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प्राणनाथ ज्योतिः पहले नशा छोड़ा, अब नशा छुड़ाओ केंद्र में कैंटीन चलाते हैं

Sun, 10 Apr 2016 06:26 PM IST
दविंदर पाल सिंह/अमर उजाला, मोगा
दविंदर पाल सिंह/अमर उजाला, मोगा Updated Sun, 10 Apr 2016 06:26 PM IST
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प्राणनाथ ज्योति - फोटो : फाइल फोटो
मोगा के प्राणनाथ ज्योति ने पहले खुद नशा छोड़ा, अब नशा केंद्र में कैंटीन चलाकर औरों को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। डिप्टी कमिश्नर कुलदीप सिंह वैद्य ने बताया कि रेडक्रास नशा छुड़ाओ एवं पुनर्वास केंद्र जनेर नशा छोड़ने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस केंद्र से हजारों नौजवान नशे से छुटकारा पाकर सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उक्त केंद्र में मरीजों की कसरत करने के लिए बड़े जिम का प्रबंध है।
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साथ ही रचनात्मक सोच वाली किताबें पढ़ने के लिए लाइब्रेरी, टीवी, वाटर कूलर और वॉलीबाल, क्रिकेट खेलने के लिए खेल सामग्री और ग्राउंड जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध करवाए गए हैं। नशा छुड़ाओ एवं पुनर्वास केंद्र जनेर से नशा छोड़कर इससे प्रभावित लोगों को रास्ता दिखाने वाले प्राणनाथ ज्योति यहीं पर सेवा भावना से अपनी कैंटीन चलाकर बेहतर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वह अन्य नौजवानों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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ज्योति ने बताया कि वे दो बच्चों के पिता हैं और उनका आढ़त का काफी अच्छा कारोबार था। ज्योति को लगभग ढाई-तीन साल पहले शराब की लत लग गई थी। धीरे-धीरे उन्होंने शराब के साथ-साथ नशीले कैप्सूल का भी सेवन करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि इस नशा लेने के लिए उन्हें पारिवारिक सदस्यों एवं दोस्तों से पैसे मांगने के लिए कई बार झूठ का सहारा भी लेना पड़ता, जिससे अक्सर उनके साथ सभी को परेशानी रहती।
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एक दिन उन्हें किसी दोस्त ने नशा छुड़ाओ केंद्र जनेर के बारे में बताया। उसने इस केंद्र में दाखिल होकर अपना इलाज करवाना शुरू किया। लगभग 30 दिन लगातार अपना इलाज करवाकर ज्योति को उस समय के डिप्टी कमिश्नर परमिंदर सिंह गिल ने केंद्र में ही कैंटीन खोलने के लिए प्रेरित किया। उनकी आर्थिक मदद भी की। प्राणनाथ ने सिर्फ खुद तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि नशा छोड़ने के इच्छुक मरीजों के लिए भी प्रेरणा स्रोत सिद्ध साबित हो रहा है।


प्राणनाथ ज्योति ने बताया कि मजबूत इच्छा शक्ति से जिंदगी में केवल नशा तो क्या हर बुराई से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। उसके अनुसार हरनशा करने वाले व्यक्ति के मन में यह वहम या डर होता है कि वह नशे का पूरी तरह आदी हो चुका है। अब उसके लिए नशा छोड़ना संभव नहीं है। उसने बताया कि मनुष्य का दृढ़ संकल्प और आत्म-विश्वास ऐसे वहम या डर को दूर कर उसे नशा छोड़ने के लिए मजबूर कर देता है।     
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