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CAFE Norms: कमर्शियल व्हीकल सेक्टर की मांग, कैफे मानदंडों में हो बदलाव और N1 सेगमेंट में मिले छूट
Sat, 15 Nov 2025 02:56 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 15 Nov 2025 02:56 PM IST
सार
भारत के कमर्शियल व्हीकल (CV) यानी वाणिज्यिक वाहन (सीवी) निर्माता सरकार से अपील कर रहे हैं कि आने वाले ईंधन दक्षता (फ्यूल-एफिशियंसी) नियमों (CAFE norms) (कैफे मानकों) को दोबारा समीक्षा की जाए।
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कैफे नॉर्म्स
- फोटो : संवाद
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विस्तार
भारत के कमर्शियल व्हीकल (CV) यानी वाणिज्यिक वाहन (सीवी) निर्माता सरकार से अपील कर रहे हैं कि आने वाले ईंधन दक्षता (फ्यूल-एफिशियंसी) नियमों (CAFE norms) (कैफे मानकों) को दोबारा समीक्षा की जाए। कंपनियों का कहना है कि अभी जो प्रस्तावित नियम हैं, वे भारत में माल ढुलाई के असली हालात को सही तरीके से नहीं दर्शाते। यह मुद्दा तब और मजबूत हुआ जब Tata Motors (टाटा मोटर्स) ने अपनी ताजा क्वार्टरली एनालिस्ट कॉल (तिमाही विश्लेषक बातचीत) में पूरे उद्योग की साझा राय सरकार तक पहुंचाने की बात कही।
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CAFE नॉर्म्स पर विवाद क्या है
CAFE यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनोमी, नॉर्म्स दुनिया भर में वाहनों के कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए लागू किए जाते हैं। ये नॉर्म्स किसी कंपनी के पूरे वाहन पोर्टफोलियो की औसत फ्यूल-एफिशियंसी तय करते हैं। लेकिन ट्रक निर्माता कंपनियों का कहना है कि भारत में प्रस्तावित नियम फिक्स्ड-स्पीड लैब टेस्टिंग पर आधारित हैं। जो असली सड़कों पर चलने वाले भारी ट्रकों के व्यवहार और फ्यूल खपत को बिल्कुल भी सही तरीके से नहीं दिखाते।
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CAFE यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनोमी, नॉर्म्स दुनिया भर में वाहनों के कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए लागू किए जाते हैं। ये नॉर्म्स किसी कंपनी के पूरे वाहन पोर्टफोलियो की औसत फ्यूल-एफिशियंसी तय करते हैं। लेकिन ट्रक निर्माता कंपनियों का कहना है कि भारत में प्रस्तावित नियम फिक्स्ड-स्पीड लैब टेस्टिंग पर आधारित हैं। जो असली सड़कों पर चलने वाले भारी ट्रकों के व्यवहार और फ्यूल खपत को बिल्कुल भी सही तरीके से नहीं दिखाते।
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CV कंपनियां नया तरीका क्यों चाहती हैं
वाणिज्यिक वाहन उद्योग चाहता है कि सरकार पुराने टेस्टिंग सिस्टम की जगह भारत वेक्टर टूल (Bharat Vector Tool) (व्हीकल एनर्जी कंजम्पशन टूल) को अपनाए। यह सिस्टम वास्तविक ड्राइविंग कंडीशंस को मॉडल करता है, जैसे-
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वाणिज्यिक वाहन उद्योग चाहता है कि सरकार पुराने टेस्टिंग सिस्टम की जगह भारत वेक्टर टूल (Bharat Vector Tool) (व्हीकल एनर्जी कंजम्पशन टूल) को अपनाए। यह सिस्टम वास्तविक ड्राइविंग कंडीशंस को मॉडल करता है, जैसे-
- बदलते रास्ते और चढ़ाई
- अलग-अलग लोड
- ट्रैफिक, ब्रेकिंग, रुकावटें
- शहर और हाईवे की मिश्रित ड्राइविंग
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लाइट कमर्शियल व्हीकल्स को अलग छूट क्यों चाहिए
वाणिज्यिक वाहन उद्योग ने सरकार से N1 कैटेगरी और LCV (लाइट कमर्शियल व्हीकल्स) को CAFE नॉर्म्स से अलग छूट देने की मांग भी की है। कंपनियों का तर्क है-
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वाणिज्यिक वाहन उद्योग ने सरकार से N1 कैटेगरी और LCV (लाइट कमर्शियल व्हीकल्स) को CAFE नॉर्म्स से अलग छूट देने की मांग भी की है। कंपनियों का तर्क है-
- ये वाहन भारत के ट्रांसपोर्ट ईकोसिस्टम का सिर्फ 2 प्रतिशत ईंधन इस्तेमाल करते हैं।
- इनका CO₂ उत्सर्जन पूरे सेक्टर का 1 प्रतिशत से भी कम है।
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क्या है आगे की राह
सरकार अगले चरण के CAFE नॉर्म्स को अंतिम रूप देने पर काम कर रही है। उद्योग का कहना है कि-
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सरकार अगले चरण के CAFE नॉर्म्स को अंतिम रूप देने पर काम कर रही है। उद्योग का कहना है कि-
- भारी ट्रकों और हल्के वाहनों के लिए नियम अलग होने चाहिए।
- दक्षता का मापदंड वास्तविक सड़क स्थितियों पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल लैब टेस्ट पर।
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