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, बिहार को भी नोटिस दिया है, ताकि सुनवाई के वक्त वो केंद्र का पक्ष रख सकें। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
नकल रोकने के लिए अर्धनग्न करवाए गए थे छात्र
इधर, इस पूरे मामले पर मीडिया से बात करते हुए सेना भर्ती बोर्ड के डायरेक्टर कर्नल बीएस गोधारा ने बताया कि हमारा पुराना अनुभव बुरा रहा है। लिखित परीक्षा में कोई गड़बड़ी न हो, इसलिए इस तरह से परीक्षा ली गयी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले रविवार को दौड़ और मेडिकल जांच में सफल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए चक्कर मैदान में लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा शुरू होने से पहले अभ्यर्थियों से कहा गया कि वह सभी पेपर देने से पहले अपने पैंट-शर्ट उतार ले और सिर्फ अडंरवियर में ही बैठकर परीक्षा दें।
बाद में यह पता चला कि ऐसा परीक्षार्थियों से इसलिए कहा गया ताकि वह परीक्षा के दौरान नकल नहीं कर सकें। इसके बाद लगभग 1150 परीक्षार्थियों ने लगभग अर्धनग्न अवस्था में एक मैदान में बैठककर परीक्षा दी थी। इस फरमान को लेकर लोग हैरत में पड़ गये थे। कुछ लोगों के मुताबिक यह अमानवीय दृश्य था और दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।