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India-EU FTA: भारत-ईयू एफटीए से ऑटो कंपोनेंट उद्योग को कैसे होगा फायदा? जानें पूरी डिटेल्स

Fri, 06 Feb 2026 10:23 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 06 Feb 2026 10:23 PM IST
सार

प्रस्तावित इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत, भारतीय ऑटो कंपोनेंट बनाने वालों को बेहतर प्राइस कॉम्पिटिटिवनेस के साथ यूरोपियन मार्केट में ज्यादा एक्सेस मिलने की संभावना है।

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India-EU FTA Explained: Big Opportunity for Indian Auto Component Industry
Car Plant - फोटो : Freepik

विस्तार

भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता (FTA) (एफटीए) भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए नए अवसर खोल सकता है। रेटिंग एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते से यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच, लागत में प्रतिस्पर्धा और ग्लोबल सप्लाई चेन में भागीदारी मजबूत होने की संभावना है।

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India-EU FTA से ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को क्या फायदा होगा?
ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ में युक्तिसंगत कटौती और प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच से भारतीय ऑटो कंपोनेंट कंपनियों की कीमत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे यूरोपीय ऑटोमोबाइल ओईएम के साथ सोर्सिंग के नए अवसर मिल सकते हैं।

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यूरोप भारतीय सप्लायर्स के लिए इतना अहम क्यों है?
यूरोपीय संघ दुनिया के प्रमुख ऑटोमोबाइल उत्पादन केंद्रों में से एक है। बेहतर व्यापार शर्तें मिलने पर भारतीय सप्लायर्स की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी बढ़ सकती है। इससे वे उन देशों के सप्लायर्स से बेहतर मुकाबला कर पाएंगे, जिन्हें फिलहाल ईयू में टैरिफ का फायदा मिलता है।

भारत के EU को ऑटो एक्सपोर्ट में विस्तार की कितनी गुंजाइश है?
फिलहाल ऑटोमोबाइल और कंपोनेंट्स भारत के ईयू को कुल निर्यात का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे व्यापार बाधाएं घटेंगी, इस हिस्सेदारी में तेजी से विस्तार संभव है। 

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आयात शुल्क में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
ICRA के अनुसार, एफटीए में ईयू-निर्मित सीबीयू (कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट) वाहनों पर आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से घटाने का प्रावधान है-

  • शुल्क स्तर करीब 110 प्रतिशत से घटकर
  • तय कीमत सीमा और कोटा के भीतर लगभग 10 प्रतिशत तक आ सकता है

क्या इसका असर सभी कार सेगमेंट पर पड़ेगा?
रिपोर्ट बताती है कि यह बदलाव प्रीमियम वाहन सेगमेंट को ज्यादा प्रभावित करेगा, जबकि मास-मार्केट पैसेंजर कारें काफी हद तक सुरक्षित रहेंगी।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर टैरिफ का क्या होगा?
शुरुआती चरण में EV टैरिफ में बदलाव की संभावना कम बताई गई है। इससे घरेलू EV सप्लाई चेन को नई व्यापार परिस्थितियों के अनुसार ढलने का समय मिलेगा। 

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निवेश और तकनीकी सहयोग कैसे बढ़ेगा?
बेहतर बाजार पहुंच से

  • प्रिसिजन इंजीनियरिंग
  • इलेक्ट्रॉनिक्स इंटीग्रेशन
  • विशेषीकृत कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग

में निवेश बढ़ सकता है। साथ ही, यूरोपीय कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग और प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन को बढ़ावा मिलेगा।

MSME और मिड-साइज एक्सपोर्टर्स को क्या लाभ मिल सकता है?
रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यात-केंद्रित मिड-साइज कंपनियां और MSME (एमएसएमई), खासकर जो विशेषीकृत कंपोनेंट्स और आफ्टरमार्केट उत्पाद बनाती हैं, उन्हें यूरोपीय खरीदारों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। क्योंकि वैश्विक सोर्सिंग रणनीतियां बदल रही हैं।

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भारत में आयात पर इसका क्या असर होगा?
भारत में आयात के संदर्भ में, टैरिफ कटौती का लाभ मुख्य रूप से प्रीमियम ICE वाहनों को मिलने की संभावना है। छोटी और मिड-सेगमेंट कारों पर इसका असर सीमित रहने का अनुमान है।

टैरिफ लाइनों पर व्यापक समझौता क्या कहता है?

  • ईयू भारत को अपनी 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क की प्राथमिक पहुंच देगा
  • यह भारत के 99.5 प्रतिशत निर्यात मूल्य को कवर करेगा
  • भारत बदले में अपनी 92 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क खत्म करेगा या घटाएगा

एफटीए से बड़े अवसर
भारत-ईयू एफटीए भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए एक्सपोर्ट ग्रोथ, निवेश और तकनीकी साझेदारी का बड़ा अवसर बन सकता है। खासकर, प्रतिस्पर्धी कीमतों और बेहतर बाजार पहुंच के साथ भारत की भूमिका यूरोपीय ऑटो सप्लाई चेन में और मजबूत होने की उम्मीद है। 


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