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बिहार: कृषि प्रखंड विकास पदाधिकारी की मौत पर क्यों मचा हंगामा, किस डॉक्टर पर लगा आरोप, क्या आया जवाब?
Wed, 21 Oct 2026 01:53 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/ मसौढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/ मसौढ़ी
Published by: आदित्य आनंद
Updated Wed, 21 Oct 2026 01:53 PM IST
सार
Bihar News : सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान मौत पर हंगामा होता रहा है, लेकिन इस बार एक सरकारी अधिकारी की निजी अस्पताल में मौत का मामला गरमाया हुआ है। पटना के एक निजी नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप है।
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कृषि पदाधिकारी राजलक्ष्मी की मौत डॉक्टर की लापरवाही के कारण हुई।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पटना के राजा बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के कुछ घंटे बाद प्रखंड कृषि पदाधिकारी राजलक्ष्मी की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल के इलाज और आपात स्थिति में डॉक्टर की उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के बाद राजलक्ष्मी की तबीयत अचानक बिगड़ी, लेकिन सूचना देने के बावजूद डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचीं। परिवार ने अस्पताल की सुविधाओं और गर्भावस्था के दौरान कराई गई जांच की भी पड़ताल कराने की मांग की है।
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परिजनों के मुताबिक, राजलक्ष्मी को 12 अक्टूबर को पूनम सर्जिकल एंड मेटरनिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 13 अक्टूबर को दोपहर करीब तीन बजे ऑपरेशन से उन्होंने बेटे को जन्म दिया। नवजात का वजन 2.1 किलोग्राम बताया गया है।परिवार का कहना है कि शाम करीब साढ़े सात बजे तक डॉक्टर ने उनकी स्थिति सामान्य बताई थी। इसके कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। रात करीब सवा आठ बजे उनकी नब्ज की गति 162 तक पहुंच गई और वह दर्द से परेशान थीं। परिजनों ने मौजूद नर्सों को स्थिति की जानकारी दी। राजलक्ष्मी के पिता और वरिष्ठ पत्रकार केके लाल का आरोप है कि डॉक्टर को बुलाने के बावजूद वह दो से ढाई घंटे बाद पहुंचीं। परिवार का दावा है कि समय पर इलाज मिल जाता तो राजलक्ष्मी की जान बच सकती थी। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
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अस्पताल की सुविधाओं और जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कृषि पदाधिकारी राजलक्ष्मी के पिता केके लाल ने अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की उपलब्धता और निर्धारित मानकों के पालन की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गर्भावस्था के दौरान विभिन्न जांच कराने के लिए भी दबाव बनाया जाता था। परिवार चाहता है कि उन जांचों की जरूरत और प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाए। परिजनों ने घटना के दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि जांच के दौरान घटनाक्रम का पता लगाया जा सके। उन्होंने आशंका जताई है कि साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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सिविल सर्जन ने दिया जांच का आश्वासन
मामले में पटना के सिविल सर्जन ने निजी अस्पताल की जांच कराने की बात कही है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन वहां से कोई जिम्मेदार व्यक्ति बयान देने के लिए मौजूद नहीं था। बता दें कि राजलक्ष्मी की शादी वर्ष 2024 में हुई थी। वह पटना सिटी के मुसल्लहपुर क्षेत्र में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। पहले बच्चे के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन उनकी मौत से परिजन सदमे में हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि राजलक्ष्मी की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी, आपात स्थिति में इलाज मिलने में देरी हुई या नहीं और अस्पताल में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध थीं या नहीं। इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के तथ्यों से ही सामने आएंगे। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से ले और अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई करे।