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स्टेलेंटिस ने भारत में पूरा किया 100% मालिकाना हक: जानें नौकरियां दोगुनी करने का क्या है प्लान?
Mon, 21 Sep 2026 07:46 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Mon, 21 Sep 2026 07:46 PM IST
सार
स्टेलेंटिस के मुताबिक, यह सौदा भारत में स्टेलेंटिस की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। और देश की दीर्घकालिक विकास क्षमता को लेकर कंपनी के भरोसे को मजबूत करता है।
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MS Dhoni receiving 1st Basalt Dark Edition from Shailesh Hazela, CEO & MD, Stellantis India
- फोटो : Stellantis India
विस्तार
ग्लोबल ऑटोमोटिव दिग्गज स्टेलेंटिस इंडिया (Stellantis India) ने 'स्टेलेंटिस ऑटोमोबाइल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' (SAIPL) में हिंदुस्तान मोटर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (HMFCL) की बची हुई पूरी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया है।
इस सौदे के सफलतापूर्वक पूरा होने के साथ ही स्टेलेंटिस का SAIPL और तमिलनाडु के तिरुवल्लूर स्थित इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर 100 प्रतिशत पूरा मालिकाना हक हो गया है।
कंपनी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के जरिए किया गया यह अधिग्रहण स्टेलेंटिस की भारत यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह भारत के दीर्घकालिक विकास क्षमता में कंपनी के गहरे विश्वास को दर्शाता है।
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इस पूर्ण नियंत्रण से स्टेलेंटिस को ये फायदे मिलेंगे:
पूर्ण स्वामित्व हासिल करने के बाद स्टेलेंटिस ने भारत में अपने उत्पादन और रोजगार विस्तार को लेकर एक बड़ा रोडमैप पेश किया है:
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए स्टेलेंटिस इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक, शैलेश हाजेला ने कहा:
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इस सौदे के सफलतापूर्वक पूरा होने के साथ ही स्टेलेंटिस का SAIPL और तमिलनाडु के तिरुवल्लूर स्थित इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर 100 प्रतिशत पूरा मालिकाना हक हो गया है।
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इस अधिग्रहण से कंपनी की रणनीतिक स्थिति और संचालन पर क्या असर पड़ेगा?
कंपनी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के जरिए किया गया यह अधिग्रहण स्टेलेंटिस की भारत यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह भारत के दीर्घकालिक विकास क्षमता में कंपनी के गहरे विश्वास को दर्शाता है।
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इस पूर्ण नियंत्रण से स्टेलेंटिस को ये फायदे मिलेंगे:
- त्वरित निर्णय: परिचालन एकीकरण गहरा होगा और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
- बाजार में फुर्ती: भारतीय बाजार में, जो कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति का केंद्र है, ग्राहकों की बदलती जरूरतों के हिसाब से अधिक चपलता से काम किया जा सकेगा।
तिरुवल्लूर प्लांट के उत्पादन और रोजगार के लिए क्या नए लक्ष्य तय किए गए हैं?
पूर्ण स्वामित्व हासिल करने के बाद स्टेलेंटिस ने भारत में अपने उत्पादन और रोजगार विस्तार को लेकर एक बड़ा रोडमैप पेश किया है:
- 160% उत्पादन वृद्धि: कंपनी का लक्ष्य अपने वार्षिक उत्पादन में 160% से अधिक का इजाफा करना है। वर्ष 2026 के 16,000 यूनिट्स के स्तर को बढ़ाकर 2028 तक हर साल 43,000 यूनिट्स से अधिक करने की योजना है।
- दोगुनी नौकरियां: इस विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 2026 में 610 कर्मचारियों के प्रत्यक्ष कार्यबल को 2028 तक दोगुने से अधिक करने का अनुमान है। साथ ही सप्लायर और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होगा।
- वैश्विक निर्यात हब: तिरुवल्लूर प्लांट अपना ग्लोबल नेटवर्क मजबूत कर रहा है और वर्तमान में चार महाद्वीपों के 8 प्रमुख निर्यात बाजारों में वाहनों की आपूर्ति कर रहा है।
स्टेलेंटिस इंडिया के नेतृत्व ने इस मील के पत्थर पर क्या प्रतिक्रिया दी?
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए स्टेलेंटिस इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक, शैलेश हाजेला ने कहा:
"भारत स्टेलेंटिस की विकास रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। एक मजबूत विनिर्माण, इंजीनियरिंग और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए देश में लगभग 11,000 करोड़ रुपये का निवेश करने के बाद, हम आगे भी बड़े अवसरों को देखते हैं। यह मील का पत्थर हमें गहरा एकीकरण प्रदान करेगा और ग्राहकों व बाजार की जरूरतों का तेजी से जवाब देने की हमारी क्षमता को बढ़ाएगा।"