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Hindi News ›   Automobiles News ›   India’s Highway Sector Hits 7-Year Low: Construction and Project Awards Slump in FY26 Claims Media Report

Highways: भारत में हाईवे निर्माण और नए प्रोजेक्ट्स में गिरावट, क्या सात साल के निचले स्तर पर पहुंचा सेक्टर?

Wed, 08 Apr 2026 06:49 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Wed, 08 Apr 2026 06:49 PM IST
सार

भारत में 2025-26 में हाईवे निर्माण और नई सड़क परियोजनाओं के आवंटन में सात साल का सबसे निचला स्तर देखा गया। जो इस क्षेत्र में प्रोजेक्ट पाइपलाइन में सुस्ती और बोली-पूर्व की कड़ी शर्तों को दर्शाता है।

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India’s Highway Sector Hits 7-Year Low: Construction and Project Awards Slump in FY26 Claims Media Report
National Highway 301 - फोटो : X/@Nitin_Gadkari

विस्तार

भारत में हाईवे निर्माण और नए सड़क प्रोजेक्ट्स का आवंटन वित्त वर्ष 2025-26 में सात साल के निचले स्तर पर गिर गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट प्रोजेक्ट पाइपलाइन में कमी और सेक्टर में बोली (pre-bid) से पहले की कड़ी शर्तों के कारण आई है।

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आंकड़े क्या कहते हैं?
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल 10,000 किलोमीटर से भी कम हाईवे का निर्माण हुआ है, जो 2019-20 के बाद सबसे कम उत्पादन है। वहीं, वित्त वर्ष 2026 में केवल 7,000 किलोमीटर के नए प्रोजेक्ट आवंटित किए गए, जो सिस्टम में नए अनुबंधों (contracts) की कमी को दर्शाता है।

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इस मंदी के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?
इस गिरावट का संबंध जमीन की उपलब्धता और बोली लगाने से पहले वैधानिक मंजूरी से जुड़ी सख्त शर्तों से है। इसके अलावा, सड़क एजेंसियों ने राज्य राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्गों में बदलने की गति भी धीमी कर दी है। जिससे नए प्रोजेक्ट्स की संख्या सीमित हो गई है।

क्या एजेंसियां जानबूझकर सतर्कता बरत रही हैं?
अधिकारियों के अनुसार, एजेंसियों ने "आत्म-संयम" का रास्ता अपनाया है ताकि उन प्रोजेक्ट्स के आवंटन से बचा जा सके जो बाद में भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरण मंजूरी, या उपयोगिता स्थानांतरण जैसी समस्याओं के कारण रुक सकते हैं। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य लागत में वृद्धि और क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को रोकना है।

प्रोजेक्ट्स की देरी पर अधिकारियों का क्या कहना है?
एक अधिकारी ने कहा, "प्रोजेक्ट्स में देरी का कोई फायदा नहीं है; बल्कि इससे लागत बढ़ती है। देरी से चल रहे प्रोजेक्ट्स की संख्या कम करने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। दूसरा, अब ध्यान मौजूदा राजमार्गों के विस्तार के बजाय अधिक आर्थिक गलियारों और एक्सप्रेसवे के निर्माण पर है।" 

NHAI का प्रदर्शन कैसा रहा?
प्रोजेक्ट आवंटन में समग्र मंदी के बावजूद, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वर्ष के दौरान 5,313 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया, जो इसके 4,640 किलोमीटर के लक्ष्य से लगभग 15 प्रतिशत अधिक था।

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उद्योग और ठेकेदारों पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि नए प्रोजेक्ट्स की कमी के कारण ठेकेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। कुछ मामलों में, कंपनियां काम हासिल करने के लिए शुरुआती अनुमानों से 42 प्रतिशत तक कम दरों पर बोली लगा रही हैं।

भविष्य की राह क्या है?
एक प्रमुख हाईवे डेवलपर के वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा, "कम प्रोजेक्ट्स की बोली लगाए जाने का प्रभाव अगले कुछ वर्षों में दिखाई देगा।" वर्तमान में सेक्टर की दिशा छोटे विस्तारों के बजाय बड़े और रणनीतिक बुनियादी ढांचे के निर्माण की ओर बढ़ रही है।

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