Bihar News : सीएम नीतीश कुमार से अब इस मामले में बराबर हो गए जीतन राम मांझी, पिछले दिनों रहे थे चर्चा में
Bihar Politics : पिछले दिनों बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कोपभाजन बने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अब एक और मामले में उनकी बराबरी कर ली है। जीतन राम मांझी की भी जीवनी छपकर आ गई है।
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बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान आरक्षण बढ़ाए जाने से पहले उसकी समीक्षा किए जाने की बात उठाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की जमकर फजीहत कर दी थी। उन्होंने यह तक कह दिया था कि उनकी मूर्खता के कारण मांझी मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने अपने निर्णय पर पछतावा जताया था। लेकिन, अब एक और मामले में मांझी ने उनकी बराबरी कर ली है। कुछ महीने पहले नीतीश कुमार पर उनके मित्र ने किताब लिखी थी, अब मांझी की जीवनी पर भी किताब आ गई है। छठ के खरना के दिन मांझी पर लिखी इस किताब का विमोचन हुआ। मांझी ने खुद बताया कि वह इस किताब के लिए क्यों राजी हुए।
हमने किसी से अपनी जीवनी लिखने के लिए कोई आग्रह नहीं किया
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि हम ऐसे सर्वहारा वर्ग से आए हैं। हमलोगों की जीवनी के बारे में बोलने और लिखने में बहुत लोगों का इंटरेस्ट नहीं होता है। हमलोग अच्छा काम करते हैं, उसको भी लोग नहीं लिखना चाहता है। एक बड़े लेखक अशरफ अस्थानवी को हमने कहा था कि हम गरीबों की जीवनी कौन लिखता था। तब उन्होंने एक कितना लिख दी। उसका नाम दिया टूट स्लेट और पेंसिल से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक। वह कितना हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू में निकली है। हमने किसी से अपनी जीवनी लिखने के लिए कोई आग्रह नहीं किया। लेखकों ने कहा कि आप जिस वर्ग से आए हैं , जितना काम किया, उसे लिपिबद्ध किया जाए। इसके बाद हमने सहयोग किया। हमारे जैसे गरीब तबके के लोगों का उन्होंने जीवनी लिखी। एक ब्राह्मण होकर चंदन जी ने मेरी जीवनी लिखी मैं इसके लिए धन्यवाद देता हूं। मेरे जीवन की आकृतियों को इन्होंने उकेरा है, इससे हमारे समाज के युवाओं को काफी सीख मिलेगी।
मांझी बोले- मैं जाति, आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से सबसे गया-गुजरा रहा हूं
जीतन राम मांझी ने कहा कि मैं बहुत गरीब तबका से आता हूं। काफी संघर्ष कर यहां पहुंचा हूं। मैं जाति, आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से सबसे गया-गुजरा रहा हूं। मैं जिस समाज से आता हूं वहां पढ़ाई लिखाई और राजनीति का कोई हिसाब नहीं है। मेरे पिताजी नाच करते थे। दिवाली दशहरा पर जब वह नाच करने जाते थे। वह पैसे लेकर गाना गाते थे। रोज नया नया गाना बनाकर गाते थे। लोग उनसे प्रभावित हुए और पूछा कि कितना पढ़े लिखे हैं। तो उन्होंने कहा कि मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं। लोगों ने कहा कि बेटे को पढ़ाओ। तब उन्होंने काफी दुख तकलीफों को झेलकर मुझे पढ़ाया। मैंने बीए ऑनर्स किया। काफी संघर्ष के बाद राजनीति में आया और आज आपलोगों के समाने हूं।