गुडग़ांव का रक्तदाता जो बन गया लोगों का जीवन रक्षक
परिचय...
नाम जितेन्द्र सुखराली
उम्र 41 वर्षढ6
शिक्षा ग्रेजुएशन (बीए) एमडीयू
पत्नी रीना (गृहणी)
बच्चे एक बेटा और एक बेटी
रोजगार पेस्ट कंट्रोल का बिजनेस
विस्तार
विरले ही होते हैं जो खुद से पहले दूसरों के जीवन की चिंता करते हैं। गुडग़ांव में ऐसा ही एक नाम है जितेन्द्र सुखराली का। बात वर्ष 1998 की है, जब एक सड़क दुर्घटना में उनके दोस्त राजीव की मौत हो गई।
मौत का कारण दुर्घटना से कहीं अधिक रक्त की कमी थी। बस इसी बात ने सुखराली को झकझोर दिया। तभी से उन्होंने ठान लिया कि वह रक्त की कमी से लोगों को मरने नहीं देंगे।
अब तक उन्होंने करीब 2000 लोगों का जीवन रक्तदान कर और करवा कर बचाया है। इस प्रयास में करीब 4000 वालंटियरों को साथ जोड़ा है। जितेन्द्र बताते हैं कि उनके वालंटियर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक के जरूरतमंदों को निशुल्क रक्त उपलब्ध कराते हैं। उनके पास रोजाना 10 से 12 कॉल रक्त की डिमांड के लिए आती हैं। जिसमें से करीब पांच से छह लोगों की इस मांग को पूरा कर पाते हैं।
दोस्त की मौत ने सुखराली को झकझोरा
सुखराली बताते हैं कि उनके मित्र राजीव सड़क हादसे में बुरी तरह से घायल हो गए। अधिक रक्तस्राव हो जाने के कारण तत्काल रक्त की जरूरत थी। गुडग़ांव में कहीं नहीं मिला। इसलिए वह भागकर दिल्ली गए।
जब वह वहां से रक्त लेकर पहुंचे तो देखा की उनके दोस्त ने शहर के कल्याणी हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया था। तभी से उन्होंने शपथ ली कि अपनी जानकारी में किसी घायल को रक्त की कमी से नहीं मरने देंगे।
रक्तदान की शुरूआत उन्होंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर की। वर्ष 1999 में पहला ब्लड डोनेशन कैंप आईटीआई गुडग़ांव की मदद से लगाया। वर्ष 2004 में अपने इस प्रयास को बड़ा रूप देते हुए अपने गांव सुखराली में ब्लड हेल्प लाइन सोसायटी गुडग़ांव की स्थापना की।
दिल्ली-एनसीआर के अलावा हापुड़, आगरा, जयपुर, जोधपुर, गंगानगर, अलवर और पूरे हरियाणा में उनसे जुड़े चार हजार वालंटियर जरूरतमंदों की मदद इस सोसायटी के माध्यम से कर रहे हैं।
जितेन्द्र को हरियाणा सरकार 2004 में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान इसके लिए सम्मानित भी कर चुकी है। अब तक इन्होंने स्वयं 40 बार रक्तदान किया है।
कैसे की जाती है जरूरतमंदों की मदद...
जब कहीं से जितेन्द्र के मोबाइल (9811818719 यही हेल्पलाइन नंबर भी है) पर ब्लड के लिए फोन आता है तो वह उस स्थान के अपने सबसे नजदीकी वालंटियर का नंबर पेशेंट या उसके परिजनों को दे देते हैं।
जब उनके द्वारा वालंटियर से संपर्क किया जाता है तो वह स्वयं हॉस्पिटल पहुंच जाता है। इसके लिए पेशेंट के परिजनों से किसी प्रकार का किराया भी नहीं लिया जाता। सुखराली की सरकार से मांग है कि गुडग़ांव में एक सरकारी ब्लड बैंक स्थापित कराया जाए। जिससे लोगों के जीवन को बचाने में मदद मिले।
एबी निगेटिव और ओ निगेटिव ब्लड की उपब्धता कम...
ब्लड हेल्प लाइन सोसायटी गुडग़ांव के अध्यक्ष जितेन्द्र सुखराली बताते हैं कि उनके पास एबी निगेटिव और ओ निगेटिव ब्लड की उपलब्धता कम है। वर्तमान में उनके साथ एबी निगेटिव ब्लड वाले 200 और ओ निगेटिव वाले 250 वालंटियर हैं। उन्होंने बताया कि वालंटियर समय के साथ नए बनते रहते हैं कुछ पुराने छोड़ भी जाते हैं। वह बताते हैं कि उन्हें अपने परिवार से इस काम में पूरी मदद मिलती है। सोयासटी ने करीब 60 लोगों को सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायलों को उठाकर अस्पताल तक भी पहुंचाया है और रक्त भी दिया है।