प्रोफेसर अनुराधा: कैंसर से लड़कर 10 हजार बच्चों को पढ़ाया
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मुश्किल हालात में भी हौसले के साथ मिशन में जुटे रहने वाले लोग ही दूसरों के लिए प्रेरणा बनते हैं। सेक्टर-11 पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज (जीसी-11) केमिस्ट्री विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर अनुराधा शर्मा भी ट्राइसिटी की ऐसी हस्तियों में शामिल हैं। सुकून और आराम की जिंदगी छोड़ उन्होंने गरीब बच्चों को शिक्षित कर उन्हें अपने पैरों पर खड़े होना सिखाया।
करीब 12 वर्षों से प्रो. अनुराधा घरों में काम करने वाले और बेघर बच्चों को शिक्षित करने में जुटी हैं। इतने वर्षों में उन्होंने 10 हजार से अधिक गरीब बच्चों को जिंदगी की नई राह दिखाई हैं। इनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चे अब सरकारी नौकरी और खुद का रोजगार चला रहे हैं।
गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने समाजसेवी संस्था ‘हमारी कक्षा’ 2003 में शुरू की थी। इसके बाद बच्चों का कारवां बढ़ता गया। प्रो. अनुराधा के इस जज्बे की उनका कॉलेज स्टाफ और प्रिंसिपल भी सराहना करते हैं।
प्रिंसिपल प्रो. जेके सहगल बताते हैं कि ऐसे शिक्षक ही समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। प्रो. अनुराधा को उनके नि:स्वार्थ मिशन के लिए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा स्टेट अवार्ड, रेड एंड व्हाइट ब्रेवरी अवार्ड सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
गरीब बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी ली
500 बच्चों की हमारी कक्षा
घर में कामकाजी महिलाओं के 10-12 बच्चों से प्रो. अनुराधा ने हमारी कक्षा मिशन को शुरू किया। शिक्षा विभाग ने उनके जज्बे को देखते हुए उन्हें सेक्टर-7 स्थित गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में दोपहर बाद क्लास लगाने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद तो प्रो. अनुराधा के मिशन में कई युवा और शिक्षक जुड़ते गए। अनुराधा बताती हैं कि इस करीब 500 स्टूडेंट हमारी कक्षा के सेक्टर-7, कैंबवाला, साई मंदिर-29 और मनसा देवी कॉम्पलेक्स में पढ़ाई कर रहे हैं।
पति की मौत के बाद जिंदगी से नहीं मानीं हार
प्रो. अनुराधा शर्मा के लिए जिंदगी की राहें कभी आसान नहीं थी। पति की अचानक मौत के बाद उनके लिए सदमे से उबर पाना मुमकिन नहीं था। लेकिन गरीब बच्चों को पढ़ाने में उन्हें ऐसा सुकून मिला कि उनकी जिंदगी का मिशन ही बदल गया। ये गरीब बच्चे उनके परिवार के सदस्य बन गए। कैंसर जैसी बीमारी से जूझने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कैंसर से लड़ाई और बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला जारी रहा। उनकी इच्छा शक्ति के सामने कैंसर भी हार गया। प्रो. अनुराधा कहती हैं कि अगर हर शिक्षित इंसान एक गरीब बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी ले तो निरक्षरता को देश से खत्म किया जा सकता है।