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EV: इलेक्ट्रिक वाहन हो रहे हैं लोकल! भारत के टियर 2 और टियर 3 शहरों में ईवी की धूम
Thu, 04 Jul 2024 02:47 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 04 Jul 2024 02:47 PM IST
सार
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन यह तरक्की एक जैसी नहीं है। एक नया चलन उभर कर सामने आया है। टियर 2 शहर ईवी अपनाने के मामले में अगला बड़ा युद्धक्षेत्र बनने के लिए तैयार हैं।
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Electric Scooter
- फोटो : Greaves Electric
विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन यह तरक्की एक जैसी नहीं है। जबकि शुरुआत में महानगरों ने अहम भूमिका निभाई थी। अब एक नया चलन उभर कर सामने आया है। टियर 2 शहर ईवी अपनाने के मामले में अगला बड़ा युद्धक्षेत्र बनने के लिए तैयार हैं।
यह बदलाव स्ट्रैटिजिक रिसर्ज प्रोवाइडर (रणनीतिक शोध प्रदाता) ब्लूमबर्गएनईएफ (बीएनईएफ) की हालिया रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है। 10 भारतीय राज्यों के 207 शहरों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारों की बिक्री के उनके विश्लेषण से कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
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यह बदलाव स्ट्रैटिजिक रिसर्ज प्रोवाइडर (रणनीतिक शोध प्रदाता) ब्लूमबर्गएनईएफ (बीएनईएफ) की हालिया रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है। 10 भारतीय राज्यों के 207 शहरों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारों की बिक्री के उनके विश्लेषण से कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
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इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों की बिक्री में टियर 2 शहरों ने महानगरों को पछाड़ा
एक मुख्य बिंदु कुछ टियर 2 बाजारों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों की बिक्री में उछाल है। इन शहरों ने ईवी अपनाने के मामले में इस सेगमेंट में अपने महानगरीय समकक्षों को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया है कि कौन से विशिष्ट मॉडल आगे चल रहे हैं। लेकिन यह इन छोटे शहरों में दोपहिया वाहन यूजर्स के बीच इलेक्ट्रिक विकल्पों के लिए बढ़ती पसंद की ओर इशारा करते हैं।
एक मुख्य बिंदु कुछ टियर 2 बाजारों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों की बिक्री में उछाल है। इन शहरों ने ईवी अपनाने के मामले में इस सेगमेंट में अपने महानगरीय समकक्षों को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया है कि कौन से विशिष्ट मॉडल आगे चल रहे हैं। लेकिन यह इन छोटे शहरों में दोपहिया वाहन यूजर्स के बीच इलेक्ट्रिक विकल्पों के लिए बढ़ती पसंद की ओर इशारा करते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि टियर 2 शहरों के भीतर ही, इलेक्ट्रिक कारों के लिए तस्वीर थोड़ी अलग है। यहां, राज्य की राजधानियां इस विकास का नेतृत्व करती नजर आती हैं। यह अन्य टियर 2 शहरों की तुलना में ज्यादा डिस्पोजेबल आय और बेहतर बुनिया ढांचे जैसे कारकों के कारण हो सकता है। जयपुर, लखनऊ, तिरुवनंतपुरम और गुरुग्राम जैसे शहर इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में खासी बढ़ोतरी देख रहे हैं।
इस बीच, रिपोर्ट अमीर टियर 1 शहरों में मजबूत ईवी अपनाने का श्रेय कई कारकों को देती है। डिस्पोजेबल आय वाला युवा वर्ग एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवाओं की बढ़ती मौजूदगी और ईवी मॉडलों की बढ़ती उपलब्धता मांग को बढ़ा रही है।
इस बीच, रिपोर्ट अमीर टियर 1 शहरों में मजबूत ईवी अपनाने का श्रेय कई कारकों को देती है। डिस्पोजेबल आय वाला युवा वर्ग एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टैक्सी सेवाओं की बढ़ती मौजूदगी और ईवी मॉडलों की बढ़ती उपलब्धता मांग को बढ़ा रही है।
टियर 2 शहर: राइड-हेलिंग इंफ्रा की कमी, लेकिन निजी बिक्री स्थिर
टियर 1 समकक्षों के उलट, टियर 2 शहरों में अभी तक मजबूत इलेक्ट्रिक राइड-हेलिंग बाजार नहीं देखा गया है। इससे पता चलता है कि इन छोटे शहरों में ईवी की बिक्री मुख्य रूप से निजी स्वामित्व की वजह से है। दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2023 में खरीदी गई ज्यादातर निजी इलेक्ट्रिक कारों को शुरुआती मूल्य सब्सिडी का समर्थन नहीं मिला था। यह सरकारी प्रोत्साहनों से स्वतंत्र, ईवी की बढ़ती ऑर्गैनिक मांग का इशारा करता है।
टियर 1 समकक्षों के उलट, टियर 2 शहरों में अभी तक मजबूत इलेक्ट्रिक राइड-हेलिंग बाजार नहीं देखा गया है। इससे पता चलता है कि इन छोटे शहरों में ईवी की बिक्री मुख्य रूप से निजी स्वामित्व की वजह से है। दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2023 में खरीदी गई ज्यादातर निजी इलेक्ट्रिक कारों को शुरुआती मूल्य सब्सिडी का समर्थन नहीं मिला था। यह सरकारी प्रोत्साहनों से स्वतंत्र, ईवी की बढ़ती ऑर्गैनिक मांग का इशारा करता है।
इसके अलावा, अच्छी खबर सिर्फ टियर 2 शहरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में टियर 1 की तुलना में टियर 2 और टियर 3 शहरों में हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों की बिक्री के लिए और भी तेज वार्षिक बढ़ोतरी दर का पता चलता है। यह भारतीय शहरों के व्यापक दायरे में उपभोक्ताओं की पसंद में इलेक्ट्रिक विकल्पों के प्रति महत्वपूर्ण बदलाव का इशारा करता है। वास्तव में, सूरत, जयपुर, नागपुर, कोल्हापुर और इंदौर जैसे शहर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर अपनाने में उछाल देख रहे हैं।
टियर 3 शहरों के लिए वित्तीय मदद अहम
हालांकि टियर 2 शहर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में निरंतर विकास के लिए तैयार दिख रहे हैं। लेकिन टियर 3 शहरों को इसी तरह की अपनाने के स्तर को हासिल करने के लिए अतिरिक्त मदद की जरूरत हो सकती है। रिपोर्ट बताती है कि मांग-पक्ष की नीतियां, खासकर वित्तीय सब्सिडी, इन शहरों में ईवी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह विशेष रूप से तब तक महत्वपूर्ण है, जब तक कि ईवी की कीमतें उस बिंदु तक नहीं पहुंच जातीं, जहां वे सीधे तौर पर पेट्रोल वाहनों के साथ शुरुआती लागत पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
हालांकि टियर 2 शहर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में निरंतर विकास के लिए तैयार दिख रहे हैं। लेकिन टियर 3 शहरों को इसी तरह की अपनाने के स्तर को हासिल करने के लिए अतिरिक्त मदद की जरूरत हो सकती है। रिपोर्ट बताती है कि मांग-पक्ष की नीतियां, खासकर वित्तीय सब्सिडी, इन शहरों में ईवी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह विशेष रूप से तब तक महत्वपूर्ण है, जब तक कि ईवी की कीमतें उस बिंदु तक नहीं पहुंच जातीं, जहां वे सीधे तौर पर पेट्रोल वाहनों के साथ शुरुआती लागत पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
टियर 2 शहर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलरों के लिए खास तौर पर एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभर रहे हैं। हालांकि, निरंतर सफलता उपभोक्ताओं की जागरूकता और पहुंच को बेहतर बनाने के लिए छोटे शहरों में ईवी बिक्री और डीलरशिप नेटवर्क के विस्तार पर निर्भर करेगी।
इसके अलावा, वित्तीय प्रोत्साहनों या तेजी से घटती कीमतों के जरिए अफॉर्डेबिलिटी (वहनीयता) के मुद्दे का समाधान, विशेष रूप से टियर 3 शहरों में आगे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा। चूंकि भारत में ईवी इकोसिस्टम का विकास जारी है। ऐसे में टियर 2 और टियर 3 शहर देश में सस्टेनेबेल मोबिलिटी (टिकाऊ गतिशीलता) के परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।