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China: EV बैटरी टेक्नोलॉजी पर चीन की नई पाबंदी, भारत समेत कई देशों में धीमा होगा इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन
Fri, 18 Jul 2025 05:33 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 18 Jul 2025 05:33 PM IST
सार
China Restriction On EV Batteries: नई पाबंदियां खासकर लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरियों की कैथोड निर्माण तकनीक पर लागू होंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 में LFP बैटरी प्रोडक्शन में चीन का हिस्सा 94% और लिथियम प्रोसेसिंग में 70% रहा।
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ईवी बैटरी में चीन है एक्सपोर्ट लीडर
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
रेयर अर्थ मैग्नेट के बाद अब चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों से जुड़ी अहम तकनीक के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगा दी है। चीन के इस कदम से दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता प्रभावित हो सकते हैं। इसके जरिए चीन न सिर्फ अपने तकनीकी दबदबे को बनाए रखना चाहता है, बल्कि वैश्विक EV बैटरी बाजार में अपनी बढ़त को और मजबूत करने की रणनीति अपना रहा है।
कंपनियों को लेना होगा लाइसेंस
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अब ईवी बैटरियों के निर्माण और लिथियम के प्रोसेसिंग से जुड़ी कुछ उन्नत तकनीकों को देश से बाहर भेजने के लिए सरकारी लाइसेंस जरूरी होगा। इसका मतलब है कि ये टेक्नोलॉजी किसी भी विदेशी निवेश, व्यापार या तकनीकी साझेदारी के जरिए तब तक साझा नहीं की जा सकेगी जब तक सरकार की मंजूरी नहीं मिलती।
इससे पहले, चीन ने कुछ रेयर अर्थ मटेरियल्स और उनके मैगनेट्स के निर्यात पर भी पाबंदी लगाई थी, जो न केवल EV बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों में भी इस्तेमाल होते हैं।
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ईवी बैटरी में चीन है एक्सपोर्ट लीडर
चीन ईवी बैटरी इंडस्ट्री में पहले से ही लीडर बना हुआ है। मार्केट रिसर्च फर्म SNE के अनुसार, दुनिया में बिकने वाली EV बैटरियों में से करीब 67% बैटरियां चीनी कंपनियों की होती हैं। इनमें CATL, BYD और गोशन जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
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कंपनियों को लेना होगा लाइसेंस
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अब ईवी बैटरियों के निर्माण और लिथियम के प्रोसेसिंग से जुड़ी कुछ उन्नत तकनीकों को देश से बाहर भेजने के लिए सरकारी लाइसेंस जरूरी होगा। इसका मतलब है कि ये टेक्नोलॉजी किसी भी विदेशी निवेश, व्यापार या तकनीकी साझेदारी के जरिए तब तक साझा नहीं की जा सकेगी जब तक सरकार की मंजूरी नहीं मिलती।
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इससे पहले, चीन ने कुछ रेयर अर्थ मटेरियल्स और उनके मैगनेट्स के निर्यात पर भी पाबंदी लगाई थी, जो न केवल EV बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों में भी इस्तेमाल होते हैं।
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ईवी बैटरी में चीन है एक्सपोर्ट लीडर
चीन ईवी बैटरी इंडस्ट्री में पहले से ही लीडर बना हुआ है। मार्केट रिसर्च फर्म SNE के अनुसार, दुनिया में बिकने वाली EV बैटरियों में से करीब 67% बैटरियां चीनी कंपनियों की होती हैं। इनमें CATL, BYD और गोशन जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
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बैटरी के इस कंपनेंट पर लगी पाबंदी
- फोटो : Adobe Stock
CATL न केवल टेस्ला की बैटरियों की आपूर्तिकर्ता है बल्कि जर्मनी, हंगरी और स्पेन में अपने प्लांट्स भी चला रही है। वहीं, BYD ने 2024 में टेस्ला को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी EV निर्माता बन गई है। इसका बैटरी प्रोडक्शन हंगरी, थाईलैंड और ब्राजील जैसे देशों में फैला है।
बैटरी के इस कंपनेंट पर लगी पाबंदी
नई पाबंदियां खासकर लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरियों की कैथोड निर्माण तकनीक पर लागू होंगी। LFP बैटरियां सस्ती, सुरक्षित और तेजी से चार्ज होने वाली होती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 में LFP बैटरी प्रोडक्शन में चीन का हिस्सा 94% और लिथियम प्रोसेसिंग में 70% रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका और यूरोप के साथ-साथ भारत जैसे विकासशील बाजारों में बैटरी की कमी पैदा कर सकता है, जिससे कई कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं में देरी हो सकती है।
बैटरी के इस कंपनेंट पर लगी पाबंदी
नई पाबंदियां खासकर लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरियों की कैथोड निर्माण तकनीक पर लागू होंगी। LFP बैटरियां सस्ती, सुरक्षित और तेजी से चार्ज होने वाली होती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 में LFP बैटरी प्रोडक्शन में चीन का हिस्सा 94% और लिथियम प्रोसेसिंग में 70% रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका और यूरोप के साथ-साथ भारत जैसे विकासशील बाजारों में बैटरी की कमी पैदा कर सकता है, जिससे कई कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं में देरी हो सकती है।