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Vehicle Transfer: लाल किले विस्फोट में पुरानी कार का बड़ा खुलासा, सेकेंड हैंड वाहन खरीदते समय न करें ये गलती

Fri, 14 Nov 2025 04:48 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Fri, 14 Nov 2025 04:48 PM IST
सार

Vehicle Transfer: दिल्ली के लाल किले के पास हुए घातक धमाके में इस्तेमाल कार अब भी अपने पहले मालिक के नाम पर दर्ज मिली।नए नियमों के बावजूद वाहन मालिक का वास्तविक पता लगाना आज भी बड़ी चुनौती है।
 

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Security lapses revealed  Red Fort blast avoid this mistake when buying  second hand car
इसी आई-20 कार में किया गया ब्लास्ट। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट/ वीडियो ग्रैब

विस्तार

दिल्ली के लाल किले के पास हुए हालिया बॉम्ब धमाके ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की खामियों की ओर इशारा किया है, बल्कि पुरानी कारों के स्वामित्व हस्तांतरण सिस्टम की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया है। जांच में सामने आया कि ह्यूंदै आई 20 कार के पिछले 11 साल में चार बार मालिक बदले जाने के बावजूद आज भी वह अपने मूल मालिक के नाम पर ही पंजीकृत है। 

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पुरानी कारों के कई डीलरों ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से स्वामित्व हस्तांतरण को आसान बनाने के लिए बनाया गया ऑनलाइन पोर्टल अभी तक पूरी तरह प्रभावी नहीं है। उनका कहना है कि पोर्टल में तकनीकी खामियां हैं, जिसकी वजह से स्वामित्व हस्तांतरण लंबित रह जाता है और वास्तविक मालिक तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसके बाद दुर्घटना या अपराध की स्थिति में जांच प्रक्रिया जटिल हो जाती है। 
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एक उत्तर भारत के बड़े डीलर ने बताया कि पहले आरटीओ खरीदार और विक्रेता की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य करते थे। इससे दूसरे राज्यों में वाहन बेचने में दिक्कतें आती थी। कई बार विक्रेता पैसे ले लेता था, लेकिन आरटीओ जाकर प्रक्रिया पूरी नहीं करता था। इससे कार उसी के नाम पर पंजीकृत रह जाती थी। 

लाल किला विस्फोट के बाद उठा बड़ा सवाल

सोमवार यानी दस नवंबर 2025 की शाम हुए धमाके में करीब 13 लोगों की मौत हुई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच अधिकारियों को यह कार 11 साल बाद भी उसी मालिक के नाम पर दर्ज मिली, जिसने इसे सबसे पहले खरीदा था। इससे साफ है कि सेकेंड-हैंड कार मार्केट मे कागजी कार्रवाई अधूरी रहती है। असंगठित डीलरशिप्स (स्वामित्व)  में प्रक्रिया का पालन नहीं होता और स्वामित्व परिवर्तन अभी भी एक पेचीदा और भ्रष्टाचार-प्रवण प्रक्रिया है। 

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राज्यों का नियंत्रण, केंद्र की सीमित भूमिका

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आरटीओ राज्य सरकारों के अधीन होते हैं। उन्होंने बताया कि सभी राज्यों के आरटीओ को एक साझा मंच पर लाने की तैयारी चल रही है। वाहन मालिकों के सही मोबाइल नंबर लिंक करने के लिए अभियान जारी है। भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) व अन्य सेवाएं केवल उन्हीं को मिलेगी, जो नंबर वाहन डेटा से मेल खाता होगा। इसके जरिए वाहन स्वामित्व पहचान प्रणाली की सटीकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। 


बेअसर क्यों साबित हो रहा मोटर वाहन अधिनियम 2022? 

2022 में केंद्र ने पुरानी कार प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कई नए नियम लागू किए थे। इनमें पुरानी कार डीलरों को प्राधिकरण प्रमाणपत्र अनिवार्य, डीलरों को आरसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (नोओसी) और स्वामित्व परिवर्तन के लिए आवेदन करने का अधिकार, खरीदार-विक्रेता की ओर से वाहन डिलीवरी की ऑनलाइन सूचना देने की व्यवस्था शामिल थी। इतने नियमों के बाद भी डीलरों का दावा है कि ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल अभी भी निष्क्रिय है। जिसके कारण पुरानी प्रक्रियाओं पर ही निर्भरता बनी हुई है। 

कई ऑटो डीलर खासकर असंगठित क्षेत्र में फॉर्म 29-30 जमा नहीं करते, फोटो, आरसी और दस्तावेज पूरा नहीं करते और वाहन बेचने के बाद कागजी प्रक्रिया अधूरी छोड़ देते हैं। नतीजतन बेहद गंभीर मामलों जैसे लाल किले विस्फोट में भी कार का वास्तविक मालिक पहचानने में घंटों या दिनों का समय लग गया।

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