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NITI Aayog EV: नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए नियामक ढांचे का रखा प्रस्ताव रखा, जानें पूरी रिपोर्ट
Wed, 29 Jun 2022 01:06 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 29 Jun 2022 01:06 PM IST
सार
NITI Aayog (नीति आयोग) ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए एक रेगुलेटरी प्रेमवर्क (नियामक ढांचे) का प्रस्ताव दिया है। साथ ही आयोग ने ईवी की बिक्री बढ़ने का अनुमान जताया है।
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Electric Vehicles
- फोटो : Pixabay
विस्तार
NITI Aayog (नीति आयोग) ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए एक रेगुलेटरी प्रेमवर्क (नियामक ढांचे) का प्रस्ताव दिया है। आयोग का अनुमान है कि अगर डिमांड इंसेंटिव 2024 से आगे जारी रहता है और टेक्नोलॉजी में महत्वपूर्ण सुधार के साथ बैटरी की लागत कम हो जाती है और इसकी पावर बढ़ जाती है, तो भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री 2021 में 0.23 मिलियन के मुकाबले 2031 तक 22.01 मिलियन तक पहुंच सकती है।
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Electric Vehicles
- फोटो : Pixabay
"भविष्य में एक निश्चित समय पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी या अन्य स्वच्छ परिवहन विकल्पों के लिए एक विनियमन को लागू करने के लिए एक उपयुक्त इको सिस्टम हो सकता है।" नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के एंट्री की भविष्यवाणी में यह कहा है, जिसे संयुक्त रूप से TIFAC के साथ विकसित किया गया है।
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Electric Vehicles
- फोटो : Pixabay
मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, प्रौद्योगिकी में सुधार और बैटरी की लागत में कमी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बाजार को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, जो कि 2031 तक तकनीकी सुधार और डिमांड इंसेंटिव (मांग प्रोत्साहन) के संयोजन के साथ 2024 तक जारी रहने के साथ 100 प्रतिशत पैठ हासिल करने की उम्मीद है।
Electric Vehicles
- फोटो : Pixabay
रिपोर्ट का अनुमान है कि आशावादी परिदृश्य में, जिसमें बैटरी की लागत 8 प्रतिशत की सीएजीआर के साथ कम हो जाती है, वित्त वर्ष 2024 तक वाहनों की रेंज और शक्ति में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है (तकनीकी प्रगति के कारण) और मांग प्रोत्साहन वित्त वर्ष 2031 तक जारी रहता है, 2021 में बेची गई 0.23 मिलियन यूनिट की तुलना में भारत में 22.01 मिलियन यूनिट की बिक्री दर्ज करने की उम्मीद है।
बजट 2019
- फोटो : Social
रिपोर्ट में बताया गया है कि इंसेंटिव आधारित परिदृश्य में, जिसमें मांग प्रोत्साहन जारी रहने का अनुमान किया जाता है, लेकिन सालाना बैटरी लागत में सिर्फ 2 प्रतिशत की कमी और रेंज और प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं होने के कारण, और बाजार में 21.86 फीसदी की पैठ के साथ, वित्त वर्ष 2031 में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री 5.49 मिलियन यूनिट होने का अनुमान है।
Electric Vehicle Charging Station
हालांकि, चुनौतीपूर्ण प्रसार परिदृश्य में, जब ज्यादातर स्थितियों को प्रतिकूल माना जाता है, तो वित्त वर्ष 2024 में सिर्फ 5.82 प्रतिशत की अधिकतम बाजार पहुंच हासिल की जाती है, जिसके बाद मांग प्रोत्साहन की वापसी के कारण गिरावट आती है और आखिर में वित्त वर्ष 2031 में 3.1 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।
ऐसी स्थिति में यह वित्तीय वर्ष 2024 में 0.98 मिलियन यूनिट और वित्तीय वर्ष 2031 में 0.78 मिलियन यूनिट की बिक्री में तब्दील होगा।
ऐसी स्थिति में यह वित्तीय वर्ष 2024 में 0.98 मिलियन यूनिट और वित्तीय वर्ष 2031 में 0.78 मिलियन यूनिट की बिक्री में तब्दील होगा।
Electric Car
- फोटो : Unsplash
आयोग का विचार है कि पेट्रोलियम आयात की उच्च मात्रा, व्यापार संतुलन पर इसके प्रतिकूल प्रभाव, मूल्यवान विदेशी मुद्रा और पर्यावरण को देखते हुए भारत के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर एक बदलाव जरूरी है।