{"_id":"69205aaab168a595200866aa","slug":"promises-fossil-fuel-transition-removed-from-cop30-draft-clash-again-climate-deal-2025-11-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Global Climate Agreement: COP30 के मसौदे से हटाए गए फॉसिल फ्यूल ट्रांजिशन के वादे, क्लाइमेट डील पर फिर टकराव","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Global Climate Agreement: COP30 के मसौदे से हटाए गए फॉसिल फ्यूल ट्रांजिशन के वादे, क्लाइमेट डील पर फिर टकराव
Sat, 22 Nov 2025 01:21 PM IST
जागृति
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:21 PM IST
सार
Global Climate Agreement: COP30 शिखर सम्मेलन के लिए जारी नए मसौदे में जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने की योजना वाले प्रस्ताव को हटा दिया गया है। मसौदा अभी भी बातचीत के अधीन है और अंतिम मंजूरी सर्वसम्मति से देनी होगी।
विज्ञापन
ब्राजीली राष्ट्रपति
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ब्राजील की मेजबानी में हो रहे COP30 जलवायु शिखर सम्मेलन में शुक्रवार सुबह जारी मसौदे ने जलवायु नीति चर्चा में हलचल मचा दी । नए ड्राफ्ट में जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने की वैश्विक योजना वाले प्रस्ताव को हटा दिया गया है। यह बदलाव उस समय सामने आया है जब दुनिया के लगभग 200 देश जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए निर्णायक कदमों पर सहमत होने की कोशिश कर रहे हैं।
विज्ञापन
नए मसौदे से फॉसिल शब्द गायब
सम्मेलन का सबसे बड़ा विवाद यही है कि विश्व कितनी जल्दी कोयला, तेल व गैस जैसे फॉसिल फ्यूल्स से छुटकारा पाएगा। पहले ड्राफ्ट कई विकल्प मौजूद थे, जिनमें जीवाश्म ईंधन खत्म करने की स्पष्ट भाषा शामिल थी। लेकिन नए मसौदे में फॉसिल फ्यूल शब्द पूरी तरह गायब है। जानकारों के मुताबिक, बड़े तेल और गैस उत्पादक देश, अंतरराष्ट्रीय व्यापार लॉबी व कुछ विकासशील अर्थव्यवस्थाएं इस भाषा का विराेध कर रही थीं।
विज्ञापन
ये भी पढ़े: Top 5 Sub-Compact SUV: ये हैं अक्तूबर 2025 में सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप 5 सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी, जानें कितनी रही बिक्री
विज्ञापन
वादों की नहीं, तारीखों की भी जरूरत
जर्मनी, केन्या और छोटे द्वीप देशों (Small Island Nations) ने COP28 में किए गए वादों के तहत एक स्पष्ट ट्रांजिशन रोडमैप की मांग की थी। ये देश मानते हैं कि समय बीत रहा है और केवल वादों की नहीं, बल्कि तारीखों व समय सीमाओं की जरूरत भी है।
ये भी पढ़े: Middleweight Bikes: 2025 में भारत में सबसे किफायती मिडिलवेट बाइक, ये हैं जाने-माने ब्रांड्स के टॉप-5 मॉडल
मसौदे में 2030 तक क्लाइमेट एडाप्टेशन फंडिंग को तीन गुना बढ़ाने का प्रस्ताव है। हालांकि इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि पैसा कौन देगा। अमीर देश, वर्ल्ड बैंक या निजी निवेशक। यह अस्पष्टता गरीब देशों के लिए चिंता का कारण है, जो ठोस वित्तीय गारंटी चाहते हैं।
ट्रेड और क्लाइमेट पर नया संवाद
मसौदा आने वाले तीन COP में एक ग्लोबल ट्रेड-डायलॉग शुरू करने की भी बात करता है। यह कदम चीन के पक्ष में माना जा रहा है, लेकिन ईयू के लिए चुनौती पैदा कर सकता है, क्याेंकि चर्चा का केंद्र उसका कार्बन बॉर्डर टैक्स बनने की संभावना है।दक्षिण अफ्रीका और भारत ने पहले ही इस टैक्स को अनुचित बताया है और इसे हटाने की मांग की है। सम्मेलन शुक्रवार को समाप्त होने वाला है, लेकिन परंपरा के अनुसार चर्चा सप्ताहांत तक बढ़ सकती है। ड्राफ्ट में बदलाव संभव हैं, फिलहाल मसौदा वैश्विक जलवायु राजनीति की तीखी खाई को उजागर करता है।