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SC: दिल्ली की सड़कों पर 60 लाख से ज्यादा वाहन पुराने, सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘सरकारी विभागों में चलाएं EV’

Thu, 10 Apr 2025 05:43 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Thu, 10 Apr 2025 05:43 PM IST
सार

SC On Old Vehicles In Delhi: दिल्ली में 60 लाख से अधिक ऐसे वाहन चल रहे हैं जो तय उम्र सीमा को पार कर चुके हैं। वहीं एनसीआर क्षेत्र में ऐसे वाहनों की संख्या 25 लाख के करीब है।

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Over 60 lakh vehicles in delhi are old Supreme court instructs to ply electric vehicles in government offices
दिल्ली में 60 लाख पुराने वाहन - फोटो : AI

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया कि केंद्र सरकार 30 अप्रैल तक यह प्रस्ताव दे कि किस तरह से सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाया जाएगा।
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जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि अप्रैल के अंत तक यह प्रस्ताव कोर्ट के सामने रखा जाए।
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Over 60 lakh vehicles in delhi are old Supreme court instructs to ply electric vehicles in government offices
एनसीआर में भी 25 लाख वाहन पुराने - फोटो : AI
दिल्ली में 60 लाख से ज्यादा पुराने वाहन
सुनवाई के दौरान ASG ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को जानकारी दी कि दिल्ली में 60 लाख से अधिक ऐसे वाहन चल रहे हैं जो तय उम्र सीमा को पार कर चुके हैं। वहीं एनसीआर क्षेत्र में ऐसे वाहनों की संख्या 25 लाख के करीब है।

कोर्ट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, "ASG ने दिल्ली और एनसीआर में बड़ी संख्या में पुराने वाहनों की उपस्थिति की बात उठाई है। हम इस पर दिशा-निर्देश तब जारी करेंगे जब हम वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेंगे।"

Over 60 lakh vehicles in delhi are old Supreme court instructs to ply electric vehicles in government offices
रिमोट सेंसिंग स्टडी से निकलेगा हल - फोटो : AI
3 महीने में पूरी हो रिमोट सेंसिंग स्टडी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि रिमोट सेंसिंग तकनीक के उपयोग पर अध्ययन 3 महीने के भीतर पूरा किया जाए। यह तकनीक सड़क पर चलते वाहनों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

हालांकि सरकार ने इस अध्ययन को पूरा करने के लिए 10 से 12 महीने का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इतनी देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
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FASTag बना रुकावट - फोटो : AI
FASTag बना रुकावट
ASG भाटी ने बताया कि पहले टोल प्लाजा पर वाहनों की निगरानी की जाती थी, लेकिन अब FASTag की वजह से वाहन बिना रुके निकल जाते हैं, जिससे डेटा एकत्र करना मुश्किल हो गया है। गौरतलब है कि पहली बार रिमोट सेंसिंग तकनीक को इस्तेमाल में लाने का प्रस्ताव 2019 में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण द्वारा दिया गया था, जो सुप्रीम कोर्ट को पर्यावरणीय मामलों में सलाह देता है।

यह मामला मशहूर जनहित याचिका एम.सी. मेहता बनाम भारत सरकार का हिस्सा है, जिस पर कोर्ट 1984 से सुनवाई कर रहा है।
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