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Automobile Industry: नई कार श्रेणी के प्रस्ताव पर ऑटो उद्योग में मतभेद, सरकार तक पहुंचा विवाद
Wed, 10 Dec 2025 09:31 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 10 Dec 2025 09:31 PM IST
सार
सरकार के CAFE 3 फ्यूल एफिशिएंसी और एमिशन फ्रेमवर्क को तय करने से कुछ महीने पहले ही, भारत की कार इंडस्ट्री में लाइट-वेट मिनी-कार कैटेगरी के प्रस्ताव को लेकर गहरी फूट पड़ गई है।
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- फोटो : AI
विस्तार
भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में एक प्रस्तावित हल्के वजन की मिनी-कार श्रेणी को लेकर गहरा मतभेद उभर आया है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब सरकार कुछ ही महीनों में CAFE 3 (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) से जुड़े ईंधन दक्षता और उत्सर्जन मानकों को अंतिम रूप देने जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मुद्दे पर उद्योग के बड़े हिस्से ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।
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909 किलोग्राम तक की कारों के लिए नया वर्ग प्रस्तावित
विवाद की जड़ में कथित रूप से मारुति सुजुकी और टोयोटा किर्लोस्कर की अगुवाई में, रेनो के समर्थन से, 909 किलोग्राम तक वजन वाली कारों के लिए एक नए सेगमेंट की मांग है। इस श्रेणी में आने वाले अधिकांश वाहन फिलहाल मारुति के पोर्टफोलियो से जुड़े बताए जा रहे हैं।
यह विवाद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के दफ्तर तक पहुंच गया है। जहां, अन्य वाहन निर्माताओं का कहना है कि इस तरह की श्रेणी से नियामकीय असंतुलन पैदा होगा और सड़क सुरक्षा से जुड़े मानकों से समझौता हो सकता है।
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विवाद की जड़ में कथित रूप से मारुति सुजुकी और टोयोटा किर्लोस्कर की अगुवाई में, रेनो के समर्थन से, 909 किलोग्राम तक वजन वाली कारों के लिए एक नए सेगमेंट की मांग है। इस श्रेणी में आने वाले अधिकांश वाहन फिलहाल मारुति के पोर्टफोलियो से जुड़े बताए जा रहे हैं।
यह विवाद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के दफ्तर तक पहुंच गया है। जहां, अन्य वाहन निर्माताओं का कहना है कि इस तरह की श्रेणी से नियामकीय असंतुलन पैदा होगा और सड़क सुरक्षा से जुड़े मानकों से समझौता हो सकता है।
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बड़े ऑटो निर्माताओं ने जताई आपत्ति
टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ह्यूंदै, किआ और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर जैसी कंपनियों ने नितिन गडकरी के साथ हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया। उनका तर्क है कि इस नई श्रेणी के तहत कुछ चुनिंदा वाहनों को उत्सर्जन मानकों में राहत मिलेगी। जबकि बाकी उद्योग को अप्रैल 2027 से लागू होने वाले सख्त नियमों का सामना करना पड़ेगा। इससे प्रतिस्पर्धा का संतुलन बिगड़ सकता है।
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टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ह्यूंदै, किआ और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर जैसी कंपनियों ने नितिन गडकरी के साथ हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया। उनका तर्क है कि इस नई श्रेणी के तहत कुछ चुनिंदा वाहनों को उत्सर्जन मानकों में राहत मिलेगी। जबकि बाकी उद्योग को अप्रैल 2027 से लागू होने वाले सख्त नियमों का सामना करना पड़ेगा। इससे प्रतिस्पर्धा का संतुलन बिगड़ सकता है।
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सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी चिंता जताई कि वजन आधारित नई श्रेणी से ऐसे वाहनों को बढ़ावा मिल सकता है, जो वैश्विक सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते। बैठक में यह मुद्दा उठाया गया कि 909 किलोग्राम के दायरे में आने वाली कारों को अंतरराष्ट्रीय क्रैश टेस्ट और सुरक्षा एजेंसियों से ठोस रेटिंग नहीं मिली है।
कंपनियों ने चेतावनी दी कि यदि इस वर्ग के लिए हल्के उत्सर्जन नियम लागू किए गए, तो इससे अनजाने में "संरचनात्मक रूप से असुरक्षित" वाहनों का एक पूरा सेगमेंट विकसित हो सकता है।
यह भी पढ़ें - Auto Sales: दिवाली के बाद भी भारतीय वाहन बाजार की बनी हुई है रफ्तार, जानें क्या है वजह
उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी चिंता जताई कि वजन आधारित नई श्रेणी से ऐसे वाहनों को बढ़ावा मिल सकता है, जो वैश्विक सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते। बैठक में यह मुद्दा उठाया गया कि 909 किलोग्राम के दायरे में आने वाली कारों को अंतरराष्ट्रीय क्रैश टेस्ट और सुरक्षा एजेंसियों से ठोस रेटिंग नहीं मिली है।
कंपनियों ने चेतावनी दी कि यदि इस वर्ग के लिए हल्के उत्सर्जन नियम लागू किए गए, तो इससे अनजाने में "संरचनात्मक रूप से असुरक्षित" वाहनों का एक पूरा सेगमेंट विकसित हो सकता है।
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- फोटो : Freepik
मौजूदा 'स्मॉल कार' ढांचे का हवाला
उद्योग की संयुक्त प्रस्तुति में कहा गया कि भारत में पहले से ही 'स्मॉल कार' की एक स्पष्ट परिभाषा मौजूद है, जो वाहन की लंबाई और इंजन क्षमता पर आधारित है। चार मीटर से कम लंबाई और पेट्रोल के लिए 1,200cc और डीजल के लिए 1,500cc से कम इंजन क्षमता वाले वाहन कर और नियामकीय लाभों के पात्र होते हैं।
ऑटो कंपनियों ने इसी ढांचे के अनुरूप अपनी दीर्घकालीन निवेश रणनीतियां और उत्पाद योजनाएं बनाई हैं। ऐसे में, केवल वजन के आधार पर अचानक एक नई श्रेणी लाना वर्षों से चली आ रही योजना और प्रोडक्ट पाइपलाइन को बाधित कर सकता है।
यह भी पढ़ें - Ford-Renault: फोर्ड और रेनो की बड़ी साझेदारी, यूरोप के लिए बनाएंगे दो नई इलेक्ट्रिक कारें और कमर्शियल वाहन
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वैश्विक स्तर पर नहीं है ऐसा कोई उदाहरण
ऑटो उद्योग का यह भी कहना है कि दुनिया के किसी बड़े बाजार में केवल वजन के आधार पर कारों का वर्गीकरण नहीं किया जाता। 909 किलोग्राम की नई श्रेणी बनाना एक मनमाना और बिना किसी वैश्विक मिसाल वाला नियामकीय बदलाव होगा। जिससे कंपनियों को अपनी मौजूदा और भविष्य की परियोजनाओं पर फिर से विचार करना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मारुति सुजुकी ने इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है।
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