दून के युवा ने बनाई स्टार्टअप की मिसाल, दोस्तों संग गाड़ा सफलता का झंडा
- दून के युवाओं ने बनाई पोर्टेबल सोलर लाइट्स की कंपनी
- साढ़े चार माह पहले शुरू किया था काम, चार राज्यों में कारोबार
- अनोखे तरीके के सोलर प्रोडक्ट्स से ग्राहकों के बीच बना रहे पैठ
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मार्केट में पहले से उपलब्ध सोलर लाइट्स प्रोडक्ट्स के मुकाबले यह कंपनी बिल्कुल जुदा और सस्ते प्रोडक्ट बाजार में उपलब्ध करा रही है।
एमबीए बायोटेक करने वाले राकेश बिस्वास ने पढ़ाई के दौरान ही वैकल्पिक ऊर्जा पर काम शुरू कर दिया था। वर्ष 2012 में उन्होंने इंटरनेशनल यूथ सोसाइटी ऑफ इकोफ्रेंडली एंड रिनिवेबल टेक्नालॉजी (आईजर्ट) संस्था की स्थापना की। साथियों के सहयोग से उनकी संस्था ने काम शुरू कर दिया। इस बीच सात दोस्त उनसे जुड़े और राकेश बिस्वास ने इनके साथ मिलकर 25 दिसंबर 2015 को आइजर्ट एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना की। मकसद था, सोलर एनर्जी में पहले से बाजार में मौजूद प्रोडक्ट्स के मुकाबले कुछ अलग प्रोडक्ट्स तैयार करके बाजार में उतारना।
साढ़े चार माह में टर्न ओवर पहुंचा 75 लाख
कम दाम और इधर से उधर ले जाने में सहूलियत वाले प्रोडक्ट्स होने के चलते ये थोड़े समय में ही जनता के बीच छा गए और कंपनी ने एक अप्रैल 2016 तक महज साढ़े चार महीने के अंतराल में 75 लाख का टर्नओवर कर लिया। कंपनी के सोलर लाइट प्रोडक्ट्स ऐसे हैं जो कि ऑटो मोड में चलते हैं। अंधेरा आते ही ऑटोमैटिक शुरू हो जाते हैं। यह सामान्य लाइट्स होती हैं, जो कि बिना भारी भरकम सोलर इंतजाम के ही चलती हैं।
यह प्रोडक्ट हैं बाजार में
पोर्टेबल सोलर स्ट्रीट लाइट्स, टेरेस, लॉन, गार्डन, स्ट्रीट, इंडस्ट्रीज, स्कूल और कॉलेजों के लिए आठ वॉट से 60 वॉट तक की लाइट्स। पोर्टेबल सोलर जेनरेटर्स, जो कि 300 वॉट से 100 किलोवॉट के बीच की पावर वाले हैं। यह जेनरेटर ऑफ ग्रिड व ऑन ग्रिड सिस्टम पर काम करते हैं और 36 घंटे तक का पावर बैकअप देते हैं।
यह है आइजर्ट टीम
राकेश बिस्वास- सीईओ, आरती त्रिवेदी- जीएम, दुर्गेश गौड़, वासिद गौड़, भोपाल सिंह, शुभम मलिक, योगेश, जैद-डायरेक्टर।