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संघर्ष की प्रतिमूर्ति मेवात की रजिया

Tue, 22 Mar 2016 09:24 AM IST
दिनेश देशवाल/अमर उजाला, गुड़गांव
दिनेश देशवाल/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Tue, 22 Mar 2016 09:24 AM IST
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mewat raziya is icon for every hardworking women
मेवात की रजिया - फोटो : अमर उजाला

मेवात में सुविधाओं की कमी के कारण प्रतिभाएं निखरकर सामने नहीं आ पातीं हैं। वहीं कुछ प्रतिभाएं इन कमियों से लड़ते हुए शिखर पर पहुंचती हैं। ऐसी ही एक प्रतिभा से आज हम आपको रूबरू करा रहे है जिनका नाम है रजिया।

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 39 वर्षीय रजिया मेवात के बडकली चौक की रहने वाली हैं। बता दें कि मेवात की अधिकांश आबादी मुस्लिम हैं, जो अपनी रूढ़िवादी और दकियानूसी सोच के चलते लड़कियों के प्रति काफी उदासीन है। इसके चलते मेवात में लड़कियों की शिक्षा दर काफी कम है। ऐसे में रजिया को अपनी पढ़ाई के लिए काफी मुश्किलाें का सामना करना पड़ा।
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उनके परिवार ने भी उनकी पढ़ाई छुड़ाने की कोशिश की लेकिन रजिया की जिद्द के आगे किसी की नहीं चली। रजिया ने दो विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई  सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से समाजसेवा और स्वयं व दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। मात्र 19 साल की उम्र में रजिया की शादी हो गई लेकिन किस्मत से उन्हें ऐसा पति मिला जिसने रजिया को सपनों को पूरा करने में उनका साथ दिया।
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पति के साथ की बदौलत रजिया ने  बीए, एमए समाजशास्त्र व एमए उर्दू, जेबीटी, बीएड की डिग्रियां हासिल कीं। इसके बाद  रजिया ने सामाजिक संस्था सहगल फाउंडेशन में 7 वर्ष खंड समन्वयक, मनरेगा स्कीम में एबीपीओ की नौकरी 3 वर्ष, सामुदायिक रेडियो में टीम समन्वयक के तौर पर काम किया।

रजिया ने एनजीओ सहगल फाउंडेशन के साथ महिला शिक्षा के लिए सबसे अधिक कार्य किया। जब वे इसके साथ जुड़ीं तो मेवात में मात्र 8 मुस्लिम महिलाएं स्नातक थीं। महिला शिक्षा को लेकर इन्होंने घागस गांव को चुना, जिसमें एक भी लड़की दसवीं पास नहीं थी। रजिया ने बेटियों को स्कूल तक पहुंचाने व उनके मां-बाप को उनकी पढ़ाई के लिए रजामंद किया।

रजिया की बदौलत आज घागस गांव में कई लड़कियां स्नातक  जेबीटी कर चुकी हैं। मेवात में खेती का कार्य अधिकांश महिलाएं संभालती हैं। इस दिशा में भी रजिया ने सराहनीय काम किया उसने तमाम महिलाओं को कृषि, बागवानी विभाग से प्रशिक्षण दिलाकर अच्छी खेती के प्रति जागरूक किया । इसके अलावा परचून की दुकान, सिलाई  प्रशिक्षण व अन्य प्रशिक्षण दिलाकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। अभी भी रजिया स्वास्थ्य विभाग में जिला आशा समन्वयक का कार्य देख रही है और उनके पास 950 आशा वर्कर काम कर रही हैं।


सम्मान:
-लड़की शिक्षा पर वर्ष 1998 में तत्कालीन महामहिम राज्यपाल के हाथों बेस्ट वूमेन अवार्ड प्राप्त किया।
- 11 जुलाई 2005 को महामहिम राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों जमशेद जी टाटा नेशनल वर्च्अुल अकेडमी फार रुरल प्रोस्पेरिटी पर फेलोशिप प्राप्त की।
-26 जनवरी 2006 को समाजसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए तत्कालीन मंत्री राव दानसिंह ने सम्मानित किया।
-वर्ष 2007 में महामहिम राज्यपाल डॉ. एआर किदवई के हाथ समाजसेवा और नारी सशक्तिकरण पर जिला स्तरीय पुरस्कार प्राप्त किया।
-राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2007 को हरियाणा सरकार से सोशल वर्क के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सम्मानित किया।
-इसी वर्ष महामहिम राज्यपाल से मास्टर ब्लड डोनर का खिताब प्राप्त किया।
-2007 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मानिक राव से सोशल वर्क अवार्ड प्राप्त किया।

 देश की पंद्रह महिलाओं में मिला स्थान
रजिया के इस संघर्ष ने वर्ष 2015 में डॉ. शशि गोगटे और मिक मिनार्ड द्वारा लिखी गई द पोईट्री आफ परपज(लक्ष्य लीला) नामक पुस्तक में स्थान प्राप्त किया। इस पुस्तक में देश की 15 संघर्षशील महिलाओं की भारतीय नारियों की नेतृत्व प्रतिभा विषय पर आधारित जीवनी लिखी गई है। इसमें रजिया ने भी स्थान बनाया है। वहीं इनको लेकर अमेरिका में भी एक पुस्तक लिखी गई है।

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