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Delhi High Court: भारत की टेस्ला पावर अब नहीं चला पाएगी विज्ञापन, जानिए कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?

Tue, 25 Nov 2025 04:55 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Tue, 25 Nov 2025 04:55 PM IST
सार

Tesla vs Tesla Inc: टेस्ला सिर्फ नाम नहीं ब्रांड की पहचान है, लेकिन अब टेस्ला और टेस्ला इंक के लड़ाई के बीच अदालत ने इंक के विज्ञापन पर रोक लगा दी है। यहां जानें पूरा मामला विस्तार से।

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India Tesla Power longer able run advertisements know why court imposed ban
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार यानी 24 नवंबर को एक बड़ा आदेश जारी किया है। इसमें कोर्ट ने गुरुग्राम स्थित टेस्ला पावर इंडिया को किसी भी तरह के ईवी या बैटरी उत्पादनों के विज्ञापन पर रोक लगा दी है। ये आदेश इस मामले की अंतिम सुनवाई तक जारी रहेगा। यह मामला एलन मस्क की कंपनी टेस्ला इंक द्वारा दायर किए गए ट्रेडमार्क विवाद से जुड़ा है।

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टेस्ला इंक का दावा है कि भारत में लोग टेस्ला पावर इंडिया के उत्पादों को देखकर भ्रमित हो रहे हैं। लोगों को लग रहा है कि यह ब्रांड एलन मस्क वाली टेस्ला से जुड़ा है। शिकायतें भी उन्हीं के पास पहुंच रही है। यानी कि ब्रांड के नाम से भ्रम और व्यापार में लॉस दोनों हो रहा है। 
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कंपनी के सीईओ कविंदर खुराना ने अदालत में सफाई दी। उन्होंने कहा हम इलेक्ट्रिक व्हीकल नहीं बनाते। सिर्फ लीड-एसिड बैटरी व इन्वर्टर बैटरी बेचते हैं। हमारी ईवी से कोई सक्रिय एंट्री नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि कुछ विज्ञापनों में ईवी ब्रांडिंग दिखाई दी थी, लेकिन वह एक अन्य कंपनी के ब्रांड सहयोग के कारण हुआ था। 


क्यों बढ़ा विवाद ?
टेस्ला इंक ने दावा किया कि टेस्ला पावर सिर्फ बैटरियों तक सीमित नहीं है। कंपनी ई-स्कूटर व ईवी से जुड़े उत्पाद भी बेच रही है। उन्होंने कोर्ट के पहले दिए वचन को खुद ही तोड़ दिया। इसके बाद अदालत ने टेस्ला पावर से ईवी ब्रिकी, स्टॉक व विज्ञापन से जुड़े तथ्य कोर्ट में दाखिल करने को कहा।

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कौन-सी चीजें अब प्रतिबंधित?
कॉर्ट के आदेश के बाद टेस्ला पावर ईवी से जुड़े विज्ञापन, बैटरी प्रमोशन, ऑनलाइन/ई-कॉमर्स ब्रांडिंग, टेस्ला लोगो का उपयोग नहीं कर सकेगा।

भारत के ईवी मार्केट पर क्या असर?
इस फैसले के बाद ट्रेडमार्क नियम कड़े होने की उम्मीद है। भविष्य में किसी भी बड़े ब्रांड की कॉपी या समान के नाम पर तेजी से कार्रवाई होगी। भारत का ईवी मार्केट अभी विस्तार में है। ऐसे में ब्रांड पहचान बेहद संवेदनशील हो चुकी है। इसके बाद अब अंतिम सुनवाई में तय होगा कि क्या टेस्ला पावर हमेशा के लिए टेस्ला नाम हटा देगी? क्या वह साबित कर पाएगी कि टेस्ला एक सामान्य शब्द है, ट्रेडमार्क पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता? फिलहाल यह मामला सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि ब्रांड की कीमत और पहचान पर युद्ध बन चुका है। 

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