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जगदीश रायः बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने को समर्पित किया जीवन
जगदीश जोशी/अमर उजाला, मुक्तसर(पंजाब)
Updated Mon, 21 Mar 2016 02:25 PM IST
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बाशिंदे, जगदीश राय ढोसीवाल
- फोटो : अमर उजाला
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समाजसेवा के क्षेत्र में मुक्तसर की बुध विहार कॉलोनी निवासी सेवानिवृत अध्यापक जगदीश राय ढोसीवाल का नाम आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। वे कई सालों से निरंतर समाजसेवा के कार्यों में जुटे हैं। जगदीश राय ढोसीवाल ने साल 1992 में सरकारी हाई स्कूल झबेलवाली में अध्यापन क्षेत्र के साथ-साथ समाज भलाई कार्यों में रुचि लेनी शुरू कर दी।
इस दौरान पिछड़े वर्ग की दिक्कतों को उठाने और उनके हकों के लिए लड़ने के चलते उन्हें आल इंडिया एससीबीसी एसटी एकता भलाई मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का मौका मिला। इसके बाद साल 1995 में उन्होंने समाजसेवी गतिविधियों को और तेज करते हुए लार्ड बुद्धा चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया। इस समय वे ट्रस्ट के मौजूदा चेयरमैन भी हैं। वे अध्यापन क्षेत्र के साथ-साथ दलितों व पिछड़े वर्ग के लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष करते रहे।
2004 में दलितों के हक में संघर्ष करने पर समाज की ओर से उन्हें ‘दलित रत्न’ की उपाधि देकर नवाजा गया। साल 2012 में वे अध्यापक पद से सेवानिवृत हुए। इसके बाद से उनका जीवन समाजसेवा के कार्यों के लिए पूरी तरह से समर्पित हो गया। इन दिनों ढोसीवाल मुक्तसर विकास मिशन के नाम से संस्था चला प्रशासनिक अधिकारियों के सामने शहर के विकास के मुद्दों को भी उठाते हैं, ताकि लोगों को समस्याओं से निजात दिलाई जा सके।
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उन्होंने अपने इस मिशन में कई सियासी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्यों को भी जोड़ लिया है। ढोसीवाल गरीब लड़कियों के विवाह करवाने, सिलाई-कढ़ाई सेंटर चलवा लड़कियों को अपने पांव पर खड़ा करने के अलावा मेधावी विद्यार्थियों व सौ प्रतिशत नतीजा देने वाले अध्यापक साथियों को सम्मानित कर उनकी हौसला अफजाई के लिए भी जाने जाते हैं। जगदीश राय ढोसीवाल जहां समाजसेवा को समर्पित हैं, वहीं धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर रुचि लेते हैं।
उपलब्धियां
ढोसीवाल अब तक 127 गरीब कन्याओं का विवाह करवा चुके हैं। लड़कियों को पांव पर खड़ा करने के उद्देश्य से भारत में उनका 40वां निशुल्क सिलाई-कढ़ाई सेंटर चल रहा। उनकी ओर से अब तक मुक्तसर, फिरोजपुर, अबोहर, जालंधर के अलावा देहरादून (उत्तराखंड) और मंगलूर (जम्मू) में 39 सिलाई सेंटर भी चलाए जा चुके हैं। वे बीते पंद्रह सालों से कन्या लोहड़ी मेले का आयोजन कर रहे हैं।
इसके तहत वे अब तक कुल 4,628 नवजन्मी बच्चियों की लोहड़ी मनाते हुए कपड़े व अन्य तोहफे दे चुके हैं। ढोसीवाल को ही सबसे पहले कन्या लोहड़ी मेला शुरू कराने का श्रेय भी जाता है। ढोसीवाल आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा के अब तक करीब चार हजार विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ा चुके हैं। उन्होंने सौ प्रतिशत नतीजा देने वाले करीब आठ सौ अध्यापकों को भी सम्मानित किया है।
अकेले संघर्ष कर दिलाए सैकड़ों लोगों को प्लॉट
मुक्तसर ही नहीं राज्य में किसी जिले में जरूरतमंदों को मदद की जरूरत हो और उनसे संपर्क करे तो जगदीश राय ढोसीवाल मदद से इंकार नहीं करते। कई साल पहले फरीदकोट की इंदिरा कॉलोनी व कपूर बस्ती में 40 सालों से रह रहे दलित वर्ग के लोगों को कब्जे छोड़ने का आदेश आ गया। किसी तरह से पिछड़े वर्ग के लोग ढोसीवाल के संपर्क में आ गए तो उन्होंने अकेले दम पर संघर्ष कर साल 2011 में वहां रह रहे सैकड़ों लोगों को गांव टहिणा में दो-दो मरले के प्लॉट दिलवाए।
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इस दौरान पिछड़े वर्ग की दिक्कतों को उठाने और उनके हकों के लिए लड़ने के चलते उन्हें आल इंडिया एससीबीसी एसटी एकता भलाई मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का मौका मिला। इसके बाद साल 1995 में उन्होंने समाजसेवी गतिविधियों को और तेज करते हुए लार्ड बुद्धा चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन किया। इस समय वे ट्रस्ट के मौजूदा चेयरमैन भी हैं। वे अध्यापन क्षेत्र के साथ-साथ दलितों व पिछड़े वर्ग के लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष करते रहे।
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2004 में दलितों के हक में संघर्ष करने पर समाज की ओर से उन्हें ‘दलित रत्न’ की उपाधि देकर नवाजा गया। साल 2012 में वे अध्यापक पद से सेवानिवृत हुए। इसके बाद से उनका जीवन समाजसेवा के कार्यों के लिए पूरी तरह से समर्पित हो गया। इन दिनों ढोसीवाल मुक्तसर विकास मिशन के नाम से संस्था चला प्रशासनिक अधिकारियों के सामने शहर के विकास के मुद्दों को भी उठाते हैं, ताकि लोगों को समस्याओं से निजात दिलाई जा सके।
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उन्होंने अपने इस मिशन में कई सियासी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्यों को भी जोड़ लिया है। ढोसीवाल गरीब लड़कियों के विवाह करवाने, सिलाई-कढ़ाई सेंटर चलवा लड़कियों को अपने पांव पर खड़ा करने के अलावा मेधावी विद्यार्थियों व सौ प्रतिशत नतीजा देने वाले अध्यापक साथियों को सम्मानित कर उनकी हौसला अफजाई के लिए भी जाने जाते हैं। जगदीश राय ढोसीवाल जहां समाजसेवा को समर्पित हैं, वहीं धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर रुचि लेते हैं।
उपलब्धियां
ढोसीवाल अब तक 127 गरीब कन्याओं का विवाह करवा चुके हैं। लड़कियों को पांव पर खड़ा करने के उद्देश्य से भारत में उनका 40वां निशुल्क सिलाई-कढ़ाई सेंटर चल रहा। उनकी ओर से अब तक मुक्तसर, फिरोजपुर, अबोहर, जालंधर के अलावा देहरादून (उत्तराखंड) और मंगलूर (जम्मू) में 39 सिलाई सेंटर भी चलाए जा चुके हैं। वे बीते पंद्रह सालों से कन्या लोहड़ी मेले का आयोजन कर रहे हैं।
इसके तहत वे अब तक कुल 4,628 नवजन्मी बच्चियों की लोहड़ी मनाते हुए कपड़े व अन्य तोहफे दे चुके हैं। ढोसीवाल को ही सबसे पहले कन्या लोहड़ी मेला शुरू कराने का श्रेय भी जाता है। ढोसीवाल आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा के अब तक करीब चार हजार विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ा चुके हैं। उन्होंने सौ प्रतिशत नतीजा देने वाले करीब आठ सौ अध्यापकों को भी सम्मानित किया है।
अकेले संघर्ष कर दिलाए सैकड़ों लोगों को प्लॉट
मुक्तसर ही नहीं राज्य में किसी जिले में जरूरतमंदों को मदद की जरूरत हो और उनसे संपर्क करे तो जगदीश राय ढोसीवाल मदद से इंकार नहीं करते। कई साल पहले फरीदकोट की इंदिरा कॉलोनी व कपूर बस्ती में 40 सालों से रह रहे दलित वर्ग के लोगों को कब्जे छोड़ने का आदेश आ गया। किसी तरह से पिछड़े वर्ग के लोग ढोसीवाल के संपर्क में आ गए तो उन्होंने अकेले दम पर संघर्ष कर साल 2011 में वहां रह रहे सैकड़ों लोगों को गांव टहिणा में दो-दो मरले के प्लॉट दिलवाए।