{"_id":"5704bd064f1c1bad43c8111a","slug":"bashindey-umeed-ki-mashal-raj-kumar-raju-pathankot-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"राज कुमार राजूः 21 सालों से भीख मांगकर कर रहा समाजसेवा","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
राज कुमार राजूः 21 सालों से भीख मांगकर कर रहा समाजसेवा
जितेंद्र शर्मा/अमर उजाला, पठानकोट
Updated Wed, 06 Apr 2016 01:10 PM IST
विज्ञापन
बाशिंदे, राजकुमार राजू
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपनी जरूरतें पूरी करने लोग पैसे कमाने के लिए सुबह से शाम तक लगे रहते हैं। दूसरों की बिना किसी स्वार्थ सेवा करने हेतु कार्य करने वाले दुनिया में कम ही लोग होते हैं। पंजाब के पठानकोट जिले का रहने वाला दिव्यांग राज कुमार राजू बिना स्वार्थ गरीबों की मदद कर दूसरों को प्रेरणा दे रहा है। यहां इंदिरा कलोनी में रहने वाला राजकुमार पिछले 21 वर्षों से भीख मांग रहा है।
राज कुमार ने 10 वर्ष की आयु में भीख मांगने का काम शुरू किया। उसके परिवार में उसके दो भाई व दो बहने हैं, लेकिन किसी ने भी उसके लिए नहीं सोचा। दोनों भाइयों का अपना कारोबार है। बहनें भी अच्छे घरों में अपना जीवन जी रही हैं। राजू बचपन से ही दिव्यांग था। इससे वह शिक्षा तो प्राप्त न कर सका लेकिन उसके दिल में समाज सेवा का जज्बा भरा था। लेकिन उसने अपनी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और भीख मांग कर समाज सेवा में लग गया।
राज कुमार भीख में मिले पैसों महाशिवरात्रि पर लोगों के लिए लंगर लगाता है। 15 अगस्त पर जरूरतमंद कन्याओं को सिलाई मशीनें वितरित करता है। सर्दियों में वह जरूरतमंदों को कंबल बांटता है। राज कुमार निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए सहयोग देता है और समाज सेवी संस्थाओं के धार्मिक कार्यक्रमों में आर्थिक रूप से सहयोग देने में भी पीछे नहीं रहता।
विज्ञापन
शहर के वार्डों में आने वाली समस्याओं का हल निगम का कार्य है लेकिन जब यह कार्य होता नहीं दिखता तो राज कुमार अपने पैसों से हल करवाया है। इसमें वार्डों में स्ट्रीट लाइटों व अन्य समस्याओं को हल करवाना शामिल है। दिव्यांग राजू न तो किसी से सहयोग मांगता है और न ही किसी से सहयोग की अपेक्षा रखता। राजू का कहना है कि जीवन में लोगों की अधिक से अधिक सेवा करना ही उसका काम है।
विज्ञापन
राज कुमार ने 10 वर्ष की आयु में भीख मांगने का काम शुरू किया। उसके परिवार में उसके दो भाई व दो बहने हैं, लेकिन किसी ने भी उसके लिए नहीं सोचा। दोनों भाइयों का अपना कारोबार है। बहनें भी अच्छे घरों में अपना जीवन जी रही हैं। राजू बचपन से ही दिव्यांग था। इससे वह शिक्षा तो प्राप्त न कर सका लेकिन उसके दिल में समाज सेवा का जज्बा भरा था। लेकिन उसने अपनी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और भीख मांग कर समाज सेवा में लग गया।
विज्ञापन
राज कुमार भीख में मिले पैसों महाशिवरात्रि पर लोगों के लिए लंगर लगाता है। 15 अगस्त पर जरूरतमंद कन्याओं को सिलाई मशीनें वितरित करता है। सर्दियों में वह जरूरतमंदों को कंबल बांटता है। राज कुमार निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए सहयोग देता है और समाज सेवी संस्थाओं के धार्मिक कार्यक्रमों में आर्थिक रूप से सहयोग देने में भी पीछे नहीं रहता।
विज्ञापन
शहर के वार्डों में आने वाली समस्याओं का हल निगम का कार्य है लेकिन जब यह कार्य होता नहीं दिखता तो राज कुमार अपने पैसों से हल करवाया है। इसमें वार्डों में स्ट्रीट लाइटों व अन्य समस्याओं को हल करवाना शामिल है। दिव्यांग राजू न तो किसी से सहयोग मांगता है और न ही किसी से सहयोग की अपेक्षा रखता। राजू का कहना है कि जीवन में लोगों की अधिक से अधिक सेवा करना ही उसका काम है।