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EV: हिमाचल में अब डीजल-पेट्रोल टैक्सियां बनेंगी इलेक्ट्रिक, मिलेगी 40 प्रतिशत सब्सिडी, सरकार ने दी मंजूरी

Mon, 27 Oct 2025 07:04 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 27 Oct 2025 07:04 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए राज्य की 1,000 डीजल और पेट्रोल टैक्सियों को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में बदलने की मंजूरी दे दी है। हिमाचल का यह मॉडल उन सभी पहाड़ी राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है, जो प्रदूषण और ट्रैफिक की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

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Himachal Pradesh to Convert 1000 Diesel and Petrol Taxis into EVs under Rajiv Gandhi Swarozgar Yojna
Electric Car - फोटो : FREEPIK

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए राज्य की 1,000 डीजल और पेट्रोल टैक्सियों को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में बदलने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई वाली कैबिनेट ने यह निर्णय राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के तहत लिया है। इसका मकसद राज्य को ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ाना और साथ ही छोटे टैक्सी ऑपरेटर्स को आर्थिक मदद देना है। जो हिमाचल के पर्यटन और परिवहन सिस्टम की रीढ़ हैं।
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स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
पहाड़ी इलाकों में ट्रांसपोर्टेशन एक जरूरत भी है और प्रदूषण का बड़ा कारण भी। इन संवेदनशील इलाकों में डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। इसे ध्यान में रखते हुए सुक्खू सरकार ने ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को सभी जरूरी मंजूरियां देने के निर्देश दिए हैं। ताकि इन टैक्सियों को आसानी से इलेक्ट्रिक टैक्सियों में बदला जा सके।

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Himachal Pradesh to Convert 1000 Diesel and Petrol Taxis into EVs under Rajiv Gandhi Swarozgar Yojna
Electric Car Charging - फोटो : Freepik
टैक्सी चालकों को मिलेगा 40 प्रतिशत तक का फायदा
इस योजना के तहत सरकार टैक्सी मालिकों को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी या छूट देगी। ताकि वे अपने पुराने डीजल या पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए प्रेरित हों। यह राहत खासतौर पर छोटे टैक्सी ड्राइवर्स के लिए फायदेमंद होगी, जो नए वाहन खरीदने की लागत नहीं उठा सकते।

यह स्कीम सिर्फ पर्यावरण की दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक कदम है। राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के तहत सरकार लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर देने पर ध्यान दे रही है।

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पर्यटन और रोजगार को नई रफ्तार
सरकार का यह कदम हिमाचल के पर्यटन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एक नई हलचल पैदा कर सकता है। आने वाले समय में शिमला, मनाली, धर्मशाला और किन्नौर जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर इलेक्ट्रिक टैक्सियां आम नजारा बन सकती हैं।

इस योजना की खास बात यह है कि सरकार पुराने वाहनों को बदलवाने की जगह उन्हें इलेक्ट्रिक रेट्रोफिट करवाने की अनुमति दे रही है। यानी टैक्सी मालिक अपने पुराने वाहन को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कर सकते हैं, जिससे लागत भी कम होगी और रोजगार भी बना रहेगा। यह सब राज्य के "ग्रीन एनर्जी स्टेट 2026" के लक्ष्य के अनुरूप है। जिसमें ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन बिजनेस को बढ़ावा देना शामिल है।

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Himachal Pradesh to Convert 1000 Diesel and Petrol Taxis into EVs under Rajiv Gandhi Swarozgar Yojna
Electric Car Charging - फोटो : Freepik
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य की चुनौतियां
हालांकि योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य में चार्जिंग स्टेशन और सर्विस नेटवर्क कितनी तेजी से विकसित किए जाते हैं। सरकार की योजना है कि बिलासपुर से कुल्लू और शिमला से स्पीति जैसी मुख्य रूट्स पर फास्ट चार्जिंग पॉइंट्स लगाए जाएं।

ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट निजी कंपनियों और एनर्जी प्लेयर्स से भी बातचीत कर रहा है ताकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर समय पर तैयार हो सके।

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हरित पहाड़ियों की ओर एक नई शुरुआत
यह कदम स्थानीय टैक्सी यूनियनों, स्टार्टअप्स और ईवी सर्विस प्रोवाइडर्स को भी नई नौकरियों और कारोबार के अवसरों की दिशा में प्रेरित कर सकता है। इससे राज्य में पर्यटन, परिवहन और पर्यावरण तीनों के बीच बेहतर संतुलन बनेगा।

हिमाचल का यह मॉडल उन सभी पहाड़ी राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है, जो प्रदूषण और ट्रैफिक की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। 1,000 टैक्सियों से शुरुआत भले ही छोटी हो, लेकिन यह एक बड़ा संदेश देती है कि रोजगार और पर्यावरण एक साथ चल सकते हैं। 

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