दिव्यांगता से आदित्य ने नहीं हारा हौंसला, JEE मेंस में देशभर में हासिल की 95 वीं रैंक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इसका जीता जागता उदाहरण पेश किया है आदित्य ने। जाखणीधार ब्लाक के ढुंगमंदार पट्टी के दूरस्थ गांव सेमा के आदित्य नौटियाल ने दिव्यांगता को मात देते हुए जेईई की परीक्षा देश में 95 रैंक और उत्तराखंड में दूसरा स्थान हासिल का गौरव बढ़ाया है।
सेमा गांव के भगवती प्रसाद नौटियाल के बेटे आदित्य नौटियाल का पैर वर्ष 2006 में बस के नीचे आ गया था, जिससे उसका एक पैर कमजोर हो गया। आदित्य भले ही पांव से कमजोर हो गया था, लेकिन उसने मन से हार नहीं मानी और कुछ बेहतर करने की ठानी।
आदित्य ने गांव के सरस्वती शिशु निकेतन सेमंडीधार से सातवीं की पढ़ाई करने के बाद ढालवाला स्थित पुष्प बडेरा सरस्वती शिशु मंदिर से वर्ष 2016 में इंटर किया था।
इसके बाद देहरादून के आकाश इंस्टीट्यूट में कोचिंग लेकर जेईई (ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन) की परीक्षा में देशभर में 95 रैंक और उत्तराखंड में दूसरी रैंक हासिल की है। अब वह इंजीनियर बनकर भाभा परमाणु अनुसंधान में हाथ अजमाना चाहता है।