फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   bashinde story on amir

दोनों हाथ नहीं, पर जज्बे से क्रिकेटर बने आमिर

Wed, 25 May 2016 07:14 PM IST
फिदा हुसैन, अमर उजाला/अनंतनाग
फिदा हुसैन, अमर उजाला/अनंतनाग Updated Wed, 25 May 2016 07:14 PM IST
विज्ञापन
bashinde story on amir
आम‌िर एक बेहतरीन क्र‌िकेटर हैं - फोटो : Amar Ujala
कहते हैं अगर आपके अंदर हौसला हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। इस बात को सच कर दिखाया है दक्षिणी कश्मीर के वागहामा के रहने वाले आमिर ने। एक हादसे में आमिर को अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। उसके बाद भी वे एक बेहतरीन क्रिकेटर हैं। आमिर की प्रसिद्धि का अंदाज इसी बात से लगा सकते हैं कि उनका मैच देखने के लिए दूरदराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
विज्ञापन


आमिर हादसे का जिक्र करते हुए बताते हैं कि बचपन में वे भी सभी बच्चों की तरह सामान्य जीवन जी कर रहे थे, लेकिन 1997 में हुए एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। आमिर ने बताया कि एक दिन वे अपने माता-पिता के लिए खाना लेकर मिल में गए थे, जब उनके माता-पिता खाना खाने में व्यस्त थे उसी वक्त वे मिल में लगी मशीनों से छेड़छाड़ करने लगे।
विज्ञापन


मशीन में उनके दोनों हाथ फंस गए और कंधे से कट गए। उस वक्त उनकी उम्र सात साल थी। हादसे के बाद करीब सात महीनों तक उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा। आमिर क्रिकेट के शौकीन थे और क्रिकेटर बनना चाहता थे, लेकिन दोनों हाथ खोने की वजह से उनका हौसला टूटता जा रहा था। अस्पताल से छुट्टी के कुछ ही दिन बाद आमिर फिर से बीमार पड़ गए। इलाज के लिए पैसे नहीं होने की वजह से उसके घर वालों को जमीन तक बेचनी पड़ी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आमिर ने बताया कि उन्हें क्रिकेट और सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी में खासी दिलचस्पी थी। घर में टीवी नहीं होने की वजह से आमिर उस वक्त भारत का मैच देखने अपने पड़ोसियों के घर जाते थे। वहीं
से उन्होंने क्रिकेटर बनने की ठानी।

दोनों हाथ न होने के बावजूद भी उनका हौसला बरकरार रहा और कड़ी मेहनत के बाद आमिर क्रिकेटर बनने में कामयाब हुए। वे पैरों की उंगलियों में गेंद फंसाकर गेंदबाजी करते हैं, जबकि गर्दन और कंधे की हड्डी में बैट फंसाकर बल्लेबाजी करते हैं। 

इस समय वे जम्मू-कश्मीर पैरा क्रिकेट टीम के खिलाड़ी है। उन्होंने क्रिकेट के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। अभी वे स्नातक द्वितीय वर्ष में हैं। 2015 में जम्मू कश्मीर की पैरा टीम ने जब दिल्ली को हराया था उस वक्त आमिर ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था। रियासत के जाने-माने क्रिकेटर भी आमिर का मैच देखने पहुंचते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं।


आमिर का कहना है कि सरकार की ओर से आज तक उसे कोई सहायता नहीं उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने कहा कि सेना कश्मीर में बहुत सारी क्रिकेट प्रतियोगिताएं कराती रहती है, वे चाहते हैं कि सेना उनकी मदद को आगे आए। उनका एक और सपना है कि क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर उन्हें अपनी क्रिकेट एकेडमी में शामिल कर उन्हें क्रिकेट के टिप्स दें, ताकि वे और अच्छा प्रदर्शन कर सकें। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed