{"_id":"6a7ab1c41840ca76f00f6009","slug":"road-accidents-claim-more-lives-than-war-or-disease-nitin-gadkari-urges-action-on-india-s-road-safety-crisis-2026-08-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Road Safety:नितिन गडकरी की चेतावनी- युद्ध या बीमारी से ज्यादा जान ले रही सड़क दुर्घटनाएं, हर साल 1.8 लाख मौतें","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Road Safety:नितिन गडकरी की चेतावनी- युद्ध या बीमारी से ज्यादा जान ले रही सड़क दुर्घटनाएं, हर साल 1.8 लाख मौतें
Tue, 11 Aug 2026 10:53 AM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Tue, 11 Aug 2026 10:53 AM IST
सार
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। सोमवार को राजधानी में आयोजित एक सड़क सुरक्षा कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत की सड़कों पर हर साल जितनी जानें जा रही हैं, उतनी मौतें युद्ध या किसी बीमारी से भी नहीं होतीं।
विज्ञापन
Road Accidents
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में सड़क सुरक्षा के गंभीर संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सड़कें हर साल युद्ध या किसी महामारी से भी अधिक लोगों की जान ले रही हैं।
सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस द्वारा आयोजित एक सीएसआर (CSR) कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने बताया कि भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 1.8 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। सबसे दुखद बात यह है कि इन मौतों में 66 प्रतिशत युवा शामिल हैं, जो देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।
विज्ञापन
सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस द्वारा आयोजित एक सीएसआर (CSR) कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने बताया कि भारत में हर साल लगभग 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 1.8 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। सबसे दुखद बात यह है कि इन मौतों में 66 प्रतिशत युवा शामिल हैं, जो देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।
विज्ञापन
देश में हर घंटे कितने लोग गंवा रहे हैं जान और बिना हेलमेट के कितनी मौतें हो रही हैं?
सड़क हादसों के भयावह आंकड़ों को उजागर करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण बड़े पैमाने पर जानें जा रही हैं:- प्रति घंटे मौतों का आंकड़ा: भारत की सड़कों पर हर घंटे 20 लोगों की मौत हो रही है। मौत का ऐसा आंकड़ा किसी युद्ध या महामारी में भी देखने को नहीं मिलता।
- बिना हेलमेट के मौतें: पिछले साल केवल हेलमेट न पहनने के कारण 54,132 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
- दोपहिया चालकों का हिस्सा: कुल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी दोपहिया वाहन चालकों की है।
विज्ञापन
Nitin Gadkari
- फोटो : X/@nitin_gadkari
हादसों को रोकने और 'ब्लैक स्पॉट्स' को खत्म करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
नितिन गडकरी ने खराब तरीके से डिजाइन की गई सड़क दुर्घटना-संभावित जगहों या 'ब्लैक स्पॉट्स' को इन मौतों का एक मुख्य कारण बताया:-
₹40,000 करोड़ का बजट: सरकार देश भर में ऐसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करने के लिए 40,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
-
100 सबसे प्रभावित जिले: मंत्रालय ने देश भर के ऐसे 100 जिलों की पहचान की है जहां सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। इन क्षेत्रों में हादसों को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
-
सड़क नेटवर्क बनाम सुरक्षा: भारत अब जापान को पीछे छोड़कर अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क बन गया है। हालांकि, दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क बनने के बावजूद भारत में सबसे ज्यादा सड़क हादसे दर्ज होते हैं। इसके उलट उन्होंने स्वीडन का उदाहरण दिया, जिसने सख्त नियमों और अनुशासित प्रणाली से शून्य सड़क मौतों (Zero Road Fatalities) का लक्ष्य हासिल किया है।
सड़क हादसों के पीछे का मुख्य कारण क्या है और इससे अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हो रहा है?
सड़क सुरक्षा विफलताओं के मूल कारण पर स्पष्ट बोलते हुए गडकरी ने कहा कि इंसानी व्यवहार ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बना हुआ है। जब तक लोग सड़क पर अपना व्यवहार नहीं बदलेंगे, तब तक केवल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रवर्तन से समस्या हल नहीं हो सकती।- शिक्षा प्रणाली में बदलाव: बुनियादी स्तर पर आदतों में सुधार के लिए मंत्रालय ने 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को सड़क सुरक्षा शिक्षा देना शुरू किया है ताकि शुरुआत से ही सुरक्षित ड्राइविंग आदतें विकसित की जा सकें।
- जीडीपी को नुकसान: उन्होंने बताया किया कि इन भयानक सड़क हादसों के कारण देश को हर साल अपनी जीडीपी का लगभग 3 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ता है।