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बिहार: गरीबों को आरक्षण और 2021 में जाति आधारित जनगणना कराने का प्रस्ताव पारित, नीतीश का लालू पर तंज

Tue, 19 Feb 2019 11:32 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 19 Feb 2019 11:32 AM IST
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10 percent Reservation for poor and caste based census in 2021 bill passed in Bihar Assembly
नीतीश-लालू
बिहार विधानसभा ने सोमवार को 2021 की जनगणना जाति आधारित कराए जाने और विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू की गई विभागवार रोस्टर प्रणाली को खत्म करते हुए पूर्ववत विश्वविद्यालय स्तरीय रोस्टर के आधार पर नियुक्ति करने से संबंधित प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने वाला विधेयक भी पारित हो गया। आरक्षण संबंधी विधेयक पेश होने के दौरान विपक्षी दलों विशेष रूप से राजद ने भारी हंगामा किया। 
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बिहार विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने जाति आधारित जनगणना और रोस्टर प्रणाली संबंधी दोनों विधेयक पेश किए। दोनों प्रस्ताव को केंद्र को भेजे जाने को सदन ने सोमवार को ध्वनि मत से पारित कर दिया। 
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बीती 13 फरवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि 2021 में जनगणना जाति आधारित कराए जाने और विश्वविद्वालयों में यूजीसी द्वारा लागू की गई विभागवार रोस्टर प्रणाली को समाप्त करते हुए पूर्ववत विश्वविद्यालय स्तरीय रोस्टर के आधार पर नियुक्ति करने के संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके केंद्र को भेजा जाए।
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राज्यपाल लालजी टंडन के बिहार विधानमंडल के संयुक्त सत्र को गत 11 फरवरी को दिए गए अभिभाषण पर चर्चा के बाद अपने संबोधन में गत 13 फरवरी को नीतीश ने कहा था कि वे शुरू से ही जनगणना जाति आधारित कराए जाने के पक्षधर रहे हैं और इसकी मांग 1990 में ही कर चुके हैं।

नीतीश ने कहा कि देश की आजादी के पूर्व 1931 में अंतिम बार जाति आधारित जनगणना हुई थी।

नीतीश ने कहा कि 2011 में हुई जनगणना के समय में सामाजिक-आर्थिक जातीय सर्वेक्षण कराया गया था जो कि ठीक से नहीं हो सका था जिसके कारण कोई आंकड़ा तैयार नहीं सका और यह जाति आधारित जनगणना नहीं थी।

उन्होंने कहा कि जब एक बार जाति आधारित जनगणना हो जाएगी तो सही मायने में सभी वर्ग की जनसंख्या के बारे में पता चल पाएगा।

नीतीश ने कहा था कि वर्तमान में जो आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा है उसे बढ़ाकर जाति आधारित जनगणना के मुताबिक आरक्षण की सीमा को बढाया जाए और एक खास प्रतिशत निर्धारित किया जाए।

उन्होंने विश्वविद्वालयों में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर उच्चतम न्यायालय के हाल में आए निर्णय की चर्चा करते हुए कहा था कि इस आरक्षण व्यवस्था के लागू हो जाने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को बहुत बड़ा नुकसान होगा।

उन्होंने इस मामले में पहले के प्रावधान को बनाए रखने की वकालत करते हुए आग्रह किया था। बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा था कि दोनों विषयों पर सदन के इस सत्र के दौरान चर्चा कराई जाएगी। 

राजद के हंगामे पर नीतीश का लालू पर निशाना

10 percent Reservation for poor and caste based census in 2021 bill passed in Bihar Assembly
नीतीश कुमार
आर्थिक रूप से कमजोर तबके को 10 फीसदी आरक्षण देने वाला विधेयक भी सोमवार को बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित हो गया। इस विधेयक पर कांग्रेस के विधायकों अवधेश कुमार सिंह, रामदेव राय, अमिता भूषण द्वारा लाए गए संशोधन प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गए। 

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के सिलसिले में विपक्षी राजद के विधायकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विधानसभा में भारी हंगामा और नारेबाजी की। जिस पर नीतीश ने चारा घोटाले में सजायाफ्ता और रांची के रिम्स अस्पताल में इलाज करा रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का नाम लिए बगैर कहा कि "रांची से आए आदेश" पर यह नारेबाजी हो रही है।

गौरतलब है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून (पॉक्सो) की धाराओं के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करने वाली एक अदालत ने पिछले हफ्ते मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के एक आरोपी की अर्जी में उठाए गए बिंदुओं की छानबीन के लिए मामले को सीबीआई के पास भेज दिया था। इस अर्जी में 2013 से 2018 के दौरान आश्रय गृह को राशि आवंटित किए जाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और समाज कल्याण विभाग के कई शीर्ष नौकरशाहों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी।

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में 30 से अधिक लड़कियों के यौन शोषण का मामला सामने आया था। इस कांड की जांच अब सीबीआई कर रही है।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजद सहित अन्य विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा शुरू किया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्षी अपनी मांग पर अडे़ रहे और आसन के निकट आकर नारेबाजी शुरू कर दी।

राजद विधायकों के भारी हंगामा करने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, "जो इस विधेयक का विरोध करेगा, वह बुरी तरह झेलेगा।" नीतीश ने इशारों-इशारों में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधा। 

नीतीश ने कहा, "गरीब सवर्णों को आरक्षण देने पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। यह मसौदा  सर्वसम्मति से पास होना चाहिए। मैं जानता हूं कि हंगामा करने वाले आधा से ज्यादा विधायक इसके समर्थक हैं, लेकिन ये भी मजबूर हैं, क्या करें, रांची से आदेश जो आया है। करिए हंगामा। मस्त रहिए। जो मन में आए बोलते रहिए। विधेयक का पारित होना, ऐतिहासिक काम है। जो लोग सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें याद रखना चाहिए कि आपको इसका जवाब जनता को देना पड़ेगा।" 

चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद वर्तमान में रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाजरत हैं।

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच सदन द्वारा "बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए) आरक्षण विधेयक 2019" और "बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) विधेयक 2019" सहित कुल सात विधेयकों को ध्वनि मत से पारित किए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सदन की कार्यवाही आगामी 20 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी।
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