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Chinese EV: भारत में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों की आ सकती है बाढ़, जीटीआरआई ने किया आगाह, जानें वजह
Fri, 17 May 2024 04:22 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 17 May 2024 04:22 PM IST
सार
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने चेतावनी दी है कि हाल ही में अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा चीनी आयात पर टैरिफ बढ़ाए जाने से भारतीय बाजार में चीनी सामानों की बाढ़ आ सकती है।
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- फोटो : istock
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विस्तार
पश्चिमी देशों द्वारा चीन के साथ ट्रेड वार (व्यापार युद्ध) तेज करने के कारण, भारत खुद को चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और बैटरियों से भरा हुआ पा सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने चेतावनी दी है कि हाल ही में अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा चीनी आयात पर टैरिफ बढ़ाए जाने से भारतीय बाजार में चीनी सामानों की बाढ़ आ सकती है।
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अमेरिका और यूरोपीय संघ ने चीनी ईवी और बैटरियों पर शुल्क को काफी बढ़ा दिया है। अमेरिका ने इन वस्तुओं पर लगभग 100 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। जीटीआरआई के संक्षिप्त विवरण में इस बात पर जोर दिया गया है कि ये उपाय चीन को पश्चिमी टैरिफ से बचने के लिए भारत सहित अन्य बाजारों में अपने निर्यात को पुनर्निर्देशित कर सकता है।
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जीटीआरआई के बयान में कहा गया है, "दोनों अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) चीन से इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात में कटौती कर रहे हैं। अमेरिका द्वारा ईवी, बैटरी और कई अन्य नई प्रौद्योगिकी वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाने से चीन को इन उत्पादों को भारत सहित अन्य बाजारों में बेचने के लिए मजबूर कर सकता है।"
14 मई को, अमेरिकी सरकार ने ईवी बैटरी, कंप्यूटर चिप्स और चिकित्सा उत्पादों सहित कई चीनी आयातों पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी का एलान किया। जिससे बीजिंग के साथ व्यापार संघर्ष बढ़ गया। व्हाइट हाउस ने चीन की व्यापार प्रथाओं से घरेलू आर्थिक सुरक्षा के लिए "अस्वीकार्य जोखिम" का हवाला दिया। जिसमें उसका दावा है कि सस्ते सामानों से वैश्विक बाजारों में बाढ़ आ गई है।
जीटीआरआई ने उल्लेख किया कि ये शुल्क वृद्धि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अमेरिका की बाध्य शुल्क प्रतिबद्धताओं से ज्यादा है। जो संभावित रूप से डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन है। अमेरिकी सरकार ने शायद ही कभी इस्तेमाल किए जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा खंड के तहत बढ़ोतरी का बचाव किया है।
ईवी और सेमीकंडक्टर जैसे उत्पादों के लिए यह दृष्टिकोण कम आशावादी है, जहां भारत शुद्ध आयातक बना हुआ है। जीटीआरआई ने चीनी सामानों की डंपिंग को रोकने के लिए भारत को सतर्क रहने की जरूरत पर जोर दिया। जो इसके घरेलू बाजार को बाधित कर सकता है।
ईवी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए, भारत सरकार ने हाल ही में कुछ मॉडलों पर आयात करों को 100 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने वाली नीति शुरू की। बशर्ते निर्माता कम से कम 500 मिलियन डॉलर का निवेश करें और स्थानीय कारखाने लगाए।
जीटीआरआई ने निष्कर्ष निकाला, "अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) चीन पर निर्भरता कम करने के लिए सक्रिय उपाय कर रहे हैं। स्थिर निर्यात और चीन से बढ़ते आयात के साथ, भारत को भी एक चीन रणनीति की जरूरत पड़ सकती है।"