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Fastag Sticker: बेच रहे हैं अपनी कार? तो फास्टैग स्टिकर से जुड़ा ये काम करना न भूलें
Tue, 30 Jul 2024 09:01 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 30 Jul 2024 09:01 PM IST
सार
कई लोगों के मन में फास्टैग को लेकर सवाल होते हैं, खासकर यह कि जब वे अपनी कार बेचते हैं तो इसका क्या होता है। आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब।
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FASTag
- फोटो : iStock
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विस्तार
भारत में लोग अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य की यात्रा करते हैं, जिसके लिए एक्सप्रेसवे और हाईवे पर टोल टैक्स देना पड़ता है। टोल वसूली के लिए विभिन्न जगहों पर टोल प्लाजा बनाए गए हैं। पहले ड्राइवरों को इन टोल का भुगतान करने के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता था। लेकिन FASTag (फास्टैग) की शुरुआत से यह प्रक्रिया बहुत आसान हो गई है।
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फास्टैग एक स्टिकर है जिसे आपकी कार पर लगाया जाता है और जिससे आप बिना लाइन में लगे टोल प्लाजा पर भुगतान कर सकते हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में फास्टैग को लेकर सवाल होते हैं, खासकर यह कि जब वे अपनी कार बेचते हैं तो इसका क्या होता है।
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भारत में, प्रत्येक वाहन के लिए सिर्फ एक फास्टैग होना जरूरी है। इसलिए, यदि आप अपनी कार बेचते हैं, तो आपको अपने फास्टैग को डिएक्टिव (निष्क्रिय) करना होगा। यह कदम जरूरी है क्योंकि जब तक पिछला फास्टैग निष्क्रिय नहीं हो जाता। तब तक नया मालिक अपने नाम पर वाहन के लिए नया फास्टैग हासिल नहीं कर सकता है। इस निष्क्रियता के बिना, एक नया फास्टैग जारी नहीं किया जाएगा।
हाल ही में, नेशनल हाईवे यूजर्स को विंडस्क्रीन पर फास्टैग जानबूझकर नहीं लगाने से रोकने के लिए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने कड़े कदम उठाए हैं। जो यूजर वाहन के अंदर से सामने की विंडस्क्रीन पर बिना फास्टैग चिपकाए टोल लेन में एंट्री करते हैं, एनएचएआई ने उनसे दोगुना शुल्क वसूलने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
NHAI ने कहा कि विंडस्क्रीन पर फास्टैग को जानबूझकर नहीं लगाने से टोल प्लाजा पर अनावश्यक देरी होती है। जिससे अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग में आने-जाने वालों को असुविधा होती है। इतना ही नहीं, जिनके वाहन में फास्टैग नहीं लगा है, उनके शुल्क प्लाजा पर वाहन पंजीकरण संख्या (VRN) के साथ सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड किए जाएंगे। इससे वसूले गए शुल्क और टोल लेन में वाहन की मौजूदगी के संबंध में उचित रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद मिलेगी।
हालांकि, कुछ समय बाद फास्टैग बीते जमाने की बात हो जाएगी। केंद्र सरकार ने हाल ही में, संसद में सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन सिस्टम की मदद से टोल टैक्स वसूली के लिए किए गए एक पायलट अध्ययन के बारे में जानकारी रखी। राज्यसभा में एक लिखित जवाब में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस कॉन्सेप्ट को बंगलूरू-मैसूर खंड राष्ट्रीय राजमार्ग-275 और पानीपत-हिसार खंड राष्ट्रीय राजमार्ग-709 (पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग-71ए) पर पायलट आधार पर लागू किया गया था।
केंद्र सरकार ने मौजूदा FASTag (फास्टैग) सुविधा के अलावा नेशनल हाईवे के चुनिंदा सेक्शन पर ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) सिस्टम को शुरू में पायलट आधार पर लागू करने का फैसला किया है। GNSS, GPS (जीपीएस) और GLONASS (ग्लोनास) जैसी उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणालियों के लिए एकसाथ में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है।