{"_id":"625eb1c0cfd4563eb0595e35","slug":"electric-bicycle-safety-features-samrat-nath-e-bike-assam-rifles-iti-student-develops-theft-proof-electric-bicycle-e-bike-by-using-modern-sensors-and-installing-location-tracking-systems","type":"story","status":"publish","title_hn":"चोरी नहीं होगी ये ई-बाइक!: असम के युवा ने बनाई 'थेफ्ट प्रूफ' इलेक्ट्रिक साइकिल, दिए कई सेफ्टी फीचर्स, 60 किमी है रेंज","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
चोरी नहीं होगी ये ई-बाइक!: असम के युवा ने बनाई 'थेफ्ट प्रूफ' इलेक्ट्रिक साइकिल, दिए कई सेफ्टी फीचर्स, 60 किमी है रेंज
Tue, 19 Apr 2022 06:27 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 19 Apr 2022 06:27 PM IST
सार
असम राइफल्स आईटीआई में टेक्नोलॉजी के एक छात्र ने मॉडर्न सेंसर का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनिक साइकिल (ई-बाइक) विकसित की है।
विज्ञापन
Electric Cycle
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
असम राइफल्स आईटीआई में टेक्नोलॉजी के एक छात्र ने मॉडर्न सेंसर का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनिक साइकिल (ई-बाइक) विकसित की है। कई फीचर्स वाली इस इलेक्ट्रिक साइकिल की खास बात यह भी है कि इसमें लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम भी लगाया गया है जिससे यह 'थेफ्ट-प्रूफ' बन जाती है यानी इस करके एक 'चोरी-सबूत'
60 किमी की रेंज
असम के करीमगंज जिले के सम्राट नाथ ने इस ई-बाइक को बनाया है। इसमें इस्तेमाल किए गए लैपटॉप से रिसाइकिल लिथियम-आयन बैटरी लगाई गई है। यह ई-बाइक एक बार चार्ज करने पर 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 60 किमी की दूरी तय कर सकती है।
चोरी से बचाने की भी व्यवस्था
नाथ ने कहा, "मैंने स्मार्ट ई-बाइक को चोरी से बचाने की भी व्यवस्था की है। इसमें बेहद शानदार सेफ्टी फीचर्स हैं। अगर कोई मेरी बाइक चोरी करने की कोशिश करता है तो मेरे स्मार्टफोन पर तुरंत एक मैसेज आएगा और बाइक में चोरी का अलार्म बजना शुरू हो जाएगा।"
विज्ञापन
दिए कई सेफ्टी फीचर्स
उन्होंने कहा, "मैं एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके दुनिया के किसी भी कोने से इस बाइक को कंट्रोल कर सकता हूं। मैंने खास तौर से इसके संचालन के लिए विकसित किया है। मैंने इस बाइक में एक और डिवाइस लगाया है जिसे किसी भी अन्य इलेक्ट्रिक बाइक में लगाया जा सकता है। हम इसे दुनिया के हर कोने से कंट्रोल कर सकते हैं और इसके लाइव लोकेशन को भी ट्रैक कर सकते हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है।"
उन्होंने अपनी बाइक में एक्सट्रा सेफ्टी को शामिल करने के लिए एक फिंगरप्रिंट फीचर भी लगाया है।
सपने को पूरा करने में लगे 4 साल
उन्होंने बताया कि खुद बाइक बनाने के अपने बचपन के सपने को पूरा करने में उन्हें चार साल लगे। उन्होंने कहा कि उन्हें 2016 में ऐसी ई-बाइक विकसित करने का विचार आया था, जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रहे थे।
उन्होंने कहा, "ई-बाइक बनाना मेरा बचपन का सपना था। आखिरकार, मेरा सपना सच हो गया और मैं कोडिंग सीखने के बाद इसे चार साल में पूरा कर सका।"
सम्राट नाथ ने रामकृष्ण नगर विद्यापीठ से उच्च माध्यमिक शिक्षा हासिल की और फिर असम राइफल्स आईटीआई में टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के लिए सिलचर में शिफ्ट हो गए।
विज्ञापन
60 किमी की रेंज
असम के करीमगंज जिले के सम्राट नाथ ने इस ई-बाइक को बनाया है। इसमें इस्तेमाल किए गए लैपटॉप से रिसाइकिल लिथियम-आयन बैटरी लगाई गई है। यह ई-बाइक एक बार चार्ज करने पर 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 60 किमी की दूरी तय कर सकती है।
विज्ञापन
चोरी से बचाने की भी व्यवस्था
नाथ ने कहा, "मैंने स्मार्ट ई-बाइक को चोरी से बचाने की भी व्यवस्था की है। इसमें बेहद शानदार सेफ्टी फीचर्स हैं। अगर कोई मेरी बाइक चोरी करने की कोशिश करता है तो मेरे स्मार्टफोन पर तुरंत एक मैसेज आएगा और बाइक में चोरी का अलार्म बजना शुरू हो जाएगा।"
विज्ञापन
दिए कई सेफ्टी फीचर्स
उन्होंने कहा, "मैं एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके दुनिया के किसी भी कोने से इस बाइक को कंट्रोल कर सकता हूं। मैंने खास तौर से इसके संचालन के लिए विकसित किया है। मैंने इस बाइक में एक और डिवाइस लगाया है जिसे किसी भी अन्य इलेक्ट्रिक बाइक में लगाया जा सकता है। हम इसे दुनिया के हर कोने से कंट्रोल कर सकते हैं और इसके लाइव लोकेशन को भी ट्रैक कर सकते हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है।"
उन्होंने अपनी बाइक में एक्सट्रा सेफ्टी को शामिल करने के लिए एक फिंगरप्रिंट फीचर भी लगाया है।
सपने को पूरा करने में लगे 4 साल
उन्होंने बताया कि खुद बाइक बनाने के अपने बचपन के सपने को पूरा करने में उन्हें चार साल लगे। उन्होंने कहा कि उन्हें 2016 में ऐसी ई-बाइक विकसित करने का विचार आया था, जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रहे थे।
उन्होंने कहा, "ई-बाइक बनाना मेरा बचपन का सपना था। आखिरकार, मेरा सपना सच हो गया और मैं कोडिंग सीखने के बाद इसे चार साल में पूरा कर सका।"
सम्राट नाथ ने रामकृष्ण नगर विद्यापीठ से उच्च माध्यमिक शिक्षा हासिल की और फिर असम राइफल्स आईटीआई में टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के लिए सिलचर में शिफ्ट हो गए।