ऑटो सेक्टर पर छाई घोर मंदी, बचने के लिए हो रहा है अब इस दिन का इंतजार
- मारुति सुजुकी की घरेलू बिक्री 17.2 प्रतिशत गिरी
- टाटा मोटर्स की पैसेंजर कारों की बिक्री 27 प्रतिशत गिरी
- ह्यूंदै मोटर इंडिया की बिक्री में 3.2 प्रतिशत की गिरावट
- टोयोटा की बिक्री 19 प्रतिशत गिरी
- महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री 9 प्रतिशत की कमी
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विस्तार
उम्मीद जताई जा रही थी कि जून का महीना ऑटो सेक्टर के लिए राहत की सांस लेकर आएगा। लेकिन हालात जस के तस ही हैं। मारुति सुजुकी, ह्यूंदै मोटर इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टोयोटा और टाटा मोटर्स की सेल्स में काफी गिरावट जून महीने में देखने को मिली है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्यों ऑटो सेक्टर को मंदी की मार झेलनी पड़ रही है? इसके पीछे वजह क्या है? वहीं, ऑटो सेक्टर को अब क्या उम्मीदें हैं ? इस सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमनें ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स की राय ली।
गिरती बिक्री पर हुंडई का बयान
ह्यूंदै मोटर इंडिया के सीनियर मैनेजर एंड ग्रुप हेड, मार्केटिंग पुनीत आनंद ने बताया कि गिरती सेल्स के पीछे रेट ऑफ इंटरेस्ट में बढ़ोतरी, फाइनेंशियल चैलेंजेस, मानसून की लेट-लतीफी जैसे कारण हैं, जुलाई का महीना वैसे ही मानसून वाला होता है, जिससे सेल्स पर निगेटिव असर पड़ता है। लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि अगस्त-सितम्बर महीने से बिक्री बढ़ेगी, कंपनी कुछ नए प्रोडक्ट्स को भी मार्किट में उतारेगी। वहीं इस बार हमें बजट से काफी उमीदें है कि सरकार इंडस्ट्री को सपोर्ट करेगी।
ऑटो एक्सपर्ट की राय
मंदी के दौर से गुजर रही ऑटो इंडस्ट्री पर मोटाउन इंडिया के एडिटर और ऑटो एक्सपर्ट रॉय पुनूस थार्यन (Roy Punnoose Tharyan) ने बताया कि नोट बंदी का असर अभी भी साफ़ नजर आता है। लोगों के पास जॉब्स नहीं हैं, देश में मानसून भी एक बड़ा कारण है। बीएस6 की वजह से गाड़ियों की कीमतें बढ़ गई हैं। ऐसे में लोगों की नई कार खरीदने में रूचि कम होने लगी।
बढ़ती कीमतें हैं एक वजह?
गौर करने वाली बात है कि मारुति सुजुकी की बिक्री पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। 3 महीने से लगातार गिरती बिक्री में कोई सुधार नहीं आया है। इतना ही नहीं कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली ऑल्टो और वैगन-आर भी गिरती बिक्री को रोक नहीं पाई। बल्कि खुद इनकी ही बिक्री में कमी दर्ज की जा रही है। मारुति ने ऑल्टो को नए सेफ्टी फीचर्स और बीएस6 इंजन में पेश तो किया लेकिन गाड़ी की कीमत ज्यादा हो गई। जिसके चलते इसकी डिमांड कम होती चली गई। वहीं दूसरे मॉडल्स के साथ भी यही कुछ ऐसा ही हश्र हुआ। कीमत बढ़ने से भी मांग में कमी देखने को मिली है।
मानसून भी है बड़ी वजह
एक रिपोर्ट के अनुसार देश में मानसून की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। भारत में करीब 30-40 फीसदी हिस्से में सूखे जैसे हालात की आशंका है। वहीं कई राज्यों में पानी-पानी हो गया है, मुंबई इसका एक बड़ा उदाहरण है। ऐसे में गावों और कृषि आधारित वर्ग से नई गाड़ियों की मांग में कमी आई है।
ऑटो इंडस्ट्री को बजट से हैं उम्मीदें
ऑटो इंडस्ट्री की निगाहें अब 5 जुलाई को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हैं। ऑटो इंडस्ट्री को उम्मीद है कि सरकार इस बजट में ऑटो सेक्टर के लिए कुछ अच्छे फैसले ले सकती है। साथ ही, कुछ फाइनेंशियल सपोर्ट देकर इंडस्ट्री को राहत दे सकती है।
नए मॉडल्स और फेस्टिव सीजन से बढ़ेगी रफ्तार?
उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाला फेस्टिव सीजन ऑटो सेक्टर की धीमी रफ्तार को तेज करने में मदद करेगा। कंपनियां नई गाड़ियां लॉन्च करने वाली हैं, जिससे कार कंपनियों की बिक्री पर भी अच्छा असर पड़ेगा। वहीं अब ये देखना वाकई दिलचस्प होगा कि अगले 1 से 2 महीने में ऑटो सेक्टर की तस्वीर कैसी होगी?