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हाईकोर्ट का फैसला: 'किराए या इनाम' के आधार पर ट्रैक्टर-ट्रेलर दुर्घटना का बीमा दावा नहीं ठुकरा सकते बीमाकर्ता

Mon, 05 Oct 2026 09:26 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 05 Oct 2026 09:26 PM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर-ट्रेलर के दुर्घटना बीमा दावों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। जानें यह कानूनी विवाद किस हादसे से शुरू हुआ था? 

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Insurers Cannot Deny Tractor-Trailer Accident Claims Using 'Hire or Reward' Clause: Karnataka High Court
Tractor-Trailer Accident Claims - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कृषि और वाणिज्यिक वाहनों के बीमा दावों से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाते हुए यह साफ कर दिया है कि बीमा कंपनियां 'किराए या इनाम' क्लॉज का हवाला देकर ट्रैक्टर-ट्रॉली दुर्घटनाओं में हर्जाना देने से पीछे नहीं हट सकती हैं।

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23 सितंबर को सुनाए गए इस फैसले में जस्टिस हंचाटे संजीवकुमार ने स्पष्ट किया कि बीमा पॉलिसियों में इस तरह की दंडात्मक या प्रतिबंधात्मक शर्तें मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ हैं।

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यह कानूनी विवाद किस हादसे से शुरू हुआ था?

यह मामला 3 मई 2010 को कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में हुए एक दर्दनाक हादसे से जुड़ा है। मादेशा नाम के एक लकड़ी व्यापारी ने चिन्नि कट्टे गांव के पास नीलगिरी के पेड़ काटने के लिए दस्तगीरसाब और येलकैया नाम के दो बढ़इयों को काम पर रखा था।
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लकड़ी के लट्ठों को काटने के बाद उन्हें एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादा गया। जब वाहन को वजन के लिए कांटे की ओर ले जाया जा रहा था, तभी वह अनियंत्रित होकर पलट गया। इस भीषण हादसे में तीनों व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद भद्रावती के ट्रिब्यूनल (अधिकरण) ने पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। लेकिन शुरुआती फैसले में इसकी पूरी वित्तीय जिम्मेदारी ट्रैक्टर मालिक मुनिस्वामी पर डाल दी गई थी।

 

बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार क्यों किया था?

ट्रैक्टर-ट्रॉली के मालिक मुनिस्वामी ने जब नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से क्लेम की मांग की, तो बीमा कंपनी ने कवरेज देने से साफ मना कर दिया।
बीमा कंपनी का तर्क था कि ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन करके 'व्यावसायिक/किराए' के उद्देश्य से किया जा रहा था। इसके बाद वाहन मालिक ने बीमा कंपनी के इस रुख को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 
 

अदालत ने 'कृषि वाहनों' और पॉलिसी की शर्तों पर क्या टिप्पणी की?

हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। जस्टिस संजीवकुमार ने फैसले में स्पष्ट किया कि कृषि उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली को कृषि और वानिकी उत्पादों को ले जाने वाले परिवहन वाहन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
अदालत ने इन मुख्य बातें रेखांकित कीं:
  • उद्देश्य के अनुसार उपयोग: वाहन का इस्तेमाल लकड़ी और कृषि उत्पाद ले जाने के लिए किया जा रहा था, जो कि उसका निर्धारित काम है।
  • 'हायर या रिवॉर्ड' अमान्य: कृषि या वानिकी उपज के परिवहन को 'किराए या इनाम' पर चलाया गया वाहन नहीं माना जा सकता, चाहे उसे मालिक चला रहा हो या कोई अन्य व्यक्ति।
  • कानून की सर्वोपरिता: बीमा कंपनियां अपनी निजी नीतिगत शर्तों का सहारा लेकर मोटर वाहन अधिनियम द्वारा तय अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकतीं।

 

इस फैसले से पीड़ितों के मुआवजे और वाहन मालिकों पर क्या असर पड़ेगा?

ट्रैक्टर मालिक मुनिस्वामी द्वारा दायर तीन अपीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने मुआवजे के भुगतान का पूरा बोझ वापस नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर डाल दिया है।
इससे पहले ट्रिब्यूनल ने मृतकों के परिजनों के लिए अलग-अलग मुआवजा राशि तय की थी:
  • दो बढ़इयों के परिवारों को क्रमश: 4.5 लाख रुपये और 5.7 लाख रुपये।
  • लकड़ी व्यापारी के परिवार को 1.5 लाख रुपये (सभी राशियों पर 6% ब्याज के साथ)।
यह फैसला यह सिद्धांत स्थापित करता है कि मोटर वाहन अधिनियम के वैधानिक प्रावधान निजी बीमा कंपनियों के आंतरिक अनुबंधों से ऊपर हैं। इस आदेश से अब कृषि मशीनरियों के बीमा दावों का रास्ता साफ होगा और हादसों का शिकार हुए परिवारों को कंपनी की सख्त शर्तों के कारण मुआवजे से वंचित नहीं होना पड़ेगा।
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