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EV Tariff: यूरोपीय संघ ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 38.1 प्रतिशत तक लगाया टैरिफ, रिपोर्ट में दावा
Wed, 12 Jun 2024 05:29 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 12 Jun 2024 05:29 PM IST
सार
यूरोपीय संघ कई सप्ताह से यूरोप में आयात किए जा रहे चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा था।
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- फोटो : Freepik
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विस्तार
यूरोपीय संघ (ईयू) ने कथित तौर पर यूरोप में आयात किए जा रहे चीन निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर 38.1 प्रतिशत तक के शुल्क लगा दिए हैं। इस कदम से बीजिंग से तीखे प्रतिशोध की उम्मीद की जा रही है। यह कदम अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के दौरान ईवी सहित विभिन्न चीन निर्मित उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद आया है।
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मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरोप में कारोबार करने वाली कई चीनी ईवी कंपनियों को ईयू ने आधिकारिक रूप से शुल्क लगाने के बारे में सूचित किया है। लगाया गया शुल्क हर कंपनी के लिए अलग-अलग है। BYD इलेक्ट्रिक कारों पर शुल्क 17.4 प्रतिशत, Geely इलेक्ट्रिक कार पर 20 प्रतिशत और SAIC मॉडलों पर 38.1 प्रतिशत होगा। इन्हें 4 जुलाई से लागू किया जाएगा।
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यूरोप का यह कदम चीनी ईवी कंपनियों को कथित रूप से चीनी सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की जांच के कई हफ्तों बाद आया है। ऐसा कहा जाता है कि इस सब्सिडी से चीनी ईवी ब्रांड लागत को नियंत्रण में रख सकते हैं। और फिर अपने उत्पादों को यूरोप में ऐसे दामों पर पेश कर सकते हैं, जो स्थानीय यूरोपीय ब्रांडों के बराबर इलेक्ट्रिक मॉडलों की कीमत की तुलना में कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी हैं।
हालांकि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि उन्हें डर है कि यूरोप के बाजारों में चीनी ईवी की बाढ़ आ जाएगी। चीन ने पहले ही जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे दी है। जिसमें बीजिंग यूरोप से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर शुल्क लगा सकता है।
शुल्कों का खेल
यूरोप में चिंता काफी हद तक स्थानीय ऑटोमोटिव उद्योगों को चीनी ईवी ब्रांडों की भरमार से बचाने की है। जो न सिर्फ आकर्षक कीमतों पर बल्कि अपेक्षाकृत मजबूत और फीचर्स से भरपूर उत्पाद पेश कर रहे हैं। कई लोग तर्क देते हैं कि यूरोपीय ब्रांडों के लिए कीमत के मामले अपने चीनी प्रतिद्वंद्वियों से प्रतिस्पर्धा करना संभव नहीं है।
यूरोप में चिंता काफी हद तक स्थानीय ऑटोमोटिव उद्योगों को चीनी ईवी ब्रांडों की भरमार से बचाने की है। जो न सिर्फ आकर्षक कीमतों पर बल्कि अपेक्षाकृत मजबूत और फीचर्स से भरपूर उत्पाद पेश कर रहे हैं। कई लोग तर्क देते हैं कि यूरोपीय ब्रांडों के लिए कीमत के मामले अपने चीनी प्रतिद्वंद्वियों से प्रतिस्पर्धा करना संभव नहीं है।
लेकिन उच्च शुल्क से टेस्ला जैसे गैर-चीनी ब्रांडों पर भी असर पड़ने की संभावना है। जो चीन में ईवी बनाती हैं और यूरोप को निर्यात करती हैं। मर्सिडीज और फॉक्सवैगन जैसी अन्य कंपनियों को डर है कि चीन के प्रतिशोध से उसके एशियाई बाजार में व्यापार प्रभावित हो सकता है, जो दुनिया में कहीं भी सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है। कई यूरोपीय ब्रांडों ने पहले कहा है कि उनकी वैश्विक बिक्री का 30 प्रतिशत अकेले चीन से आता है।
जबकि चीन मुक्त और खुले व्यापार के लिए बाधाओं के रूप में टैरिफ का आरोप लगाता है। वहीं, कई पश्चिमी निर्माता भी चीनी प्रतिशोध की आशंका के कारण यूरोप द्वारा शुल्क लगाने के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं।