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एतिहासिक: दुनिया की सबसे ऊंची सड़क का राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन, जानें इसके बारे में 6 बड़ी बातें
Wed, 29 Dec 2021 12:43 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 29 Dec 2021 12:43 PM IST
सार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Chisumle-Demchok (चिसुमले-डेमचोक) सड़क का उद्घाटन किया है जो अब 19,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर चलाने वाली सड़क है।
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world highest motorable road in ladakh
- फोटो : PIB
विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Chisumle-Demchok (चिसुमले-डेमचोक) सड़क का उद्घाटन किया है जो अब 19,00 फीट से अधिक ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची मोटर चलाने वाली सड़क है। दक्षिणी लद्दाख में स्थित, चिसुमले-डेमचोक सड़क खासतौर पर महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह चीन के साथ सटे सरहदी इलाकों में सैन्य वाहनों की आसान आवाजाही में मदद करेगा। चिसुमले-डेमचोक को इंजीनियरिंग के चमत्कार के रूप में जाना जाता है क्योंकि इतनी ऊंचाई पर सड़क का निर्माण करने पर कई महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश आती हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं चिसुमले-डेमचोक सड़क की 6 खास बातें।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल
दुनिया की सबसे ऊंची सड़क जिस पर मोटर वाहन चलाए जा सकते हैं, अब पूर्वी लद्दाख में उमलिंग ला दर्रे पर 19,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस सड़क का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इस ऊंचे पहाड़ी दर्रे से होते हुए बीआरओ ने 52 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क बनाई है। उमलिंग ला दर्रे की सड़क अब पूर्वी लद्दाख के चुमार सेक्टर के महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ती है।
इसका रिकॉर्ड तोड़ा
उमलिंग ला दर्रा ने अब बोलीविया में स्थित 18,953 फीट के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। बोलीविया में पिछली सबसे ऊंची सड़क उटुरुंकु नामक ज्वालामुखी से जुड़ती है।
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गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल
दुनिया की सबसे ऊंची सड़क जिस पर मोटर वाहन चलाए जा सकते हैं, अब पूर्वी लद्दाख में उमलिंग ला दर्रे पर 19,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस सड़क का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इस ऊंचे पहाड़ी दर्रे से होते हुए बीआरओ ने 52 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क बनाई है। उमलिंग ला दर्रे की सड़क अब पूर्वी लद्दाख के चुमार सेक्टर के महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ती है।
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इसका रिकॉर्ड तोड़ा
उमलिंग ला दर्रा ने अब बोलीविया में स्थित 18,953 फीट के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। बोलीविया में पिछली सबसे ऊंची सड़क उटुरुंकु नामक ज्वालामुखी से जुड़ती है।
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world highest motorable road ladakh
- फोटो : PIB
माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप से भी ऊंचा
इस सड़क की वास्तविक स्थिति को ऐसे समझ सकते हैं कि यह माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप (आधार शिविरों) से भी ऊंचा है। तिब्बत में उत्तरी बेस 16,900 फीट की ऊंचाई पर है, जबकि नेपाल में दक्षिण बेस कैंप 17,598 फीट पर स्थित है। माउंट एवरेस्ट का शिखर 29,000 फीट से थोड़ा ज्यादा ऊंचा है।
बीआरओ का हौसला
Border Roads Organisation (BRO), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कोशिशों की बदौलत भारत अब दुनिया की सबसे ऊंची मोटर वाहन चलाने योग्य सड़क का दावा कर सकता है। बीआरओ भारतीय सशस्त्र बल की सड़क बनाने वाली एजेंसी है। बीआरओ को भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ सबसे दुर्गम इलाकों में सड़कें बनाने में विशेषज्ञता हासिल है।
इस सड़क की वास्तविक स्थिति को ऐसे समझ सकते हैं कि यह माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप (आधार शिविरों) से भी ऊंचा है। तिब्बत में उत्तरी बेस 16,900 फीट की ऊंचाई पर है, जबकि नेपाल में दक्षिण बेस कैंप 17,598 फीट पर स्थित है। माउंट एवरेस्ट का शिखर 29,000 फीट से थोड़ा ज्यादा ऊंचा है।
बीआरओ का हौसला
Border Roads Organisation (BRO), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कोशिशों की बदौलत भारत अब दुनिया की सबसे ऊंची मोटर वाहन चलाने योग्य सड़क का दावा कर सकता है। बीआरओ भारतीय सशस्त्र बल की सड़क बनाने वाली एजेंसी है। बीआरओ को भारत की उत्तरी सीमाओं के साथ सबसे दुर्गम इलाकों में सड़कें बनाने में विशेषज्ञता हासिल है।
world highest motorable road in ladakh
- फोटो : PIB
ड्राइवरों के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण
उमलिंग ला दर्रा मशहूर खारदुंग ला दर्रे की तुलना में ड्राइवरों के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस दर्रे का तापमान भीषण सर्दियों के मौसम में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। साथ ही, इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य स्थानों की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम है। जिससे किसी के लिए भी यहां ज्यादा समय तक रहना बहुत मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय आबादी के लिए वरदान
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि, "यह स्थानीय आबादी के लिए वरदान साबित होगा क्योंकि यह लेह से चिसुमले और डेमचोक को जोड़ने वाला एक वैकल्पिक सीधा रास्ता बन गया है। यह सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगा और लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देगा।"
उमलिंग ला दर्रा मशहूर खारदुंग ला दर्रे की तुलना में ड्राइवरों के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस दर्रे का तापमान भीषण सर्दियों के मौसम में माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। साथ ही, इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य स्थानों की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम है। जिससे किसी के लिए भी यहां ज्यादा समय तक रहना बहुत मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय आबादी के लिए वरदान
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि, "यह स्थानीय आबादी के लिए वरदान साबित होगा क्योंकि यह लेह से चिसुमले और डेमचोक को जोड़ने वाला एक वैकल्पिक सीधा रास्ता बन गया है। यह सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगा और लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देगा।"