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Auto Components: 2030 तक भारत की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री 145 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी, नीति आयोग का अनुमान
Mon, 14 Apr 2025 03:32 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 14 Apr 2025 03:32 PM IST
सार
भारत की शीर्ष नीति निर्धारक संस्था नीति आयोग ने अनुमान लगाया है कि देश की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री यानी ऑटोमोटिव कंपोनेंट सेक्टर 2030 तक 145 अरब डॉलर के आंकड़े को छू सकता है।
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Car Plant
- फोटो : Freepik
विस्तार
भारत की शीर्ष नीति निर्धारक संस्था नीति आयोग ने अनुमान लगाया है कि देश की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री यानी ऑटोमोटिव कंपोनेंट सेक्टर 2030 तक 145 अरब डॉलर के आंकड़े को छू सकता है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत से ऑटो पार्ट्स का निर्यात (एक्सपोर्ट) तीन गुना तक बढ़कर 60 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो फिलहाल करीब 20 अरब डॉलर है।
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ग्लोबल मार्केट में बड़ी भूमिका निभा सकता है भारत
नीति आयोग ने "ऑटोमोटिव उद्योग: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को सशक्त बनाना" शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा है कि भले ही इस सेक्टर को कुछ नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन मौके भी उतने ही मिल रहे हैं। भारत के पास यह सुनहरा मौका है कि वह ग्लोबल ऑटोमोबाइल बाजारों में अपनी एक मजबूत पहचान बना सके।
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नीति आयोग ने "ऑटोमोटिव उद्योग: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को सशक्त बनाना" शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा है कि भले ही इस सेक्टर को कुछ नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन मौके भी उतने ही मिल रहे हैं। भारत के पास यह सुनहरा मौका है कि वह ग्लोबल ऑटोमोबाइल बाजारों में अपनी एक मजबूत पहचान बना सके।
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नीति आयोग की रिपोर्ट में ऑटोमोटिव क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के मकसद से कई रणनीतिक राजकोषीय और गैर-राजकोषीय हस्तक्षेपों की रूपरेखा दी गई है। इन हस्तक्षेपों को ऑटोमोटिव घटकों की जटिलता और विनिर्माण परिपक्वता के आधार पर चार अलग-अलग श्रेणियों में संरचित किया गया है। ये चार श्रेणियां हैं - उभरती और जटिल, पारंपरिक और जटिल, पारंपरिक और सरल तथा उभरती और सरल।
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राजकोषीय हस्तक्षेप के तहत थिंक टैंक ने ओपेक्स (ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर) सहायता, कौशल विकास, आरएंडडी, आईपी ट्रांसफर और क्लस्टर विकास का सुझाव दिया है। जबकि गैर-राजकोषीय हस्तक्षेप के तहत नीति आयोग ने उद्योग 4.0 को अपनाने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, कामगारों के घंटों में लचीलापन और आपूर्तिकर्ता खोज जैसे उपायों का सुझाव दिया है।
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भारत की ऑटो इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति
2023 में दुनियाभर में लगभग 94 मिलियन यानी 9.4 करोड़ वाहन बनाए गए। वहीं, ग्लोबल ऑटो पार्ट्स का बाजार करीब 2 ट्रिलियन डॉलर का था, जिसमें 700 अरब डॉलर का निर्यात शामिल था। भारत इस वक्त दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल निर्माता बन चुका है, चीन, अमेरिका और जापान के बाद। सालाना करीब 60 लाख गाड़ियों का उत्पादन देश में होता है। खास तौर पर छोटी कारों और यूटिलिटी व्हीकल्स के मामले में भारत की अच्छी पकड़ बन चुकी है।
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ग्लोबल ऑटो पार्ट्स ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी अभी भी कम
हालांकि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वाहन निर्माता है, लेकिन ग्लोबल ऑटो पार्ट्स कारोबार में उसकी हिस्सेदारी अभी भी बहुत सीमित है, महज 20 अरब डॉलर, जो कि कुल का करीब 3 प्रतिशत है। दुनिया में ऑटो पार्ट्स ट्रेड का बड़ा हिस्सा इंजन कंपोनेंट्स, ट्रांसमिशन सिस्टम और स्टीयरिंग सिस्टम से आता है। लेकिन इन हाई-प्रिसिजन सेगमेंट्स में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2-4 प्रतिशत के बीच ही है।
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