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बिहार: बिना किताब गुजरा साल, पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने को मजबूर हुए बच्चे

Fri, 11 Dec 2020 11:11 AM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: अनिल पांडेय Updated Fri, 11 Dec 2020 11:11 AM IST
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Bihar News: A Year Passed Without A Book, Leaving School To Work
स्कूल - फोटो : amar ujala
पढ़ाई करने के लिए किताबें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। अगर वही बच्चों को न मिले, तो बच्चा अपना भविष्य कैसे बनाएगा। बिहार सरकार हर साल 1 से 5वीं क्लास तक के बच्चों को 250 रुपए और कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को 400 रुपए की राशि देती, ताकि वह पढ़ाई के लिए किताबें खरीद लें। इस साल 24 जिलों के छात्रों के खाते में किताब खरीदने के लिए राशि आई है, जबकि 27 जिलों में पुस्तक शिविर लगा तक ही नहीं। मध्य विद्यालय महेशपुर अलीगंज, भागलपुर में चौथी कक्षा पढ़ने वाला स्टूडेंट मुस्कान कुमार इन दिनों फल की दुकान पर संतरे बेच रहा है। इसी तरह मध्य विद्यालय पुलिस लाइन का एक छात्र रमण इन दिनों सब्जी बेच रहा है। यह बच्चों  शौक नहीं है, यह उनकी मजबूरी है।
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बच्चों के पास पढ़ने के लिए किताबें नहीं

इसका कारण यह है कि कोरोना महामारी की वजह से आठ महीने से ज्यादा स्कूल बंद हैं। सरकार दावे भले ही कर रही हो कि दूरदर्शन पर पढ़ाई कराई जा रही है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि बच्चों के पास किताबें ही नहीं है, अब यह लोग पढ़े तो कैसे पढ़ें? स्कूल में पढ़ाई का सत्र शुरु होने से पहले लॉकडाउन लग गया। जिसकी वजह से कई जिलों में किताबों के शिविर नहीं लग पाए। पुस्तक शिविर केवल चार जिले मुजफ्परपुर, बेगूसराय, नालंदा और शेखपुरा में लगा। ऐसे में बाकि के 34 जिलों में छात्रों की स्थित समझी जा सकती है।
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इस वजह से करनी पड़ रही नौकरी

इस लॉकडाउन में कई बच्चों के माता-पिता के नौकरी जा चुकी है। जिसके कारण कई बच्चों को पढ़ाई छोड़कर कमाई करनी पड़ रही है। लेकिन स्कूल बंद होने के बाद कितने बच्चे मजदूरी कर रहे है या कूड़ा तक बीन रहे हैं इसका आंकड़ा भले ही शिक्षा के विभाग के पास न हो, पर कई जिलों से ऐसी तस्वीर देखने को मिली हैं।
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दोषियों पर की जाएगी कार्रवाई

इस संबंध शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा, बच्चों के खाते में किताब की राशि भेज दी गई है, 55 प्रकाशकों को कक्षा 1 से 8 तक के लिए निर्धारित पाठ्य पुस्तक छापकर जिलों में भेजने की जिम्मेदारी दी गई थी। अगर बच्चों को किताबें नहीं मिली है तो इसके लिए दोषियों को पकड़कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
  
 
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