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Hindi News ›   Automobiles News ›   India to Enforce Stricter CAFE Norms for All Vehicles: NITI Aayog’s 2035 EV Roadmap

CAFE 3 Norms: सभी वाहनों के लिए सख्त होंगे ईंधन नियम? नीति आयोग ने की कैफे नॉर्म्स लागू करने की सिफारिश

Fri, 01 May 2026 04:50 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 01 May 2026 04:50 PM IST
सार

भारत में जल्द ही पूरे ऑटोमोबाइल सेक्टर में ईंधन दक्षता के और भी सख्त नियम देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि नीति आयोग ने सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए 'कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता' (CAFE) मानदंडों को लागू करने की सिफारिश की है।

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India to Enforce Stricter CAFE Norms for All Vehicles: NITI Aayog’s 2035 EV Roadmap
Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

नीति आयोग ने सिफारिश की है कि कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नियमों को अब केवल कारों तक सीमित न रखकर वाहनों की सभी श्रेणियों पर लागू किया जाए। पश्चिम एशिया संकट और ईंधन की अस्थिर कीमतों को देखते हुए, यह कदम पेट्रोल-डीजल पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए उठाया गया है।

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क्या सभी वाहनों के लिए समान होंगे नियम?

वर्तमान में, ईंधन दक्षता के नियम सभी वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं हैं। नीति आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि टू-व्हीलर, पैसेंजर वाहन, कमर्शियल वाहन और बसों को भी CAFE मानकों के दायरे में लाया जाए। इसका उद्देश्य समग्र रूप से ईंधन की खपत को कम करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है। 

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EV अपनाने की रफ्तार को कैसे बढ़ाया जाएगा?

वर्तमान में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री का 50 प्रतिशत हिस्सा केवल थ्री-व्हीलर सेगमेंट में है। टू-व्हीलर और भारी वाहनों में यह 10 प्रतिशत से भी कम है।

  • लक्ष्य: नीति आयोग ने 2035 तक कुल ईवी हिस्सेदारी को मौजूदा 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है।

  • समाधान: सस्ती ब्याज दरों पर लोन, इंसेंटिव और शुरुआती कीमत में कमी करना प्रमुख सुझाव हैं।

CAFE-3 नियम क्या हैं और इससे क्या बदलेगा?

CAFE का मतलब है 'कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी'। इन नियमों के तहत कंपनियों को अपने द्वारा बेचे गए सभी वाहनों के औसत माइलेज और CO2 उत्सर्जन को एक निर्धारित सीमा के भीतर रखना होता है।

  • डिजाइन में बदलाव: अब केवल कार के आकार पर नहीं, बल्कि पूरी 'फ्लीट' (सभी वाहनों) के उत्सर्जन पर ध्यान दिया जाएगा।

  • नया दृष्टिकोण: कंपनियों को अब हल्के वजन वाले मैटेरियल और बेहतर 'एयरोडायनामिक्स' वाले डिजाइन पर काम करना होगा ताकि प्रदूषण कम हो सके।

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इंजन और ईंधन पर क्या असर पड़ेगा?

सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को E25 ईंधन (पेट्रोल में 25 प्रतिशत इथेनॉल) के लिए तैयारी शुरू करने को कहा है।

  1. फ्लेक्स-फ्यूल इंजन: ऐसे इंजन बनाए जाएंगे जो पेट्रोल और इथेनॉल दोनों पर चल सकें।

  2. भविष्य की योजना: सरकार भविष्य में इथेनॉल मिश्रण को 20-25 प्रतिशत से भी आगे ले जाने पर विचार कर रही है। आसान शब्दों में कहा जाए तो, भविष्य में पेट्रोल और डीजल के बजाय वैकल्पिक ईंधन अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

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