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Solar EV Battery Swapping: भारत का पहला सोलर बैटरी स्वैपिंग स्टेशन जयपुर में हुआ शुरू, मिलेंगे कई फायदे
Wed, 19 Jul 2023 04:57 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 19 Jul 2023 04:57 PM IST
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ChargeUp battery swapping station in Jaipur has been equipped with advanced solar technology
- फोटो : ChargeUp
फाइनेंस-नेटवर्क-टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म Chargeup (चार्जअप) ने बुधवार को एलान किया कि उसने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए देश का पहला सोलर पावर (सौर ऊर्जा) से चलने वाला बैटरी स्वैपिंग स्टेशन पेश किया है। यह स्टेशन बेनीवाल कांटा, चुंगी सर्कल, रामगढ़ मोड़, जयपुर में स्थित है। पायलट प्रोजेक्ट का लक्ष्य प्रतीकात्मक रूप से गुलाबी शहर को हरित शहर में बदलना है। इसका लक्ष्य पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता के बिना बैटरी चार्जिंग को सक्षम करना है।
बैटरी स्वैपिंग स्टेशन को एडवांस्ड सोलर टेक्नोलॉजी से लैस किया गया है। इसकी वजह से यह सूरज से मिलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल करने और सौर-उत्पन्न ऊर्जा को चार्जिंग कैबिनेट में निर्देशित करने के लिए चार्जिंग ग्रिड के साथ सिंक्रनाइज करने में सक्षम बनाता है। स्टेशन 140 kWh बैटरी चार्ज करने में सक्षम है, जो स्टेशन की कुल ऊर्जा जरूरतों का 20 प्रतिशत कवर करता है।
सौर ऊर्जा से चलने वाली प्रणाली कुछ क्षेत्रों में ग्रिड स्थिरता के मुद्दों को भी संबोधित करेगी क्योंकि यह बिजली कटौती के दौरान निर्बाध बिजली की जरूरतों के साथ-साथ स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति को भी पूरा करेगी। इस पहल का मकसद ईवी की स्थिरता को बढ़ावा देना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में तेजी लाना भी है। इसके अलावा, सोलर पावर प्लांट बैटरी चार्जिंग के पारंपरिक तरीकों से पैदा होने वाले अतिरिक्त CO2 उत्सर्जन को कम करेगा।
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चार्जअप ने इस पहल को जयपुर के 30 और स्टेशनों तक विस्तारित करने की योजना बनाई है, जिसमें शहर के 80 प्रतिशत पिन कोड शामिल होंगे। बाद के चरणों में, इस मॉडल को अन्य शहरों में, खासतौर पर टियर-2 स्थानों में लागू करने की योजना है। विकेंद्रीकृत सौर माइक्रोग्रिड में निवेश करके, कंपनी का लक्ष्य अपने 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत स्टेशनों को सौर ऊर्जा से बिजली देना है।
इस क्षेत्र के कई खिलाड़ी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर रफ्तार बढ़ाने के लिए बैटरी स्वैपिंग मॉडल पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। इसे ईवी चार्जिंग स्टेशनों के ज्यादा टिकाऊ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। बैटरी स्वैपिंग मॉडल में चंद सेकंड में बैटरियों की अदला-बदली हो जाती है और बैटरी में आग लगने की संभावना को भी कम करता है। CO2 उत्सर्जन को कम करने के मामले में सौर ऊर्जा से चलने वाला बैटरी स्वैपिंग मॉडल और भी ज्यादा कुशल लगता है।
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बैटरी स्वैपिंग स्टेशन को एडवांस्ड सोलर टेक्नोलॉजी से लैस किया गया है। इसकी वजह से यह सूरज से मिलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल करने और सौर-उत्पन्न ऊर्जा को चार्जिंग कैबिनेट में निर्देशित करने के लिए चार्जिंग ग्रिड के साथ सिंक्रनाइज करने में सक्षम बनाता है। स्टेशन 140 kWh बैटरी चार्ज करने में सक्षम है, जो स्टेशन की कुल ऊर्जा जरूरतों का 20 प्रतिशत कवर करता है।
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सौर ऊर्जा से चलने वाली प्रणाली कुछ क्षेत्रों में ग्रिड स्थिरता के मुद्दों को भी संबोधित करेगी क्योंकि यह बिजली कटौती के दौरान निर्बाध बिजली की जरूरतों के साथ-साथ स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति को भी पूरा करेगी। इस पहल का मकसद ईवी की स्थिरता को बढ़ावा देना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में तेजी लाना भी है। इसके अलावा, सोलर पावर प्लांट बैटरी चार्जिंग के पारंपरिक तरीकों से पैदा होने वाले अतिरिक्त CO2 उत्सर्जन को कम करेगा।
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चार्जअप ने इस पहल को जयपुर के 30 और स्टेशनों तक विस्तारित करने की योजना बनाई है, जिसमें शहर के 80 प्रतिशत पिन कोड शामिल होंगे। बाद के चरणों में, इस मॉडल को अन्य शहरों में, खासतौर पर टियर-2 स्थानों में लागू करने की योजना है। विकेंद्रीकृत सौर माइक्रोग्रिड में निवेश करके, कंपनी का लक्ष्य अपने 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत स्टेशनों को सौर ऊर्जा से बिजली देना है।
इस क्षेत्र के कई खिलाड़ी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर रफ्तार बढ़ाने के लिए बैटरी स्वैपिंग मॉडल पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। इसे ईवी चार्जिंग स्टेशनों के ज्यादा टिकाऊ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। बैटरी स्वैपिंग मॉडल में चंद सेकंड में बैटरियों की अदला-बदली हो जाती है और बैटरी में आग लगने की संभावना को भी कम करता है। CO2 उत्सर्जन को कम करने के मामले में सौर ऊर्जा से चलने वाला बैटरी स्वैपिंग मॉडल और भी ज्यादा कुशल लगता है।