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Hindi News ›   Automobiles News ›   Government Tightens Car Safety Norms: New Rear-Impact, EV Battery And EDR Rules from 2027-2029

भारत में सख्त हुए वाहन सुरक्षा नियम: अप्रैल 2029 से पेट्रोल कारों, EV बैटरियों के लिए क्या नए मानक लागू होंगे?

Fri, 23 Oct 2026 07:27 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 23 Oct 2026 07:27 PM IST
सार

  • भारत में वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने और सड़क हादसों के बाद आग लगने या बिजली से जुड़े खतरों को कम करने के लिए सरकार ने सुरक्षा मानकों में बदलाव किए हैं।
  • नए नियमों के तहत पेट्रोल जैसी तरल ईंधन से चलने वाली कारों के फ्यूल सिस्टम, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी सुरक्षा, क्रैश टेस्ट और पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।

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Government Tightens Car Safety Norms: New Rear-Impact, EV Battery And EDR Rules from 2027-2029
Vehicle Safety Standards In India - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भारत में गाड़ियों को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षा मानकों में कड़े बदलाव किए हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य पीछे से टक्कर होने की स्थिति में ईंधन के रिसाव, आग लगने के खतरों और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में होने वाली इलेक्ट्रिकल दुर्घटनाओं को कम करना है। सरकार के इन व्यापक सुरक्षा अपडेट्स के तहत क्रैश प्रोटेक्शन, ईवी बैटरी, फ्यूल सिस्टम और पैदल चलने वालों की सुरक्षा से जुड़े कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। जो आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। 

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पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में आग लगने के खतरों को रोकने के लिए क्या नए नियम बनाए गए हैं?

संशोधित ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AIS-101) के तहत पीछे से टक्कर लगने के बाद फ्यूल सिस्टम की सुरक्षा के लिए नए नियम तय किए गए हैं। इन संशोधित नियमों के अनुसार:
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  • रियर-इम्पैक्ट क्रैश टेस्ट के दौरान लिक्विड-फ्यूल सिस्टम से या तो बहुत मामूली रिसाव होना चाहिए या फिर लगातार होने वाला रिसाव 30 ग्राम प्रति मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए।
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  • फ्यूल सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए कि टक्कर के बाद उसमें आग न फैल सके।
यह नियम लिक्विड फ्यूल से चलने वाली सभी गाड़ियों पर लागू होंगे ताकि एक्सीडेंट के बाद आग लगने के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सके।
 

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पीछे से टक्कर के बाद बैटरी सुरक्षा को लेकर क्या बदलाव हुए हैं?

संशोधित मानकों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को ध्यान में रखते हुए बैटरी रिटेंशन और क्रैश के दौरान व उसके बाद इलेक्ट्रिकल खतरों से बचाव के कड़े नियम पेश किए गए हैं:
  • नए नियमों के तहत किसी भी ईवी की बैटरी और उसकी सुरक्षा करने वाले मैकेनिज्म को इम्पैक्ट टेस्ट के दौरान और उसके बाद अपनी तय जगह पर ही रहना होगा।
  • इसमें इलेक्ट्रिकल जोखिमों से सुरक्षा के प्रावधान भी हैं, जिसमें टक्कर के तुरंत बाद हाई-वोल्टेज सर्किट का ऑटोमैटिक रूप से डिसकनेक्ट (अलग) होना शामिल है।
यह आवश्यकताएं दुर्घटना के समय इलेक्ट्रिक वाहनों में होने वाले शॉर्ट-सर्किट या अन्य इलेक्ट्रिकल खतरों की आशंका को कम करने के लिए बनाई गई हैं।
 

क्या देश की हर कार में 'इवेंट डेटा रिकॉर्डर' (EDR) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है?

  • सड़क परिवहन मंत्रालय ने अक्तूबर 2029 से गाड़ियों में लगने वाले इवेंट डेटा रिकॉर्डर (EDR) के लिए AIS-192 मानक को अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, इसे लेकर एक बड़ा प्वॉइंट यह है कि सरकार ने हर कार में ई़डीआर लगाना अनिवार्य नहीं किया है। यानी यह सुविधा अभी भी वैकल्पिक बनी हुई है।
  • एयरोप्लेन के 'ब्लैक बॉक्स' की तरह काम करने वाला यह डिवाइस दुर्घटना से ठीक पहले और उसके दौरान वाहन की हरकतों का डेटा रिकॉर्ड करता है। इससे जांचकर्ताओं को यह समझने में मदद मिलती है कि टक्कर आखिर कैसे हुई थी।
 

फ्रंटल और साइड-इम्पैक्ट क्रैश-टेस्ट नियमों को कब से लागू किया जाएगा?

सड़क सुरक्षा को और बेहतर करने के लिए सरकार ने फ्रंटल (सामने से) और साइड-इम्पैक्ट टक्करों से सुरक्षा के नियमों में भी संशोधन किया है:
  • नए क्रैश-प्रोटेक्शन मानक अक्तूबर 2027 से आने वाले सभी नए वाहन मॉडल पर लागू होंगे।
  • इसके बाद, अक्तूबर 2028 से इन्हें देश में बिकने वाले सभी मौजूदा मॉडल्स पर अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।
इस चरणबद्ध तरीके से वाहन निर्माताओं को अपने नए और मौजूदा वाहनों को संशोधित मानकों के अनुकूल ढालने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।


पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए क्या दिशा-निर्देश तय किए गए हैं?

संशोधित नियमों में सिर्फ कार के अंदर बैठे लोगों की ही नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले पैदल यात्रियों और अन्य कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर भी पूरा जोर दिया गया है। पैदल सुरक्षा से जुड़ा यह संशोधित मानक अक्तूबर 2028 से नए वाहन मॉडल्स पर लागू होने वाला है। सरकार के इन तमाम समय-बद्ध नियमों के तहत अब ऑटोमोबाइल कंपनियों को क्रैश प्रोटेक्शन, फ्यूल-सिस्टम इंटीग्रिटी, ईवी बैटरी और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी के नए मानकों के हिसाब से अपनी गाड़ियों के डिजाइन में बदलाव करने होंगे।
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