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Hindi News ›   Automobiles News ›   Faulty EV Scooter Breaks Down Twice in 2 Months: Kerala Consumer Court Orders Dealer to Pay Rs 1.6 Lakh

खरीदते ही दो बार खराब हुआ नया इलेक्ट्रिक स्कूटर: केरल कंज्यूमर कोर्ट ने डीलर को दिया मुआवजा और रिफंड का आदेश

Mon, 21 Sep 2026 10:23 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 21 Sep 2026 10:23 PM IST
सार

नई इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के महज सात दिन बाद खराब होने और करीब एक महीने की मरम्मत के बाद वापस मिलने के सिर्फ चार दिन में दोबारा खराब होने के मामले में केरल की उपभोक्ता अदालत ने खरीदार के पक्ष में फैसला सुनाया है। जानें क्या है पूरा मामला।

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Faulty EV Scooter Breaks Down Twice in 2 Months: Kerala Consumer Court Orders Dealer to Pay Rs 1.6 Lakh
Electric Scooter Refund - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (केरल) ने एक इलेक्ट्रिक वाहन डीलर की सेवा में गंभीर लापरवाही पाते हुए पीड़ित महिला को 1.62 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष एस. के. श्रीला और सदस्य स्टैनली हेरोल्ड की पीठ ने 3 सितंबर को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 
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अदालत ने कहा कि कोई भी ग्राहक जो अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से नया वाहन खरीदता है। उसे बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर काटने और बार-बार खराब होने वाली गाड़ी को झेलने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। 
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कोर्ट ने डीलर को ये भुगतान करने के निर्देश दिए हैं:
  • मूल रकम का पूरा रिफंड: वाहन की खरीद और मरम्मत पर खर्च हुए 1,32,203 रुपये (स्कूटर की वापसी पर)।
  • मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का मुआवजा: 25,000 रुपये का हर्जाना।
  • कानूनी कार्यवाही का खर्च: 5,000 रुपये 

 

नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के बाद पीड़ित महिला के साथ क्या-क्या हुआ?

शिकायतकर्ता सेलविना एस. ने सितंबर 2025 में अयथिल स्थिति एक ईवी शोरूम से अपने बेटे की पढ़ाई और आईटीआई क्लास जाने के लिए यह स्कूटर खरीदा था।
सेलविना एक बुजुर्ग विधवा महिला हैं, जिन्होंने अपनी जमा पूंजी, गहने गिरवी रखकर और उधार लेकर इस गाड़ी के पैसे जुटाए थे। लेकिन नया वाहन मिलने के बाद उनकी सहूलियत बढ़ने के बजाय मुसीबतें शुरू हो गईं:
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  • खरीदने के 7 दिन के भीतर पहली खराबी: डिलीवरी के महज हफ्ते भर के भीतर स्कूटर अचानक सड़क के बीचों-बीच बंद हो गया। महिला ने 2,500 रुपये मालवाहक ऑटो का किराया देकर गाड़ी शोरूम पहुंचाई।
  • एक महीने तक चला रिपेयर काम: डीलर ने लगभग एक महीने तक गाड़ी अपने पास रखी और रिपेयर के बाद वापस दी।
  • वापस मिलने के 4 दिन बाद फिर ठप: मरम्मत के बाद गाड़ी मिली, लेकिन महज 4 दिनों के भीतर स्कूटर दोबारा पूरी तरह बंद हो गया और फिर से डीलर को सौंपना पड़ा।
  • बेटे और महिला की परेशानी: गाड़ी न होने के कारण बेटे को सुबह 8 बजे क्लास पहुंचने के लिए 3 से 4 बसें बदलनी पड़ती थीं। वहीं डीलर द्वारा फोन न उठाने पर महिला को बार-बार शोरूम जाने के लिए हर चक्कर में 300-400 रुपये खर्च करने पड़े।

 

आफ्टर-सेल्स सर्विस को लेकर कंज्यूमर कमीशन ने क्या सख्त टिप्पणी की?

उपभोक्ता आयोग ने ऑटो कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर कड़ा संदेश देते हुए कहा:
"आफ्टर-सेल्स सर्विस (बिक्री के बाद की सेवा) कोई एहसान या दान नहीं है जो निर्माता या डीलर द्वारा ग्राहक पर किया जाता है। यह उपभोक्ता लेनदेन का एक अनिवार्य हिस्सा है। बार-बार एक ही खराबी के लिए अस्थायी मरम्मत कर देना और स्थायी समाधान न देना इस कानूनी दायित्व का सीधा उल्लंघन है।"
अदालत ने माना कि जो ग्राहक एक चालू और सुरक्षित वाहन की उम्मीद में पूरा पैसा चुकाता है, उसे खराब और अविश्वसनीय गाड़ी के साथ रहने पर मजबूर करना अनुचित व्यापार व्यवहार है।

 

कोर्ट की कार्यवाही के दौरान डीलर का क्या रवैया रहा?

अदालत में सुनवाई के दौरान डीलर (विपक्षी पक्ष) पेश तो हुआ, लेकिन उसने अपना कोई लिखित जवाब या सबूत दाखिल नहीं किया।
शिकायतकर्ता महिला ने खुद अपनी पैरवी की, हलफनामा दिया और गवाही दी। डीलर ने न तो उनसे कोई पूछताछ की और न ही यह साबित करने के लिए कोई सबूत पेश किया कि स्कूटर में कोई खराबी नहीं थी या खराबी ग्राहक की गलती से हुई थी। सबूतों को अनपढ़ या चुनौती-रहित पाते हुए अदालत ने एकतरफा उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

 

इस फैसले से आम वाहन खरीदारों और उपभोक्ताओं को क्या सीख मिलती है?

यह फैसला साबित करता है कि खराब उत्पाद या घटिया सर्विस मिलने पर सिर्फ मौखिक शिकायत काफी नहीं होती। कानूनी राहत पाने के लिए आपके पास पुख्ता दस्तावेज होना अनिवार्य है:
  1. सबूत संभाल कर रखें: सर्विस रिकॉर्ड, जॉब कार्ड, बिल, पेमेंट रसीदें, तस्वीरें और डीलर के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रखें।
  2. समीक्षा और गवाही: अगर आवश्यक हो तो कंज्यूमर कोर्ट में स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष मजबूती से रखें।
इसी तरह की शिकायत या धोखाधड़ी का सामना कर रहे उपभोक्ता अपने राज्य की हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन- 1915 पर संपर्क करके सहायता ले सकते हैं।
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