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GRAP-3: दिल्ली में लागू हुआ ग्रेप-3,जानें कौन सी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के चलाने पर लगा प्रतिबंध

Tue, 11 Nov 2025 03:00 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 11 Nov 2025 03:00 PM IST
सार

दिल्ली और एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) (ग्रेप) के तीसरे चरण (स्टेज III) को लागू कर दिया है।

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GRAP 3 Restrictions in Delhi for Car Delhi Pollution News Car Ban
Delhi Pollution - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली और एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) (ग्रेप) के तीसरे चरण (स्टेज III) को लागू कर दिया है। इस फैसले के बाद अब BS-III (बीएस-3) पेट्रोल और BS-IV (बीएस-4) डीजल गाड़ियां सड़कों पर नहीं चल सकेंगी। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) (AQI) 400 से ऊपर पहुंच गया है, जो कि गंभीर श्रेणी में आता है।
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पुराने वाहनों पर पूरी तरह रोक
ग्रेप-3 लागू होने के बाद अब बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल चार-पहिया वाहनों का संचालन दिल्ली और आसपास के जिलों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, यह नियम आपातकालीन सेवाओं और विकलांग व्यक्तियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले वाहनों पर लागू नहीं होगा। 

इतना है जुर्माना
अगर कोई वाहन मालिक इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उस पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, बीएस-4 डीजल इंजन वाले मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों (MGV) को भी दिल्ली में एंट्री नहीं दी जाएगी।

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क्यों लागू किए गए ये सख्त कदम
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) (सीबीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का AQI सोमवार को 362 से बढ़कर मंगलवार को 421 हो गया। शहर के कई इलाकों जैसे बवाना (462), आर.के. पुरम (446) और पटपड़गंज (438) में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई।

सीएक्यूएम के अनुसार, कम हवा की गति और मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषण बढ़ा है। ग्रेप-3 लागू करने का उद्देश्य हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है। खासकर दिवाली के बाद के मौसम में, जब प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है।

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ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट पर असर
इन नियमों से अब दिल्ली-एनसीआर की आवाजाही और परिवहन प्रणाली पर सीधा असर पड़ेगा।
  1. कम्यूटर की दिक्कतें: पुराने BS-III और BS-IV वाहन चलाने वाले लोगों को अब दफ्तर या रोजाना के सफर में मुश्किल होगी।
  2. लॉजिस्टिक्स पर असर: डीजल मालवाहक वाहनों पर रोक से सप्लाई चेन और डिलीवरी सर्विसेज पर असर पड़ सकता है।
  3. पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर दबाव: अब ज्यादा लोग मेट्रो, ई-बस या कैब सर्विसेज पर निर्भर होंगे, जिससे भीड़ बढ़ने की संभावना है।
  4. परिवहन कंपनियां अब अपने फ्लीट ऑपरेशन को नए नियमों के अनुसार एडजस्ट करने की तैयारी में हैं।

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निर्माण और इंडस्ट्री पर भी रोक
  • ग्रेप-3 के तहत अब दिल्ली में निर्माण और विध्वंस कार्यों पर भी रोक लगा दी गई है।
  • सिर्फ सड़क, रेलवे और एयरपोर्ट से जुड़े प्रोजेक्ट्स को छूट दी गई है।
  • जो उद्योग अनुमोदित ईंधन का इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें भी अस्थायी रूप से बंद करने के आदेश दिए गए हैं।
  • नगर निगम को सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपर और वॉटर स्प्रिंकलर के जरिए धूल कम करने के निर्देश दिए गए हैं।

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क्या है GRAP सिस्टम
GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए चार चरणों में काम करने वाला प्लान है।

चरण 1 - खराब (AQI 201-300)
  • सड़क सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाना
  • खुले में कचरा जलाने पर सख्ती
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देना

चरण 2 - बहुत खराब (AQI 301-400)
  • डीजल जनरेटर सेट्स पर रोक (सिर्फ आपातकालीन सेवाओं को छूट)
  • पार्किंग शुल्क बढ़ाना ताकि कार का उपयोग कम हो
  • निर्माण स्थलों पर निगरानी बढ़ाना

 

चरण 3 - गंभीर (AQI 401-450)
  • BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों पर बैन
  • गैर-जरूरी निर्माण कार्यों पर रोक
  • गैर-मान्यता प्राप्त ईंधन इस्तेमाल करने वाले उद्योग बंद
  • सड़कों की अतिरिक्त सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय

चरण 4 - बहुत गंभीर (AQI 450 से ऊपर)
  • दिल्ली में सभी ट्रकों की एंट्री पर रोक (जरूरी सामान को छोड़कर)
  • स्कूल, कॉलेज, दफ्तर बंद कर वर्क-फ्रॉम-होम लागू
  • सभी गैर-जरूरी इंडस्ट्री और निर्माण कार्य रोकना

 

क्या करना चाहिए नागरिकों को
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली में सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता हर साल बिगड़ती है, जिसका कारण पराली जलाना, गाड़ियों का धुआं और मौसम की ठहराव वाली स्थिति है।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे:
  • नियमित रूप से AQI अपडेट्स चेक करें,
  • अपनी गाड़ियों का PUC सर्टिफिकेट अपडेट रखें,
  • और अगर संभव हो तो CNG या इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल करें।

ग्रेप-3 के ये सख्त कदम भले अस्थायी हों, लेकिन ये एक बार फिर साफ दिखाते हैं कि दिल्ली की हवा और जनता की सेहत के बीच संतुलन बनाना अब बेहद जरूरी हो गया है। 

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