45 दिन की तालाबंदी ऑटो सेक्टर पर पड़ी भारी, हो सकता है एक लाख करोड़ रुपये तक का घाटा!
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वायरस के चलते जारी लॉकडाउन की वजह से ऑटो सेक्टर को भारी नुकसान हुआ है। 45 दिन से बंद पड़ी फैक्ट्रियों के कारण ऑटो सेक्टर को 1 लाख करोड़ राजस्व का नुकसान होगा, जो कि सकल घरेलू उत्पाद का 0.5 प्रतिशत है। बता दें कि देश में 25 मार्च से 3 मई तक लॉकडाउन जारी है। हालांकि 3 तारीख के बाद स्थिति क्या होगी अभी इस पर सरकार की ओर से कुछ नहीं कहा गया है।
जीएसटी कलेक्शन में कमी
कंपनिया बंद होने के कारण उत्पादन शून्य हो गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके चलते सरकार के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कमी आएगी। वहीं इसके अलावा अन्य स्टेट टैक्स के कारण 14 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इस बीच सरकार ने कुछ संयंत्रों को फिर से शुरू करने की अनुमति दी है।
जल्द खत्म हो लॉकडाउन
इस पर कंपनियों का कहना है कि फिलहाल उन्हें कुछ राहत मिलती हुई नहीं दिखाई दे रही है। शोरूम बंद हैं और इनवेंट्री बढ़ती जा रही है। इस समय कोई वाहन भी नहीं खरीद रहा है। जबकि वेंडर्स सप्लाई के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं 3 मई के बाद क्या होगा इस बारे में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। कंपनियां चाहती हैं कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद इकोसिस्टम के सभी सेगमेंट को कारोबार के लिए खोल दिया जाए। जानकारों का कहना है कि ऑटो कंपनियां पहले से ही बुरे दौर से गुजर रही थीं ऐसे में हाथ से गए राजस्व की पूर्ति करना संभव नहीं है।
एक्साइज ड्यूटी में भी गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक करीब दो तिहाई राजस्व का नुकसान नई गाड़ियों पर लगने वाले जीएसटी से होगा। जबकि इसके बाद रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस पर जीएसटी लगेगा। वहीं लॉकडाउन के कारण यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंध के चलते फ्यूल पर मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी में भी गिरावट आई है। राज्यों के राजस्व में ऐसे समय में कमी आई है, जब इस वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए पैसे की सबसे अधिक जरूरत थी।