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Traffic Jam: हर दिन की एक जानी-पहचानी परेशानी, 2025 में ट्रैफिक जाम से जूझते भारत के टॉप 10 शहर
Fri, 08 Aug 2025 06:21 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 08 Aug 2025 06:21 PM IST
सार
भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम अब सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। घंटों तक सिग्नल पर अटके रहना और धीरे-धीरे रेंगती गाड़ियां अब आम हो गई हैं।
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ट्रैफिक जाम
- फोटो : X/ @hawkeye
विस्तार
भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम अब सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। घंटों तक सिग्नल पर अटके रहना और धीरे-धीरे रेंगती गाड़ियां अब आम हो गई हैं। 2024-25 में देश के किन शहरों में सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम रहा, इसका खुलासा टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स की नई रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट में 10 ऐसे भारतीय शहरों को शामिल किया गया है जहां 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में सबसे ज्यादा वक्त लगता है।
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1. कोलकाता, पश्चिम बंगाल - सबसे धीमा ट्रैफिक
कोलकाता ने देश के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों की सूची में पहला स्थान पाया है। यहां औसतन 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 34 मिनट 33 सेकंड लगते हैं। यानी हर छोटी दूरी भी लंबी यात्रा जैसी लगती है।
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2. बंगलूरू, कर्नाटक - हर साल और बिगड़ता हाल
बंगलूरू में 10 किलोमीटर की यात्रा में औसतन 34 मिनट 10 सेकंड लगते हैं। ये समय पिछले साल की तुलना में 50 सेकंड और बढ़ गया है। शहर का बढ़ता ट्रैफिक आईटी हब को और भी थका देने वाला बना रहा है।
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बंगलूरू में 10 किलोमीटर की यात्रा में औसतन 34 मिनट 10 सेकंड लगते हैं। ये समय पिछले साल की तुलना में 50 सेकंड और बढ़ गया है। शहर का बढ़ता ट्रैफिक आईटी हब को और भी थका देने वाला बना रहा है।
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3. पुणे, महाराष्ट्र - सालाना 108 घंटे ट्रैफिक में बर्बाद
पुणे तीसरे नंबर पर है, जहां 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 33 मिनट 22 सेकंड का वक्त लगता है। साल भर में औसतन 108 घंटे सिर्फ ट्रैफिक में फंसे रहने में ही निकल जाते हैं।
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पुणे तीसरे नंबर पर है, जहां 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 33 मिनट 22 सेकंड का वक्त लगता है। साल भर में औसतन 108 घंटे सिर्फ ट्रैफिक में फंसे रहने में ही निकल जाते हैं।
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4. हैदराबाद, तेलंगाना - पीक ऑवर्स में बुरा हाल
हैदराबाद में औसतन 31 मिनट 30 सेकंड लगते हैं 10 किलोमीटर का सफर तय करने में। खासकर ऑफिस टाइम या पीक ऑवर्स में प्रमुख रास्ते पूरी तरह जाम हो जाते हैं।
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5. चेन्नई, तमिलनाडु - सालाना 94 घंटे ट्रैफिक में
चेन्नई में 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 30 मिनट 20 सेकंड लगते हैं। सालाना औसतन 94 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं, जो समय की बड़ी बर्बादी है।
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6. मुंबई, महाराष्ट्र - ट्रैफिक से भरा 'सपनों का शहर'
मुंबई में औसतन 29 मिनट 26 सेकंड में 10 किलोमीटर का सफर पूरा होता है। यह इसे देश का छठा सबसे धीमा ट्रैफिक वाला शहर बनाता है।
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7. अहमदाबाद, गुजरात - 73 घंटे सालाना ट्रैफिक में जाया
अहमदाबाद में यही दूरी तय करने में औसतन 29 मिनट 3 सेकंड लगते हैं। इसके चलते एक आम यात्री का साल भर में करीब 73 घंटे ट्रैफिक में निकल जाता है।
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8. एर्नाकुलम, केरल - 88 घंटे हर साल की बर्बादी
केरल का एर्नाकुलम शहर भी इस सूची में शामिल है। यहां 10 किलोमीटर तय करने में करीब 28 मिनट 30 सेकंड लगते हैं और करीब 88 घंटे सालाना लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं।
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9. जयपुर, राजस्थान - गुलाबी शहर की ट्रैफिक चुनौती
जयपुर में ट्रैफिक की स्थिति भी अच्छी नहीं है। औसतन 28 मिनट 28 सेकंड में 10 किलोमीटर तय होते हैं, जिससे हर साल करीब 83 घंटे ट्रैफिक में जाया हो जाते हैं।
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जयपुर में ट्रैफिक की स्थिति भी अच्छी नहीं है। औसतन 28 मिनट 28 सेकंड में 10 किलोमीटर तय होते हैं, जिससे हर साल करीब 83 घंटे ट्रैफिक में जाया हो जाते हैं।
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10. नई दिल्ली - राजधानी भी नहीं बची ट्रैफिक से
देश की राजधानी दिल्ली भी ट्रैफिक से जूझ रही है। यहां औसतन 23 मिनट 24 सेकंड में 10 किलोमीटर का सफर पूरा होता है। हर साल करीब 76 घंटे ट्रैफिक में फंसने में ही गुजर जाते हैं।
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देश की राजधानी दिल्ली भी ट्रैफिक से जूझ रही है। यहां औसतन 23 मिनट 24 सेकंड में 10 किलोमीटर का सफर पूरा होता है। हर साल करीब 76 घंटे ट्रैफिक में फंसने में ही गुजर जाते हैं।
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क्या है समाधान
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक अब सिर्फ एक बुनियादी दिक्कत नहीं, बल्कि एक गंभीर शहरी संकट बन चुका है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि लोगों की मानसिक और शारीरिक थकान भी बढ़ रही है। भविष्य में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) में निवेश ही इसका समाधान हो सकता है।
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इन आंकड़ों से साफ है कि भारत के बड़े शहरों में ट्रैफिक अब सिर्फ एक बुनियादी दिक्कत नहीं, बल्कि एक गंभीर शहरी संकट बन चुका है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि लोगों की मानसिक और शारीरिक थकान भी बढ़ रही है। भविष्य में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) में निवेश ही इसका समाधान हो सकता है।
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