NVIDIA: अब खुद सोचेंगी और फैसला लेंगी कारें, एनवीडिया लाया इंसानी दिमाग जैसा अल्पानायो एआई, जानें क्या है?
Autonomous Driving: अक्सर माना जाता है कि भारत जैसे भीड़भाड़ वाले और अनिश्चित ट्रैफिक वाले देशों में बिना ड्राइवर वाली कारें यानी की सेल्फ ड्राइविंग कारें सफल नहीं हो सकती। इसे देखते हुए एनवीडिया का नया अल्पामायो सूट इस सोच को बदलने के लिए बनाया गया है। जानिए इसके बारे में विस्तार से...
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विस्तार
दुनिया की सबसे मूल्यवान चिप कंपनी एनवीडिया ने लोस वेगास के सीईएस 2026 इवेंट में अल्पामायो नाम का एक ओपन-सोर्स एआई टूल लॉन्च किया है। ये तकनीक कारों को केवल चलाना ही नहीं, बल्कि इंसानों की तरह सोचना और तर्क करना सिखाएगी। जेंसन हुआंग ने इसे रोबोटिक्स और कारों के लिए चैटजीपीटी जैसा ऐतिहासिक पल बताया है। इसके बाद कारें केवल चलेंगी नहीं, बल्कि फैसले भी ले सकती है।
ये पहला ऐसा सिस्टम है जो चेन ऑफ थॉट तकनीक पर काम करता है। उदाहरण से समझे तो जैसे मान लीजिए अगर कार के सामने अचानक कोई गाय या पैदल यात्री आ जाए, तो कार केवल ब्रेक नहीं लगाएगी, बल्कि स्थित का विश्लेषण कर सबसे सुरक्षित रास्ता चुनेगी और ये समझाएगी भी कि उसने ऐसा क्यों किया।
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डेवलपर्स के लिए ये कैसे फायदेमंद?
एनवीडिया के सीईओ जेंसन हुआंग ने इसे फिजिकल एआई का उदय बताया है। इनके अनुसार अल्पामायो के जरिए मशीनें अब दुनिया के कठिन रास्तों को समझने और वहां सुरक्षित ड्राइव करने में सक्षम होगी। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा है कि ये ओपन सोर्स है। यानी दुनिया भर के डेवलपर्स इसे स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइज कर सकेंगे। यानी कि भारत जैसे देश भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
हालांकि भारत में ऑटोनॉमस कारें अभी शुरुआती दौर में हैं, लेकिन अल्पामायो जैसी टेक्नोलॉजी का असर आने वाले वर्षों में साफ दिखेगा। ग्लोबल ऑटो कंपनियां, भारतीय ईवी स्टार्टअप्स और एआई रिसर्च इससे प्रभावित होंगी। भविष्य में ये सिस्टम ADAS फीचर्स, स्मार्ट ड्राइविंग असिस्टेंस और रोबोटैक्सी सेवाओं को भारत तक लाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
जानें आंकड़ें?
अल्पामायो के साथ एनवीडिया ने एक ओपन ड्राइविंग आंकड़ा भी जारी किया है, जिसमें 1,700 घंटे से ज्यादा की रियल-वर्ल्ड ड्राइविंग फुटेज शामिल है। ये डेटा अलग-अलग देशों, शहरों, हाइवे और ट्रैफिक कंडीशंस से लिया गया है। इसमें बारिश, धुंध, रात में ड्राइविंग और ऐसे दुर्लभ परिदृश्य भी शामिल हैं, जो आमतौर पर कम देखने को मिलते हैं लेकिन एक्सीडेंट का खतरा ज्यादा होता है। इस डेटासेट का उद्देश्य एआई को सिर्फ सामान्य हालात नहीं, बल्कि मुश्किल और खतरनाक परिस्थितियों में भी सही फैसले लेने के लिए तैयार करना है।
एनवीडिया ने एल्पासिम नाम का एक ओपन-सोर्स सिमुलेशन टूल भी लॉन्च किया है। ये गिटहब पर फ्री में उपलब्ध है। ये टूल डेवलपर्स को वर्चुअल माहौल में पूरे शहर, ट्रैफिक, सेंसर्स और एक्सीडेंट जैसे हालात बनाने की सुविधा देता है। इसका फायदा यह है कि कंपनियां बिना किसी इंसानी जोखिम के हजारों ड्राइविंग सिचुएशन्स को टेस्ट कर सकती हैं। इससे असली सड़कों पर उतरने से पहले एआई सिस्टम की कमजोरियों को पहचाना और सुधारा जा सकता है।
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विशेषज्ञों की चिंताए क्या हैं?
जहां एक ओर अल्पामायो को बड़ा टेक्नोलॉजी ब्रेकथ्रू माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञों ने चिंता भी जताई है। उनका मानना है कि बड़े और खुले एआई सिस्टम्स से अनप्रेडिक्टेबल बिहेवियर, कंट्रोल की कमी और सेफ्टी रिस्क बढ़ सकते हैं। खासकर तब, जब एआई की रफ्तार के मुकाबले रेगुलेशन्स और ट्रस्ट फ्रेमवर्क्स उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ रहे हों।
कौन-कौन सी कंपनियां करेंगी इस्तेमाल?
एनवीडिया का कहना है कि अल्पामायो इकोसिस्टम का इस्तेमाल लूसिड, जैगुआर लैंड रोवर, उबर, बर्कले डीपड्राइव समेत कई ग्लोबल रिसर्च संस्थान कर सकते हैं। इन सभी का एक ही उद्देश्य है। लेवल 4 ऑटोनोमस व्हीकल को तेजी से सड़कों पर उतारना, जहां गाड़ी ज्यादातर हालात में बिना इंसानी दखल के चल सकें।