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अब भारत में दुनिया का सबसे अच्छा पेट्रोल और डीजल ईंधन, ऐसे हुई थी शुरुआत
Thu, 02 Apr 2020 01:50 PM IST
अवधेश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Thu, 02 Apr 2020 01:50 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भारत बुधवार से उन देशों में शामिल हो गया है जो दुनिया का सबसे अच्छा पेट्रोल और डीजल दे रहे हैं। बता दें कि इसके लिए तेल कंपनियों ने यूरो- VI उत्सर्जन के अनुरूप ईंधन तैयार किया था। वहीं एक अप्रैल से बीएस4 ग्रेड ईंधन की आपूर्ति शुरू करने के लिए तेल कंपनियों की समय सीमा थी, लेकिन अधिकांश ने इसे पहले ही शुरू कर दिया था।
ऐसे ईंधन के लिए भारत में एक कार्यक्रम 1990 के दशक में शुरू हुआ था। 1994 में पहली बार कम सीसा पेट्रोल के बारे में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में इस बारे में जानकारी दी गई। वहीं इसके 6 साल बाद सीसा रहित पेट्रोल को शासान के आदेश पर पूरे देश में लागू कर दिया। BS-2000 (यूरो- I समतुल्य, BS-1) उत्सर्जन मानदंड नए वाहनों के लिए अप्रैल 2000 से शुरू किए गए थे।
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ऐसे ईंधन के लिए भारत में एक कार्यक्रम 1990 के दशक में शुरू हुआ था। 1994 में पहली बार कम सीसा पेट्रोल के बारे में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में इस बारे में जानकारी दी गई। वहीं इसके 6 साल बाद सीसा रहित पेट्रोल को शासान के आदेश पर पूरे देश में लागू कर दिया। BS-2000 (यूरो- I समतुल्य, BS-1) उत्सर्जन मानदंड नए वाहनों के लिए अप्रैल 2000 से शुरू किए गए थे।
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जबकि नई कारों के लिए BS-II (Euro-II समतुल्य) मानदंड पहली बार सन् 2000 में दिल्ली में और इसके एक साल बाद इन मानदंडों को अन्य वाहनों के लिए आगे बढ़ा दिया गया। भारत ने 2010 में 350 पार्ट्स प्रति मिलियन सल्फर सामग्री के साथ यूरो- III समतुल्य और (भारत स्टेज- III) ईंधन को अपनाया। वहीं इसके सात साल बाद बीएस4 ईंधन में भेज दिया, जिसमें 50 पीपीएम की सल्फर सामग्री थी। तीन साल बाद BS4 को BS6 ईंधन में बदला गया जिसमें सल्फर की मात्रा 10 पीपीएम थी।
देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी Indian Oil Corporation (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन) (आईओसी) के अध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि देशभर में BS6 मानक लागू करने की समय सीमा 1 अप्रैल का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। देश BS6 पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल करेगा। वास्तव में, हमने लगभग दो हफ्ते पहले देश भर में इन ईंधनों को बेचना शुरू कर दिया था। आईओसी अपने सभी 28 हजार पेट्रोल पंपों के जरिए अल्ट्रा-लो सल्फर ईंधन का वितरण कर रही है।
आईओसी के अधिकारियों ने बताया कि इस ईंधन में सल्फर व लेड का उत्सर्जन बहुत कम होता है। BS4 ईंधन में जहां सल्फर की मात्रा 50 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) होती है, वहीं BS6 ईंधन में सल्फर की मात्रा पांच गुना कम हो जाती है। इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन समेत तीनों ऑयल कंपनियों ने अपने सभी पंपों पर एक हफ्ता पहले ही BS6 मानक ईंधन की सप्लाई शुरू कर दी थी लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की थी बल्कि एक अप्रैल से इसकी बिक्री का औपचारिक एलान किया था।
पेट्रोलियम कंपनियों के अफसरों ने बताया कि 25 मार्च तक सभी पेट्रोल पंप, रिफाइनरी और भंडारण डिपो पर मानक के अनुरूप नए ईंधन का भंडारण और सप्लाई सुनिश्चित करनी थी। इसके सफल परीक्षण के बाद पहली अप्रैल से BS6 डीजल-पेट्रोल सप्लाई औपचारिक तौर पर शुरू किया जा रहा है। इस ईंधन से वायु प्रदूषण में काफी कमी आएगी।
पेट्रोलियम कंपनियों के अफसरों ने बताया कि 25 मार्च तक सभी पेट्रोल पंप, रिफाइनरी और भंडारण डिपो पर मानक के अनुरूप नए ईंधन का भंडारण और सप्लाई सुनिश्चित करनी थी। इसके सफल परीक्षण के बाद पहली अप्रैल से BS6 डीजल-पेट्रोल सप्लाई औपचारिक तौर पर शुरू किया जा रहा है। इस ईंधन से वायु प्रदूषण में काफी कमी आएगी।
क्या हैं BS (भारत स्टेज)
केंद्र सरकार वाहनों से होने वाले प्रदूषकों के उत्पादन को नियंत्रित करने के लिए मानक तय करती है। इसे बीएस, यानी भारत स्टेज कहा जाता है। केंद्र सरकार ने BS की शुरुआत वर्ष 2000 में की थी। इसे विभिन्न मानदंडों और मानकों के अनुसार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लाया गया।
केंद्र सरकार वाहनों से होने वाले प्रदूषकों के उत्पादन को नियंत्रित करने के लिए मानक तय करती है। इसे बीएस, यानी भारत स्टेज कहा जाता है। केंद्र सरकार ने BS की शुरुआत वर्ष 2000 में की थी। इसे विभिन्न मानदंडों और मानकों के अनुसार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लाया गया।
क्या हैं प्रदूषण के कारक
वाहनों से कौन से प्रमुख प्रदूषक पैदा होते हैं जिनसे प्रदूषण होता है। पेट्रोल-डीजल इंजन से मुख्य रूप से CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड), CO (कार्बन मोनोऑक्साइड), HC (हाइड्रोकार्बन) और NOx (नाइट्रोजन के ऑक्साइड) पैदा होता है। इनके अलावा PM (पार्टिकुलेट मैटर) या कार्बन सुट डीजल के साथ-साथ डायरेक्ट-इंजेक्शन पेट्रोल इंजन का एक अन्य उत्पाद होता है।
क्या है BS6
यह वायु प्रदूषण फैलाने वाले मोटर वाहनों सहित सभी इंजन वाले उपकरणों के लिए मानक के रूप में तय किया गया है। बताया जा रहा है कि बीएस6 ग्रेड के ईंधन से प्रदूषण में कमी होगी। BS6 ईंधन उत्सर्जन मानक पहले की तुलना में कड़े हैं। BS4 की तुलना में इसमें NOx का स्तर पेट्रोल इंजन के लिए 25 फीसदी और डीजल इंजन के लिए 68 फीसदी कम है। इसके अलावा डीजल इंजन के HC + NOx का स्तर 43 फीसदी और पार्टिकुलेट मैटर का स्तर 82 फीसदी कम किया गया है। प्रदूषण के इन मानकों को घटाने के लिए BS6 इंजनों में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है।
वाहनों से कौन से प्रमुख प्रदूषक पैदा होते हैं जिनसे प्रदूषण होता है। पेट्रोल-डीजल इंजन से मुख्य रूप से CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड), CO (कार्बन मोनोऑक्साइड), HC (हाइड्रोकार्बन) और NOx (नाइट्रोजन के ऑक्साइड) पैदा होता है। इनके अलावा PM (पार्टिकुलेट मैटर) या कार्बन सुट डीजल के साथ-साथ डायरेक्ट-इंजेक्शन पेट्रोल इंजन का एक अन्य उत्पाद होता है।
क्या है BS6
यह वायु प्रदूषण फैलाने वाले मोटर वाहनों सहित सभी इंजन वाले उपकरणों के लिए मानक के रूप में तय किया गया है। बताया जा रहा है कि बीएस6 ग्रेड के ईंधन से प्रदूषण में कमी होगी। BS6 ईंधन उत्सर्जन मानक पहले की तुलना में कड़े हैं। BS4 की तुलना में इसमें NOx का स्तर पेट्रोल इंजन के लिए 25 फीसदी और डीजल इंजन के लिए 68 फीसदी कम है। इसके अलावा डीजल इंजन के HC + NOx का स्तर 43 फीसदी और पार्टिकुलेट मैटर का स्तर 82 फीसदी कम किया गया है। प्रदूषण के इन मानकों को घटाने के लिए BS6 इंजनों में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है।
10 ही पीपीएम होगा सल्फर उत्सर्जन
BS6 नियम आने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। बीएस6 ईंधन से पर्टिकुलेट मैटर में इनकी 20 से 40 एमजीसीएम तक ही हिस्सेदारी रहेगी। इसके साथ ही बीएस6 ईंधन से 10 पीपीएम ही सल्फर का उत्सर्जन होगा।
आईओसी के अध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को BS6 मानक के अनुसार ज्यादा स्वच्छ पेट्रोल और डीजल बनाने के लिए करीब 35,000 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ा, और इस लक्ष्य को बिना किसी व्यवधान के सिर्फ तीन सालों में हासिल कर लिया गया।
BS6 नियम आने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। बीएस6 ईंधन से पर्टिकुलेट मैटर में इनकी 20 से 40 एमजीसीएम तक ही हिस्सेदारी रहेगी। इसके साथ ही बीएस6 ईंधन से 10 पीपीएम ही सल्फर का उत्सर्जन होगा।
आईओसी के अध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को BS6 मानक के अनुसार ज्यादा स्वच्छ पेट्रोल और डीजल बनाने के लिए करीब 35,000 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ा, और इस लक्ष्य को बिना किसी व्यवधान के सिर्फ तीन सालों में हासिल कर लिया गया।