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HC: मुंबई में पेट्रोल-डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर विचार करने के लिए बनाएं पैनल, हाईकोर्ट का आदेश
Thu, 16 Jan 2025 08:39 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 16 Jan 2025 08:39 AM IST
सार
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को डीजल और पेट्रोल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए एक पैनल गठित करने का निर्देश दिया है।
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Car Pollution
- फोटो : Freepik
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विस्तार
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को डीजल और पेट्रोल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए एक पैनल गठित करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि मुंबई की सड़कों पर जाम लगाने वाले वाहन शहर की खराब होती वायु गुणवत्ता के लिए प्रमुख कारण हैं।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी की खंडपीठ ने सरकार को 15 दिनों के भीतर विशेषज्ञों और नागरिक प्रशासकों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। जो इस बात पर विचार करेगी कि क्या मुंबई की सड़कों से डीजल और पेट्रोल आधारित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना और सिर्फ सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुमति देना व्यावहारिक होगा।
यह आदेश एक जनहित याचिका पर पारित किया गया था। जिसका हाईकोर्ट ने 2023 में शहर के खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को लेकर खुद संज्ञान लिया था।
अदालत ने 9 जनवरी को मामले की सुनवाई की थी।
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मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी की खंडपीठ ने सरकार को 15 दिनों के भीतर विशेषज्ञों और नागरिक प्रशासकों की एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। जो इस बात पर विचार करेगी कि क्या मुंबई की सड़कों से डीजल और पेट्रोल आधारित वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना और सिर्फ सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुमति देना व्यावहारिक होगा।
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यह आदेश एक जनहित याचिका पर पारित किया गया था। जिसका हाईकोर्ट ने 2023 में शहर के खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को लेकर खुद संज्ञान लिया था।
अदालत ने 9 जनवरी को मामले की सुनवाई की थी।
Bombay High Court
- फोटो : ANI
बुधवार को उपलब्ध कराए गए अपने विस्तृत आदेश में पीठ ने कहा कि शहर में वायु गुणवत्ता को खराब करने में वाहनों से होने वाला प्रदूषण एक प्रमुख योगदानकर्ता है।
अदालत ने कहा, "मुंबई महानगर क्षेत्र की सड़कें वाहनों से भरी हुई हैं और सड़कों पर वाहनों का घनत्व चिंताजनक है। जिसकी वजह से वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याएं और भी बढ़ जाती हैं। और इसे कम करने के लिए किए गए सभी उपाय अपर्याप्त साबित होते हैं।"
अदालत ने कहा, "मुंबई महानगर क्षेत्र की सड़कें वाहनों से भरी हुई हैं और सड़कों पर वाहनों का घनत्व चिंताजनक है। जिसकी वजह से वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याएं और भी बढ़ जाती हैं। और इसे कम करने के लिए किए गए सभी उपाय अपर्याप्त साबित होते हैं।"
Car Pollution
- फोटो : Freepik
पीठ ने इस बात पर गहन अध्ययन किए जाने की जरूरत पर जोर दिया कि क्या "डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना उचित या व्यवहार्य होगा।"
पीठ ने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति तीन महीने के भीतर अपना अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
पीठ ने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति तीन महीने के भीतर अपना अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
उच्च न्यायालय ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने वाली शहर की बेकरियां अपनी इकाइयों को प्राधिकारियों द्वारा निर्धारित एक वर्ष की समय-सीमा के बजाय छह महीने के भीतर गैस या अन्य हरित ईंधन पर चलाने के लिए परिवर्तित कर लें।
पीठ ने कहा, "हमारी राय में, ऐसी बेकरी इकाइयों के खिलाफ तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है। ताकि शहर में बड़ी संख्या में मौजूद ऐसी इकाइयां वायु प्रदूषण पैदा न करें। और विशेष रूप से, खतरनाक कण पदार्थों को सीमित किया जा सके।"
पीठ ने कहा, "हमारी राय में, ऐसी बेकरी इकाइयों के खिलाफ तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है। ताकि शहर में बड़ी संख्या में मौजूद ऐसी इकाइयां वायु प्रदूषण पैदा न करें। और विशेष रूप से, खतरनाक कण पदार्थों को सीमित किया जा सके।"
बीएमसी
- फोटो : एएनआई
पीठ ने कहा कि अब से कोयले या लकड़ी पर चलने वाली बेकरी या इसी तरह के अन्य व्यवसाय खोलने के लिए कोई नई मंजूरी नहीं दी जाएगी। और नए लाइसेंस इस शर्त के अनुपालन के बाद दिए जाएंगे कि वे सिर्फ हरित ईंधन का इस्तेमाल करेंगे।
पीठ ने नगर निकाय और एमपीसीबी को निर्माण स्थलों पर प्रदूषण संकेतक लगाने का भी निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की।
पीठ ने नगर निकाय और एमपीसीबी को निर्माण स्थलों पर प्रदूषण संकेतक लगाने का भी निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की।