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NHAI: दिल्ली-एनसीआर में हाईवे पर प्रदूषण कम करने के लिए एनएचएआई की बड़ी पहल, अब सख्त निगरानी

Thu, 30 Oct 2025 05:04 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 30 Oct 2025 05:04 PM IST
सार

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने दिल्ली-एनसीआर में सड़क निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।

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NHAI Steps Up Anti-Pollution Measures on Highways in Delhi-NCR
दिल्ली प्रदूषण - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) (एनएचएआई) ने दिल्ली-एनसीआर में सड़क निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस दिशा में एनएचएआई ने अपने सभी फील्ड ऑफिसों को एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (मानक संचालन प्रक्रिया) (एसओपी) जारी किया है। जिसमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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सड़क निर्माण, धूल और वाहनों से निकलने वाले धुएं पर रोक
एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि यह एसओपी एक व्यवस्थित तरीका बताता है जिससे वाहनों के धुएं, सड़क की धूल और निर्माण कार्यों से फैलने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके। यह दिशानिर्देश दिल्ली-एनसीआर में एनएचएआई के अंतर्गत आने वाले सभी निर्मित और निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी। 
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हाईवे किनारे हरियाली और सफाई पर खास ध्यान
एसओपी के तहत हाईवे पर मशीनों से रोड स्वीपिंग, मीडियन और लूप इंटरचेंज की हरियाली, और मियावाकी पद्धति से पौधारोपण जैसे कदम उठाए जाएंगे। साथ ही निर्माण सामग्री को ढककर रखना (तिरपाल से कवर करना), नियमित रोड मेंटेनेंस और गड्ढा-रहित सड़कें सुनिश्चित करना भी शामिल है ताकि सड़क की धूल कम फैले।

क्या है मियावाकी पद्धति
मियावाकी पद्धति जापान के वनस्पतिशास्त्री अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक तरीका है। जिसमें छोटे-से क्षेत्र में कई स्थानीय प्रजातियों के पौधे एक साथ घने रूप में लगाए जाते हैं। इससे कम जगह में घना जंगल तैयार होता है और हरियाली तेजी से बढ़ती है।

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निर्माण स्थलों पर भी सख्त नियम
एनएचएआई ने निर्माण स्थलों पर वायु प्रदूषण रोकने के लिए एंटी-स्मॉग गन, दिनभर पानी का छिड़काव, और ग्रीन नेट से सामग्री ढकने जैसे उपाय अनिवार्य किए हैं ताकि धूल हवा में न फैल सके।

एयर क्वालिटी की नियमित मॉनिटरिंग और सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन
SoP में यह भी कहा गया है कि सभी प्रोजेक्ट साइट्स पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की नियमित निगरानी होगी। साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) (सीएक्यूएम) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन एंड डिमॉलिशन (C&D) (सीएंडडी) वेस्ट और इनर्ट मटीरियल्स के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया गया है ताकि पर्यावरण पर असर कम पड़े और सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा मिल सके।

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मॉनिटरिंग और ट्रेनिंग भी अनिवार्य
एनएचएआई के फील्ड ऑफिसर्स, इंजीनियर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसल्टेंट्स की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे नियमित ऑडिट और निरीक्षण करें और SoP का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही वर्कर्स और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए ट्रेनिंग और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शिकायतों के समाधान के लिए 'ग्रीन दिल्ली एप' के जरिए सीधा प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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NHAI की सख्त चेतावनी- "धूल और धुएं पर जंग का एलान"
हाल ही में एनएचएआई के सदस्य (टेक्निकल) अलोक दीपंकर की अध्यक्षता में एक मीटिंग हुई, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के सभी फील्ड ऑफिसर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और कंसल्टेंट्स शामिल हुए।
इस बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अधिकारी और ठेकेदार धूल और वाहन प्रदूषण पर तुरंत और निर्णायक कदम उठाएं।

अधिकारियों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर्स को पर्याप्त मैनपावर, मशीनरी और संसाधन जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय जमीन पर तेजी से लागू किए जा सकें। एनएचएआईने दोहराया कि उसका उद्देश्य हाईवे प्रोजेक्ट्स से होने वाले निर्माण और ट्रैफिक प्रदूषण को मापनीय रूप से घटाना और पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करना है। 

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