चिंता: 'भारत के डाटा का गलत इस्तेमाल कर रहीं वैश्विक कंपनियां', ओला के CEO बोले- डेटा निर्यात से बचने की जरूरत
ओला के सीईओ भाविश अग्रवाल ने कहा, केवल दसवां हिस्सा (डाटा) भारत में संग्रहीत किया जाता है। उसका 90 फीसदी वैश्विक डाटा केंद्रों को निर्यात किया जाता है, जिन पर बड़े पैमाने पर बड़ी टेक कंपनियों का नियंत्रण हैं। इसे कृत्रिम मेधा (एआई) के जरिये फिल्टर करके दोबारा भारत में अरबों डॉलर में बेचा जाता है।
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ओला के संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल ने कहा कि भारत के डाटा का वैश्विक दिग्गज कंपनियां गलत इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत के डाटा को वैश्विक कंपनियों को निर्यात किया जाता है। फिर वहां पर इसे फिल्टर करके दोबारा भारत को वापस बेच दिया जाता है। उन्होंने इसे 'टेक्नो-उपनिवेशवाद' की संज्ञा दी है।
एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, केवल दसवां हिस्सा (डाटा) भारत में संग्रहीत किया जाता है। उसका 90 फीसदी वैश्विक डाटा केंद्रों को निर्यात किया जाता है, जिन पर बड़े पैमाने पर बड़ी टेक कंपनियों का नियंत्रण हैं। इसे कृत्रिम मेधा (एआई) के जरिये फिल्टर करके दोबारा भारत में अरबों डॉलर में बेचा जाता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा 200 साल पहले ईस्ट इंडिया कंपनी करती थी। उन्होंने आगे कहा, वे कपास निर्यात करते थे और विदेश से कपड़े लाते थे।
डाटा निर्माताओं के पास होना चाहिए स्वामित्व
इतना ही नहीं भाविश ने साफ तौर पर कहा कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दौर चल रहा है और इसकी दुनिया में डाटा ही मुख्य है और इसका स्वामित्व डाटा निर्माताओं के पास ही होना चाहिए। भारत दुनिया के डिजिटल डेटा का 20 प्रतिशत उत्पादन करता है।
- बता दें कि पिछले दिनों भाविश अग्रवाल ने टेस्ला के भारत न आने पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि अगर टेस्ला भारत में नहीं आ रही है तो इसमें उसका ही नुकसान है। भारत को इससे कोई नुकसान नहीं होने वाला है। इन्होंने लिखा कि भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और लिथियम ईकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले सालों में जब टेस्ला भारत को देखेगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
हम डेटा का निर्यात कर रहे, इससे बचने की जरूरत
भाविश ने कहा कि अब हम डेटा निर्यात कर रहे हैं और विदेश से खुफिया जानकारी ला रहे हैं। यह टेक्नो-उपनिवेशवाद है। मुझे नहीं पता कि यह शब्द सही है या नहीं, लेकिन ऐसा हो रहा है। भारत को इससे बचने की जरूरत है। अग्रवाल ने कहा, हमें भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना होगा। ये लड़ाई कानूनी लड़ाई नहीं है। ये तकनीक की लड़ाई है। हमें अपनी खुद की मूल्य प्रणालियों पर आधारित अपनी खुद की तकनीकों का निर्माण करना होगा। उदाहरण के लिए यूपीआई एक अच्छा उदाहरण है।