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Automobile Industry: दक्षिण अफ्रीका भारतीय कार कंपनियों की नई मंजिल, अब होगी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत
Mon, 27 Oct 2025 08:15 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 27 Oct 2025 08:15 PM IST
सार
भारतीय वाहन निर्माता कंपनियां महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्सअब दक्षिण अफ्रीका में सिर्फ गाड़ियां बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे वहां की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रही हैं।
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Car Plant
- फोटो : Freepik
विस्तार
भारतीय वाहन निर्माता कंपनियां महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV) अब दक्षिण अफ्रीका में सिर्फ गाड़ियां बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे वहां की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) में बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रही हैं। यह कदम दक्षिण अफ्रीका की सरकारी योजना साउथ अफ्रीकन ऑटोमोटिव मास्टर प्लान (SAAM 2035) के अनुरूप है। जिसका लक्ष्य स्थानीय उत्पादन बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
यह रणनीति भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। जो दक्षिण अफ्रीका को केवल बाजार नहीं बल्कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप का मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में बढ़ रही हैं।
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यह रणनीति भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। जो दक्षिण अफ्रीका को केवल बाजार नहीं बल्कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप का मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में बढ़ रही हैं।
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SAAM 2035: असेंबली से फुल मैन्युफैक्चरिंग तक का सफर
SAAM 2035 का मकसद है कि दक्षिण अफ्रीका में बनने वाली गाड़ियों में लोकल पार्ट्स का इस्तेमाल 38 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाए, और साथ ही रोजगार को दोगुना किया जाए। इस योजना के तहत लक्ष्य है कि साल 2035 तक दक्षिण अफ्रीका की वाहन उत्पादन क्षमता 1.4 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष तक पहुंच जाए। जो दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 1 प्रतिशत होगा।
इसके लिए कंपनियों को सेमी-नॉक्ड डाउन (SKD) यानी आंशिक असेंबली से आगे बढ़कर कंप्लीट नॉक्ड डाउन (CKD) यानी पूरी तरह से स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग करनी होगी। CKD प्लांट में बॉडी-स्टैंपिंग, वेल्डिंग और पेंट शॉप्स जैसे फुल प्रोडक्शन प्रोसेस शामिल होते हैं।
इस बदलाव से कंपनियां दक्षिण अफ्रीका के ऑटोमोटिव प्रॉडक्शन एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम (APDP) के तहत टैक्स छूट और ड्यूटी क्रेडिट जैसे बड़े फायदे भी हासिल कर सकेंगी। भारतीय कंपनियों का इस दिशा में कदम बढ़ाना दक्षिण अफ्रीका सरकार की एक बड़ी नीतिगत जीत मानी जा रही है।
यह भी पढ़ें - Top-5 Premium EV: भारत में तेजी से बढ़ रही प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों की रेस, ये हैं टॉप-5 दमदार ईवी
SAAM 2035 का मकसद है कि दक्षिण अफ्रीका में बनने वाली गाड़ियों में लोकल पार्ट्स का इस्तेमाल 38 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया जाए, और साथ ही रोजगार को दोगुना किया जाए। इस योजना के तहत लक्ष्य है कि साल 2035 तक दक्षिण अफ्रीका की वाहन उत्पादन क्षमता 1.4 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष तक पहुंच जाए। जो दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 1 प्रतिशत होगा।
इसके लिए कंपनियों को सेमी-नॉक्ड डाउन (SKD) यानी आंशिक असेंबली से आगे बढ़कर कंप्लीट नॉक्ड डाउन (CKD) यानी पूरी तरह से स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग करनी होगी। CKD प्लांट में बॉडी-स्टैंपिंग, वेल्डिंग और पेंट शॉप्स जैसे फुल प्रोडक्शन प्रोसेस शामिल होते हैं।
इस बदलाव से कंपनियां दक्षिण अफ्रीका के ऑटोमोटिव प्रॉडक्शन एंड डेवलपमेंट प्रोग्राम (APDP) के तहत टैक्स छूट और ड्यूटी क्रेडिट जैसे बड़े फायदे भी हासिल कर सकेंगी। भारतीय कंपनियों का इस दिशा में कदम बढ़ाना दक्षिण अफ्रीका सरकार की एक बड़ी नीतिगत जीत मानी जा रही है।
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- फोटो : Freepik
महिंद्रा की बड़ी तैयारी: लोकल प्रोडक्शन का अगला पड़ाव
महिंद्रा ने दक्षिण अफ्रीका में अपनी मौजूदगी को मजबूत बनाने के लिए फरवरी 2025 में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (IDC) के साथ एक समझौता किया है। अब कंपनी वहां एक CKD प्लांट लगाने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इस प्लांट में न सिर्फ मौजूदा Pik Up मॉडल का उत्पादन होगा, बल्कि आने वाले समय में इसका अगला ग्लोबल वर्जन भी यहीं से तैयार किया जाएगा।
कंपनी का मौजूदा प्लांट क्वाजुलु-नटाल (केजेडएन) के ड्यूबे ट्रेडपोर्ट विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित है। जहां उत्पादन क्षमता को 900 यूनिट्स से बढ़ाकर 1,500 यूनिट्स प्रति माह कर दिया गया है। यह जगह किंग शाका अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और डरबन के बंदरगाह के पास होने से निर्यात के लिए बेहद सुविधाजनक है।
महिंद्रा अपनी रणनीति में अब इलेक्ट्रिक वाहनों (न्यू एनर्जी व्हीकल्स) (NEV) के उत्पादन पर भी ध्यान दे रही है। कंपनी दक्षिण अफ्रीका की खनिज संपदा का इस्तेमाल करते हुए बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहती है।
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महिंद्रा ने दक्षिण अफ्रीका में अपनी मौजूदगी को मजबूत बनाने के लिए फरवरी 2025 में इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (IDC) के साथ एक समझौता किया है। अब कंपनी वहां एक CKD प्लांट लगाने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इस प्लांट में न सिर्फ मौजूदा Pik Up मॉडल का उत्पादन होगा, बल्कि आने वाले समय में इसका अगला ग्लोबल वर्जन भी यहीं से तैयार किया जाएगा।
कंपनी का मौजूदा प्लांट क्वाजुलु-नटाल (केजेडएन) के ड्यूबे ट्रेडपोर्ट विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित है। जहां उत्पादन क्षमता को 900 यूनिट्स से बढ़ाकर 1,500 यूनिट्स प्रति माह कर दिया गया है। यह जगह किंग शाका अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और डरबन के बंदरगाह के पास होने से निर्यात के लिए बेहद सुविधाजनक है।
महिंद्रा अपनी रणनीति में अब इलेक्ट्रिक वाहनों (न्यू एनर्जी व्हीकल्स) (NEV) के उत्पादन पर भी ध्यान दे रही है। कंपनी दक्षिण अफ्रीका की खनिज संपदा का इस्तेमाल करते हुए बैटरी निर्माण और इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहती है।
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टाटा मोटर्स की वापसी: अब सुरक्षा और नेटवर्क पर जोर
टाटा मोटर्स ने भी दक्षिण अफ्रीकी बाजार में R2.5 लाख से R4.5 लाख (करीब 13,000 से 24,000 अमेरिकी डॉलर) के बीच वाले किफायती सेगमेंट में दोबारा एंट्री की है। इस बार कंपनी ने सुरक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है।
भारत में Global NCAP (ग्लोबल एनसीएपी) की 4 और 5 स्टार रेटिंग वाली गाड़ियां जैसे Tiago (टियागो), Punch (पंच), Curvv (कर्व) और Harrier (हैरियर) अब दक्षिण अफ्रीका में लॉन्च की जा रही हैं। खासकर हैरियर एसयूवी में लेवल 2 ADAS, 20 ड्राइवर-असिस्ट फीचर्स और छह एयरबैग जैसी हाईटेक सेफ्टी फीचर्स दी गई हैं। जो इसे इस सेगमेंट में अलग पहचान देती हैं।
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टाटा मोटर्स ने भी दक्षिण अफ्रीकी बाजार में R2.5 लाख से R4.5 लाख (करीब 13,000 से 24,000 अमेरिकी डॉलर) के बीच वाले किफायती सेगमेंट में दोबारा एंट्री की है। इस बार कंपनी ने सुरक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है।
भारत में Global NCAP (ग्लोबल एनसीएपी) की 4 और 5 स्टार रेटिंग वाली गाड़ियां जैसे Tiago (टियागो), Punch (पंच), Curvv (कर्व) और Harrier (हैरियर) अब दक्षिण अफ्रीका में लॉन्च की जा रही हैं। खासकर हैरियर एसयूवी में लेवल 2 ADAS, 20 ड्राइवर-असिस्ट फीचर्स और छह एयरबैग जैसी हाईटेक सेफ्टी फीचर्स दी गई हैं। जो इसे इस सेगमेंट में अलग पहचान देती हैं।
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- फोटो : Freepik
2019 में कमजोर बिक्री और सर्विस नेटवर्क के कारण टाटा को दक्षिण अफ्रीका से बाहर निकलना पड़ा था। अब कंपनी ने दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल ग्रुप मोटस होल्डिंग्स के साथ साझेदारी की है। इससे टाटा को देशभर में 40 डीलरशिप तक पहुंच मिल गई है, जिसे 2026 तक बढ़ाकर 60 करने की योजना है। यह नेटवर्क विस्तार ग्राहकों में भरोसा बढ़ाने और सेल्स में तेजी लाने के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
भारत में अपनी तेजी से बढ़ती बिक्री के बल पर टाटा अब दक्षिण अफ्रीका में 6 से 8 फीसदी मार्केट शेयर हासिल करने का लक्ष्य लेकर आई है। उसका सीधा मुकाबला Suzuki (सुजुकी) और Hyundai (ह्यूंदै) जैसी एशियाई कंपनियों से होगा, जो पहले से वहां के छोटे कार सेगमेंट पर हावी हैं।
यह भी पढ़ें - Car Exports: भारत से यात्री वाहन निर्यात में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी, जानें किस कंपनी ने किया कितना निर्यात
भारत में अपनी तेजी से बढ़ती बिक्री के बल पर टाटा अब दक्षिण अफ्रीका में 6 से 8 फीसदी मार्केट शेयर हासिल करने का लक्ष्य लेकर आई है। उसका सीधा मुकाबला Suzuki (सुजुकी) और Hyundai (ह्यूंदै) जैसी एशियाई कंपनियों से होगा, जो पहले से वहां के छोटे कार सेगमेंट पर हावी हैं।
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आगे की राह
महिंद्रा और टाटा दोनों की यह रणनीति दिखाती है कि भारतीय कार कंपनियां अब सिर्फ गाड़ियां बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे दक्षिण अफ्रीका की औद्योगिक नीतियों के साथ तालमेल बिठाकर वहां स्थायी मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन पर दांव लगा रही हैं।
इन कदमों से दक्षिण अफ्रीका न सिर्फ भारतीय ऑटो कंपनियों का नया ठिकाना बनेगा। बल्कि भारत की वैश्विक ऑटो रणनीति का अहम केंद्र भी साबित हो सकता है।
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महिंद्रा और टाटा दोनों की यह रणनीति दिखाती है कि भारतीय कार कंपनियां अब सिर्फ गाड़ियां बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे दक्षिण अफ्रीका की औद्योगिक नीतियों के साथ तालमेल बिठाकर वहां स्थायी मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन पर दांव लगा रही हैं।
इन कदमों से दक्षिण अफ्रीका न सिर्फ भारतीय ऑटो कंपनियों का नया ठिकाना बनेगा। बल्कि भारत की वैश्विक ऑटो रणनीति का अहम केंद्र भी साबित हो सकता है।
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